सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कवयित्री आचार्य संवेदना के दून प्रवास पर सजी महफिल

भूमिका

मध्य प्रदेश की कवयित्री आचार्य संवेदना के सम्मान में देवभूमि स्थित देहरादून में ओज कवि जसवीर सिंह 'हलधर' के आवास पर हुई काव्य गोष्ठी, कवियों ने गीत-ग़ज़लों से बांधा समां, तीन घंटे से ज्यादा समय तक सजी मौलिक महफ़िल। 

विवरण

उत्तराखंड की राजधानी में एमडीडीए कालोनी स्थित ओज के प्रतिष्ठित कवि जसवीर सिंह 'हलधर' के आवास पर शुक्रवार बीस सितंबर को आयोजित काव्य गोष्ठी में कविता के विविध रूप देखने को मिले। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध कवयित्री आचार्य संवेदना के दून प्रवास के दौरान उनके सम्मान में तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली महफ़िल में कवियों ने गीत और ग़ज़लों से समां बांध दिया। इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि केडी शर्मा ने की, जबकि संचालन युवा कवि अवनीश मलासी ने किया।


काव्य गोष्ठी की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई और युवा कवयित्री कविता बिष्ट ने मां सरस्वती का गुणगान किया। इसके बाद आचार्य संवेदना ने जब भावपूर्ण गीत सुनाए, तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। संवेदना ने जब 
‘भारत की नारी का सुंदर चित्र दिखाने आई हूं, 
रक्षा करना राम धरा की विनती बारम्बार करूं, 
संत और ऋषि रूठे पित्र मनाने आई हूं।' 
गीत गुनगुनाया तो समूचा माहौल ही भक्तिमय हो गया। शायर सागर डंगवाल ने अपनी ग़ज़लें सुनाकर वाहवाही बटोरी। धर्मेंद्र उनियाल 'धर्मी' के शेर भी खूब पसंद किए गए। मीरा नवेली ने तरन्नुम में गीत सुनाया, जिसे काफी सराहा गया। रामविनय सिंह ने संस्कृत में ग़ज़ल सुनाकर सबको अचंभित कर दिया। मणि अग्रवाल 'मणिका' के छंदों पर जमकर तालियां बजीं। शिवमोहन सिंह और श्रीकांत श्री की कविता भी खूब पसंद की गईं। हास्य कवि राकेश जैन ने अपनी कविताओं से खूब हंसाया।


वरिष्ठ शायर अंबर खरबंदा ने ग़ज़लों के अलावा मुख़म्मस सुनाकर महफ़िल लूट ली। ओज कवि जसवीर सिंह 'हलधर' ने छंदों के अलावा वीर रस की कविता सुनाकर तालियां बटोरीं। अरुण भट्ट ने तरन्नुम से ग़ज़ल सुनाई, जो काफी पसंद की गई। अवनीश मलासी की शिव और गौरा की शादी से संबंधित कविता भी खूब पसंद की गई।


असीम शुक्ल के नवगीतों में श्रोता देर तक डूबते-उतराते रहे। दर्द गढ़वाली की ग़ज़ल को भी सराहा गया। वरिष्ठ कवि केडी शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद मां सीता से संबंधित गीत सुनाकर समां बांधा। कार्यक्रम के अंत में नवसृजित पुस्तकें भी मध्य प्रदेश की कवयित्री संवेदना को भेंट की गईं।


शब्दक्रांति लाइव से साभार
सूचना स्रोत
श्री कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण
प्रस्तुति



















टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...