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प्रगतिशील कृषक श्री संजय चौहान के बांस प्लांटेशन और 'शुभावरी' जैविक फार्म का भ्रमण

भूमिका
एक ऐसे भ्रमण का विवरण जिसमें जैविक कृषि के लिए समर्पित न केवल परिवार से मिलने का सौभाग्य मिला अपितु इस प्रक्रिया को अपनाकर और अंगीकृत करके कुछ बेहतर समाज को देने के संकल्प का भी भान हुआ।
भ्रमण का विवरण
कोठडी (बेहट), सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
टीआईसीटीएसी द्वारा यूपी बांस मिशन के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने की खबर सुनकर, प्रगतिशील किसान श्री संजय चौहान ने हमें अपने विगत सात साल से अधिक पुराने बांस के बागान में आमंत्रित किया। यह वास्तव में एक सुखद आश्चर्य था कि बेहट में सीएफसी के दस किलोमीटर की परिधि में वास्तव में एक बांस बैंक मौजूद था।
कहने की ज़रूरत नहीं कि हम जितनी जल्दी हो सका, उनके खेत पर पहुँच गए। धरती के साथ सफल साझेदारी की उनकी कहानी प्रभावशाली है। वह कृषि कार्यों में स्वर्ण पदक विजेता हैं और खुद ही अपनी फसल उगाते हैं।
अपने विशाल खेत में नकदी फसल के रूप में गन्ना उगाते हैं। उनकी पत्नी श्रीमती ममता, जिन्होंने जैविक कृषि के लिए मुख्यमंत्री पुरस्कार जीता है और उनकी बहु-पुरस्कार प्राप्त प्रेरणादायी बेटी सुश्री शुभावरी जो सुबह चार बजे अपनी निःशुल्क योग कक्षाओं के लिए उठती हैं तथा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं।
यह खेतिहर मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती है, दिन में कॉलेज की पढ़ाई करने और कृषि संबंधी सामान खरीदने के लिए अपनी एनफील्ड बाइक से शहर जाती है और शाम को गायों का दूध दुहते हुए बछड़ों से मधुर बातचीत करती है।
हमको उनके गन्ने के खेतों (मानसून में) से गुज़रने का अवसर मिला, आराम करते समय शाखाओं पर पके आम्रपाली आमों का स्वाद चखा, और अंत में उनके विशेष बांस के बागानों पर नज़र डाली। सीएफसी, बेहट में टीआईसीटीसी कौशल प्रशिक्षण पल को एक साल तक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए पर्याप्त बांस लग रहा था।
यह वास्तव में बहुत उत्साहजनक था, क्योंकि हमारे सीएफसी के इतने करीब एक स्वस्थ आपूर्ति श्रृंखला एक सौभाग्य थी जिसकी हमने इतनी जल्दी सामने आने की उम्मीद नहीं की थी।


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