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वह लेखक जिनकी पुस्तक को हिंदी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया

भूमिका

उस पल का विवरण जब परिवार के सबसे बुजुर्ग आह्लाद के साथ भावुक हो उठे और उनके गौरव की अनुभूति का पारावार तक नहीं था और पुरस्कृत लेखक तो अपनी सफलता से भावुक हुए परिजन को देख हतप्रभ थे।

स्मरण का अवसर

राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए पुरस्कृत पुस्तक और उसके लेखक से बातचीत।

परिचय

साथियो! आइए आज विशेष अवसर पर मिलने वाली अनुभूति से रूबरू होने का प्रयास करते है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के 'देवेंद्र कुमार ने छुआ परचम' खबर शीर्षक ने पॉलीटेक्निक प्रवक्ता के चेहरे पर खुशियां बिखेर दी थीं। तो दोस्तो आइए स्मरण करते हैं 25 जून वर्ष 2014 का जिस दिन प्रवक्ता देवेंद्र कुमार को इस अविस्मरणीय अवसर पर पुरस्कृत करने के लिए आमंत्रित किया गया। मेरठ जनपद के प्रयोगधर्मी प्रकृति के अरिहन्त प्रकाशन द्वारा स्थापित अपनी दो आनुषांगिक इकाइयों में से एक रिप्लीट एजुटैक की सहायता से प्रकाशन के तकनीकी पुस्तकों के एक लेखक देवेन्द्र कुमार की एक पुस्तक 'तकनीकी आरेखन' को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (ए.आई.सी.टी.ई.) के द्वारा वर्ष 2013 के लिए सर्वोत्तम मूल पाठ्य के राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया। रिप्लीट एजुटैक द्वारा देवेन्द्र कुमार का लेखक के रूप में चयन वर्ष 2013 में किया गया था और यह लेखक देवेन्द्र कुमार एवं अरिहन्त प्रकाशन तथा रिप्लीट एजुटैक की साझा उपलब्धि रही कि अरिहन्त प्रकाशन के लिए तैयार पोलिटेक्निक स्तर की पहले लॉट की ही पुस्तकों में से हिन्दी श्रेणी की सर्वोत्तम पुस्तक का चयन किया गया। यह लेखक, प्रकाशक और निर्माणक तीनों ही इकाइयों की अनूठी उपलब्धि रही और यह उपलब्धि ही अरिहन्त की तकनीकी पुस्तकों की गुणवत्ता को दर्शाने के लिए आज भी पर्याप्त है। लेखक देवेन्द्र कुमार ने सदैव ही अतिरिक्त सतर्कता के साथ तमाम मापदण्डों को ध्यान में रखकर अपनी रचनाओं को तैयार किया। यह प्रथम अवसर था जबकि मेरठ के किसी प्रकाशन को ऐसा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया और इसके मूल में लेखक देवेंद्र कुमार थे। तो आइए मिलते हैं सहारनपुर निवासी पुरस्कृत लेखक श्री देवेंद्र कुमार जी से।



बातचीत

प्रश्न १. सर, आपने शिक्षण से लेखन की ओर जाने का निर्णय किसी के कहने पर लिया या फिर स्वयं है? विस्तार से बताइए।

उत्तर - "ये मेरा स्वयं का निर्णय था। मैं कॉलेज में विद्यार्थियों के शिक्षण/प्रशिक्षण का कार्य कर रहा था तभी एक दिन पेपर में मैंने अरिहन्त द्वारा बुक लिखने हेतु लेखक की विज्ञप्ति देखी तो मन में विचार आया कि इस तकनीकी शिक्षण कार्य को लेखन माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उनकी अध्ययन प्रक्रिया को सरल किया जाये जिससे विद्यार्थियों को जटिल प्रतीत होने वाले विषय की एक सरल एवं सहज भाषा की पुस्तक हिंदी में प्राप्त हो सके और मैंने लेखन कार्य शुरू किया। लिखते लिखते अवसर मिलने से पुस्तक लेखन में मेरी दिलचस्पी इतनी बढ़ गई कि मैंने पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई की लगभग 7 से 9 पुस्तकें लिखीं जो अरिहन्त पब्लिकेशन के द्वारा प्रकाशित हुईं।"

प्रश्न २. आपको पुरस्कृत किए जाने की जब घोषणा हुई तब आपकी और अपने परिजनों की अनुभूतियों का कृपया विवरण दीजिए।

उत्तर - "जब मेरे पास अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से प्रथम पुरुस्कार हेतु बुलावा पत्र मिला तो मुझे बहुत खुशी मिली और जब मेरे परिवार के सब सदस्यों को मालूम हुआ तो उनको भी बहुत खुशी हुई। सभी हितैषियों को बहुत हर्ष हुआ और मेरे इस कार्य हेतु बहुत बधाई दी गई और सभी परिवारजन, मित्रों और रिश्तेदारों ने गौरव महसूस किया।"

प्रश्न ३. सर, उस राष्ट्रीय पुरस्कार के मिलने के बाद भी उसके जैसा कोई अन्य अवसर आपके जीवन में आया?

उत्तर - "अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा प्रथम पुरस्कार प्राप्त होने के बाद अन्य कोई अवसर जीवन में नही आया, क्योंकि ऑफिस के कार्यों में अत्यधिक व्यस्तता के कारण अपने लेखन को मैं आगे तक नहीं ले जा पाया।"

प्रश्न ४. सर, आपके अतिरिक्त क्या किसी अन्य परिजन को भी ऐसा कोई पुरस्कार कभी मिला है?

उत्तर -  "नहीं मिला है।"

प्रश्न ५. सर, आपको आपके परिजनों ने अपना भविष्य बनाने के लिए आजादी दी या किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप किया? आप अपनी नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करेंगे या फिर उसको उसकी मर्जी के अनुसार भविष्य बनाने देंगे।

उत्तर - "परिजनों ने सदैव यही कहा कि हमें जीवन में अपना भविष्य अपने अनुसार जो कार्य अच्छा लगता है उसी में बनाना चाहिये। उस कार्य को करने में हम अपनी पूरी शक्ति लगाकर कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को समय समय पर सही मार्गदर्शन करते रहना चाहिये। जिससे वह गलत/सही में अन्तर महसूस कर सके लेकिन उनको ये भी मार्गदर्शन करना चाहिये कि जो क्षेत्र उन्हें अच्छा लगता है व जिससे उनका लगाव है उसी मे अपना भविष्य बनाना चाहिये जिससे उस कार्य को करने में हमारे ऊपर कोई दबाव न पड़े।"

प्रश्न ६. सर, आप आज एक मुकाम पर हैं तो अपने बीते समय और आज के वर्तमान समय में क्या बदलाव महसूस करते हैं?

उत्तर - "आत्मनिर्भर होना हर मनुष्य का सपना होता है। प्रत्येक इंसान चाहता है कि मेरे सपने तथा सपनों को पूरा करने की काबिलियत अपने खुद के हाथ में हो। यह काबिलियत इंसान को मिलती है तो उसका वर्तमान और भविष्य समयानुसार सहज और सुन्दर बन जाता है।"

प्रश्न ७. आपकी उपलब्धि को प्रेस के द्वारा दी गई प्रमुखता के संदर्भ में क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?

उत्तर - "प्रेस द्वारा यह कार्य बहुत ही सराहनीय है और प्रेस द्वारा ऐसे कार्यो को प्रमुखता देने पर मन को एक अपार खुशी एवं प्रेरणा मिलती है।"

सूचना स्रोत

देवेन्द्र कुमार

प्रस्तुति



टिप्पणियाँ

  1. देवेन्द्र कुमार जी जैसी प्रतिभाएं ही असल में "गुदड़ी के लाल" होते हैं, उन्हें बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं 👏🏻👏🏻👏🏻

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