भूमिका
वे व्यक्ति समाज सुधारक थे, जिन्होंने जीवन भर समाज के उत्थान के लिए कार्य किया। उनकी सोच में समाज के हर वर्ग के लिए समानता और न्याय का भाव था। उन्होंने गरीबों, वंचितों और उपेक्षितों के हक के लिए आवाज उठाई और उन्हें उनका अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभाई। प्रकृति से मिली अपार शक्ति और प्रेरणा के कारण वे न केवल मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रहे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के पक्षधर भी थे। उनके कार्यों में मानवता और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान झलकता था। आइए समझने का प्रयास करते हैं एक ऐसे ही समाज सुधारक तेजा जी के व्यक्तित्व को।
व्यक्तित्व विवरण
#वीर_तेजाजी_महाराज जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन!
#लाछा_गुर्जरी की गायों की रक्षा के लिए जाते वक्त तेजाजी ने आग में जल रहे सर्प को बचाया तो जोड़े से बिछुड़ जाने के कारण सांप क्रोधित हो गया और तेजाजी को डसने लगा। तेजाजी ने सांप को रोककर बताया कि वे गायों को बचाने जा रहे हैं।
ऐसा माना जाता है कि उन्होंने सांप को वचन दिया कि वापस लौटूंगा तब डस लेना। गौरक्षा युद्ध में तेजाजी घायल हो गए।
वचन निभाने के लिए सांप के पास पहुंचे तो पूरे शरीर पर जख्म देखकर सांप ने डसने से मना कर दिया। तेजाजी ने वचन पूरा करने के लिए अपनी जीभ निकालकर कहा कि यहां घाव नहीं है। माना जाता है कि सांप ने उनकी जीभ पर डसा।
वचन निभाते हुए गौ रक्षा के लिए दिए इस मार्मिक #बलिदान के बाद तेजाजी को लोकदेवता मानकर पूजा जाने लगा।
कहा जाता है कि तेजा जी ने अपनी जीभ बाहर निकालकर अपने वचन को पूरा किया।
सांप ने उनकी वचनबद्धता देखकर उनको आशीर्वाद दिया की तुम्हारे नाम से सांप के डसे व्यक्ति कों जहर नही फैलेगा।
आज भी लोगों में मान्यता है कि उनके नाम की पट्टी बांधने से व्यक्ति में जहर नही फैलता।
#वीर_तेजा_जी_महाराज
प्रेषक
भगवान दास जी
काव्य रचनाएं
तेजा जी का गीत🙏🏻🙏🏻
दिनांक-13/09/2024
लाछा गूजरी की गायाँ डाकू, ले गया वीर तेजा जी -2
म्हारी गायाँ न ले आओ जी,
तेजा जी को जन्म हुयो, खरनाल जिला नागोर,
बाल पणा में परण्या, पत्नि पेमल छ:सिरमोर।
लाछा गूजरी की-------
भाभज का बचना सूँ तेज्यो लीलण से आयो ससुराल, अर धार काढती रा बछडा भाग्या, सासु न दीना श्राप।
लाछा गूजरी की ---------
पाछ्या ही मोड्या लीलण ने, सुण सासु री बात,
पेमल हाथ जोड़ समझायी, थे तो रूक जाओ करतार।
लाछा गूजरी की------
गायां ने जब लेबा चाल्या जलतो मिल्यो भाषक नाग,
नाग ने बचावण लाग्या वा डसबा ने तैयार।
लाछा गूजरी की ---------
नाग ने तो वाच्या देकर चाल्या वीर तेजा,
मेणा सूं खूब लड़्या खूनाँ की बहगी धार।
लाछा गूजरी की---------
गायाँ कूँ लाछा ने देकर, आया भाषक पास,
देख्या जख्म शरीर पर डसबा सूँ कर दिया नाट।
लाछा गूजरी की------------
बचन दिया पाछ्या नही होवे डस ल्यो जिब्या माय,
लोक देवता बण पुजवाया, गौ रक्षक का सरताज।
लाछा गूजरी की---------
स्व- रचित🙏🙏✍️✍️
सावित्री गौतम 'सत्या' (अध्यापिका)
अलीगढ, टोंक (राजस्थान)
*तेजा अवतारी*
माघ शुक्ल चौदस को जन्मयों,
नागौर जिला गांव खड़नाल।
नाम कहलायो तेजा अवतारी,
नही ऊं की माया को पार।
बहन पेमल की गाया खातिर,
जा लड़ पडयो डाकू मेंणा सूं,
सब न कर दियो मटियामेट,
गाया ने भेज दियो गांव ठेठ।
भाद्रपद दशमी को पहुंच्यो,
भाषक नाग के वचन बंधयो।
डस ले मनह अब भाषक तू,
कर आयो मह सारा काज यूं।
भाषक देख तेजा की काया,
मन म पड़ग्यो भारी सोच म।
पुरो तन कट पिट रहयो थारो,
कहां डसूं म थारा तन अंदर म।
तेजा जीभ निकाल यूं बोल्यों,
इ पर डस ल भाषक नाग तू,
खुश होकर यूं बोल्यों नाग अब,
तू कर लो काला खाया को ईलाज,
बांध ऊन की तांती कोई नर,
कर लेगो तेजा न मन सूं याद।
उतर जा व लो ऊं को सारा विष,
फैल लो थारो दुनिया में खुब यश।
हंसराज 'हंस'
टोंक (राजस्थान)


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