भूमिका
लड़कियां और महिलाएं विस्मित कर देती हैं, क्योंकि उनकी एक अद्भुत विशेषता यह है कि वे स्वयं से अधिक अपने अपनों के लिए जीना चाहती हैं। इस कविता के माध्यम से भी आप उनको समझ सकते हैं कि लड़कियां या महिलाएं इतना विस्मित करने वाली क्यों होती हैं?👇🏻👇🏻
नारी के रंग
हां; कुछ तो अजीब होती हैं
लड़कियां...
बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक,
कितने ही रंगों में रंगती हैं लड़कियां...
बचपन से युवावस्था तक,
बाप-भाई के रंग में,
पलती हैं लड़कियां...
जवानी से उम्रदराज होने तक,
अपने सांवरिया के रंग में पकती हैं लड़कियां...
उम्रदराज से आखिरी पड़ाव तक,
बेटे और पोते के रंग में,
घुलती हैं लड़कियां...
उम्र कोई भी हो चाहे कोई भी हो,
चाहे कोई भी हो रिश्ता,
सभी की चाहतों के रंग में,
पल-पल खुद को गढ़ती हैं लड़कियां...
कभी अच्छी बेटी तो,
कभी अच्छी बहन...
कभी अच्छी पत्नी तो,
कभी अच्छी मां...
कभी अच्छी दादी तो,
कभी अच्छी नानी के रिश्तों में ढलती हैं लड़कियां...
खुद के वजूद को मिटाकर भी,
अकेले में घुट-घुट कर रोती हैं लड़कियां...
भाई के लिए सपने छोड़ें...
बाप के लिए प्यार..
पति के लिए सुख-चैन त्यागें..
बेटे-पोतों के लिए आराम...
हां! कुछ तो अजीब होती हैं लड़कियां...
© सोनिया सिंह (संपादिका)
उलझन-सुलझन (महिला)
सहारनपुर
प्रस्तुति

बहुत ही सहरानीय।
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