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सच्चा लीडर कौन? - हंसराज हंस (Improved)

 भूमिका

एक सच्चा लीडर केवल पद मात्र नहीं अपितु सोच और कार्यों का समूह है। इस श्रेणी के लोग दूसरों को प्रेरित करते हैं, सशक्त बनाते हैं और एक सामान्य लक्ष्य की ओर निर्देशित करते हैं। सच्चे लीडर ईमानदार, भरोसेमंद होते हैं और नैतिक सिद्धांतों के साथ कार्य करते हैं। उन्हें स्पष्ट पता होता है कि उनका लक्ष्य क्या है और वे दूसरों को भी उनके साथ चलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। वे दूसरों की उन जरूरतों और दृष्टिकोण को समझते हैं, जिनसे विश्वास और सहयोग बढ़ता है। वे साहसी होने के कारण जोखिम और कठिन निर्णय लेने के लिए तत्पर होते हैं। एक सच्चा लीडर वह है जो दूसरों की सेवा करता है, मजबूत संबंध बनाता है और सकारात्मक प्रभाव डालता हैब अब जानिए कि सच्चा लीडर कौन?

सच्चा लीडर कौन?

हम सबको लीडर शब्द कई जगह सुनने, पढ़ने को मिल ही जाता है।  

मैं इस आलेख के माध्यम से सच्चा लीडर कैसा होता है? बताने के लिए आपसे एक प्रश्न करता हूं? 

लीडर शब्द को सुनते ही आप सबके मन में एकाएक क्या क्या विचार आते हैं? 

इस प्रश्न का उत्तर लगभग सभी का यही आएगा कि लीडर एक नेता, प्रबंधक, बॉस व मैनेजर आदि के रूप में होता है। हम सब लीडर को सत्ता/ पद आदि से जोड़कर देखते है। पर बिना पद/ सत्ता के भी लोगों को प्रभावित करे, उनके लिए विश्वसनीय बने, अपने प्रभाव के दायरे को उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए स्वयं पहल करे। यह बाते ही आपको सच्चा लीडर बना पाती है। सच्चे लीडर के कई उदाहरण हमारे सामने हैं- जैसे महात्मा गांधी जी, मदर टेरेसा जी, लाल बहादुर शास्त्री जी, अब्दुल कलाम जी व स्वामी विवेकानंद जी और भी कई नाम ध्यान में आ जाएंगे यदि आप विचार करेंगे तो।

ऐसा लीडर सबसे पहले अपने आसपास, समाज/ देश से जुड़े किसी पहलू, समस्या पर असंतुष्टि, प्रतिरोध करता है। और अपनी तरफ से बदलाव के लिए पहल करता है। समाज, देश व जीवन में हमें अनेकानेक समस्याएं, चिंताएं देखने को मिलती हैं। 

सच्चा लीडर उनका विश्लेषण तो पूरी तरह से करता है और करना भी चाहिए। क्योंकि विश्लेषण से ही समस्याओं को पूर्ण रूप से समझा जा सकता है। पर समस्याओं के समाधान के लिए अपनी तरफ से वह क्या-क्या कर सकता है? इस पर वह अपनी ऊर्जा व समय ज्यादा व्यय करता है बनिस्बत विश्लेषण के। साथ ही वह अपने प्रभाव के दायरे को भी बढ़ाता जाता है। यह फेक्ट तथ्य है कि जैसे-जैसे प्रभाव का दायरा बढ़ेगा समस्याएं, चिंताएं अपने आप कम होती जाएंगी। इसका नतीजा यह होगा कि लोग आप पर बिना पद व सत्ता के भी विश्वास करने लगेंगे। आप उनके लिए विश्वसनीय, अनुकरणीय बन जाएंगे। विश्वसनीय होने के लिए आपकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। लीडर को निरंतर रूप से अपने ज्ञान व क्षमता को बढ़ाते रहना भी बहुत जरूरी है। समाज में बदलाव लाने के लिए लीडर को वर्तमान स्थिति से असंतोष प्रकट करना ही काफी नही है। बदलाव के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ -साथ एक अच्छा विजन (दृष्टिकोण) भी उसके पास होना चाहिए। साथ ही विजन की क्रियान्विति के लिए रोडमैप भी होना जरूरी है। कम से कम प्रथम स्टेप तो स्पष्ट होना ही चाहिए। यह सब नहीं होगा तो आप में तनाव, निराशा व क्रोध पैदा होने लगेगा। जो आपके लिए बाधा बन जाएगा। 

बहुत से लोग सिस्टम का प्रतिरोध तो करते है, पर बदलाव के लिए नही। केवल खुद की सहमति नहीं है, उनमें जरूरी काबिलियत न होना व कुछ खोने का डर है आदि कारणों से करते है। और! अंत में बदलाव तो दूर, खुद भी उसी सिस्टम में एडजस्ट होने लग जाते हैं। वह सच्चा लीडर नहीं हो सकता। सच्चा लीडर अपनी टीम के साथ निर्णय लेता है। टीम में वह निर्णय लेने के लिए बहुमत व पूर्ण सहमति से भी ऊपर जाकर टीम को ही स्वेच्छाधिकार प्रदान करता है। टीम द्वारा निर्णय लेने से जिम्मेदारी के साथ साथ जवाबदेही भी पैदा होती है। जिम्मेदारी ही हो और जवाबदेही न हो तो भी आपको सही आउटपुट (परिणाम) तो मिल जाएगा। पर आउटकम (परिणति) नहीं मिल पाएगा। इसलिए अच्छा व सच्चा लीडर स्वयं पहल करता है। अपने सभी कार्य, निर्णय टीमवर्क से करता है। यही उसकी सफलता व सच्चा लीडर होने का रहस्य है।

सृजक 

                   हंसराज हंस (अध्यापक)

महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय 

बनेठा ब्लॉक उनियारा जिला टोंक (राजस्थान) 304024

Mob.9829434517

प्रस्तुति



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