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विमुक्त जनजाति अधिकार मंच की गंगोह (सहारनपुर ) में अधिकार रैली

भूमिका

देश में ऐसी बहुत-सी समस्याएं हैं जिनको लेकर लंबी अवधि से लोग शासन का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। एक ऐसे ही प्रयास का विवरण यहां पर प्रस्तुत है।

अधिकार रैली के माध्यम से प्रस्तुत मांग पत्र

महामहिम राष्ट्रपति भारत को पांच सूत्रीय मांग पत्र कोतवाल के माध्यम से गंगोह (सहारनपुर) से भेजा गया।

मांग पत्र का मजमून इस प्रकार रहा

विमुक्त जनजाति अधिकार मंच

कार्यालयः सैक्टर-7, सहारनपुर रोड़, गंगोह (सहारनपुर) - 247341

सम्पर्क सूत्र :- 7055030000, 9027949119, 9760056850, 9760109293

दिनांक:-31-08-2024


सेवा में,

महामहिम राष्ट्रपति जी (भारत)

विषयः- "आजादी के 75 वर्ष बाद भी उपेक्षा का शिकार देश के लिए सामूहिक बलिदान देने वाली विमुक्त जनजातियों (DNTs) को न्याय दिलाये जाने हेतु मांग पत्र!"


आदरणीय महोदया,

फिरंगियो के खिलाफ लड़कर भारी सामूहिक बलिदान देने वाली जिन जातियों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा 'क्रिमनल ट्राइब्स एक्ट' लगाकर उन्हे अपमानित व अमानवीय जीवन जीने को मजबूर किया गया था, आजादी के बाद 31 अगस्त 1952 को क्रिमनल ट्राइब्स एक्ट समाप्त कर उन्हें जन्मजात अपराधी के कलंक से मुक्त कर 'विमुक्त जनजाति' का दर्जा तो दिया गया, किन्तु अनेक सिफारिशों के बावजूद उन्हें वह वाजिब सम्मान व अधिकार नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार हैं। इसके विपरीत साजिश करके उन्हे आदतन अपराधी की श्रेणी में डालकर अपमानित भी किया गया। 73वें विमुक्त जनजाति दिवस (31 अगस्त, 2024) पर हम आपके ध्यानार्थ यह मांग पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. कई विद्वानों के विरोध के बावजूद 1952 में DNT पर लगाये गये आदतन अपराधी अधिनियम को समाप्त करने के लिये सन् 2000 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भारत सरकार से सिफारिश की थी, वहीं 2007 में संयुक्त राष्ट्र संघ के भेदभाव विरोधी संगठन (CRED) ने भी इस अधिनियम को समानता तथा मानवता के सिद्धान्त के विरुद्ध बताते हुए इसे समाप्त किये जाने को कहा था। खेदजनक है कि आज तक सरकारों द्वारा इन पर कोई अमल नहीं किया गया। देशभक्त जातियों (DNTs तथा NTs) को अपमानित करने के लिये उन पर बिना वजह ठोके गये इस कलंक से तत्काल मुक्ति दिलायी जाये।

2. विमुक्त व घुमन्तु जनजातियों को लेकर गठित इदाते आयोग की 2018 से लम्बित पड़ी रिपोर्ट को अविलम्ब लागू कराया जाये।

3. नियम विरुद्ध षड्यंत्र करके (विशेष रूप से उ०प्र० में) DNT तथा NT के दर्जे को कुछ जनपदों/क्षेत्रों तक सीमित किया गया। इस विसंगति को हटाकर पूरे राज्य में प्रमाण-पत्र जारी करने के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के निर्देशों व कई नोटिस भेजने के बावजूद उ०प्र० सरकार ने कोई अमल नहीं किया है। इस अन्याय को समाप्त कर इन जातियों की पूरे राज्य व देश में एक समान दर्जा देकर विमुक्त व घुमन्तु जनजाति के प्रमाण-पत्र जारी किये जाएं।

4. देश में एक राष्ट्र एक कानून का सिद्वान्त भी DNT तथा NT पर लागू नहीं है। दक्षिण भारत के राज्यों में शिक्षा व नौकरियों में इन वर्गों का अलग कोटा है, जबकि उत्तर भारत में ऐसा लागू नहीं किया गया। हमारी मांग है कि उत्तरी राज्यों में भी इनको अलग श्रेणी में जनसंख्या के आधार पर इनका अलग कोटा निर्धारित किया जाये, अथवा कई कमेटियो तथा पंजाब हाईकोर्ट के सुझावों के अनुसार इन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाये।

5. आजादी के इतिहास और पाठ्य पुस्तकों में DNT के क्रान्तिकारियों व शहीदों की घोर उपेक्षा कर गयी है। हमारी मांग है कि DNT वर्ग के क्रान्तिकारियों व शहीदों को पाठ्य पुस्तकों में स्थान देकर सम्मान दिया जाये। इसके साथ ही केन्द्र व राज्य सरकार के प्रकाशन विभागों से महापुरुषों पर पुस्तक प्रकाशन की श्रृंखलाओं में आजादी के लिये सामूहिक बलिदान देने वाले इस वर्ग के महापुरुषों पर भी पुस्तकें प्रकाशित की जाएं।

हमें आशा है कि आपके प्रभावी हस्तक्षेप से केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा हमारी उपरोक्त जायज मांगों पर अमल होगा और सात दशक से उपेक्षित देश की इस 10 प्रतिशत आबादी को न्याय मिल पायेगा।

आदर के साथ।

Dauntless (धर्मवीर खटाना) संयोजक

भवदीय (मुस्तकीम चौधरी) सह संयोजक

प्रतिलिपिः-

1. माननीय प्रधान मन्त्री जी भारत सरकार।

2. माननीय नेता प्रतिपक्ष लोकसभा ।




प्रतिनिधिमंडल मांगपत्र प्रेषित करते हुए
सूचना स्रोत
व्हाट्सएप ग्रुप आनुवंशिक बल, सुनहरा कल में श्री बलबीर सिंह के सौजन्य से
प्रस्तुति
उलझन सुलझन का ब्लॉग अंतर्संबंध





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