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चित्रकारी में दक्ष प्रतिभा हरिराम जी

भूमिका

प्रतिभाएं किसी भी देश की धरोहर होती हैं। राजस्थान की एक ऐसी ही ख्यातिलब्ध धरोहर हैं श्री हरिराम गौर जी। इनके कौशल का डंका राज्य भर में बजता है।

परिचय

साथियो, पेन्टर हरिराम गौड़ साहब का कल ११ अगस्त को जन्मदिवस था। एक साधारण परिवार में जन्मे हरिराम जी के पिताश्री भी पेन्टिंग में कुशल थे। इस परिवार को अच्छे संस्कार विरासत में मिले। इनके पूर्वज चित्रकला व मूर्तिकला में निपुण थे। कहा गया है कि कला किसी की मोहताज नहीं होती है। सो वह आज तक बेरोकटोक निरन्तर चलती आ रही है। बढ़ती उम्र में भी ये अपनी कलाकारी को छोड़ नहीं रहे। साक्षात्कारकर्ता और हरिराम जी गौड़ 1981 में कक्षा 11 में सहपाठी रहे थे। किसी भी चित्र को आज भी जस का तस बना देने की क्षमता उनमें है। ऐतिहासिक नगरी टोडारायसिंह में सार्वजनिक स्थानों पर उनके द्वारा उकेरे गए चित्र, स्लोगन एवं रंगोली देखे जा सकते हैं। वे अपने जन्मदिन को गौशाला में जाकर सेवाकार्य करके मनाते आ रहे हैं। आपके सहयोग से नृसिंह मन्दिर में बेजूबान पक्षियों के लिए चुग्गा स्थल का जीर्णोद्धार करवाया गया। तो आइए आज मिलते हैं ऐसी सेवाभावी प्रतिभा से उनको उनके जन्मदिवस की बधाई देते हुए।

बातचीत

प्रश्न १. सर, आप कब से इस क्षेत्र में हैं और आपका सर्वोत्तम श्रेणी का काम कौन सा रहा और क्यों?

उत्तर - "जब मैं कक्षा 7 का विद्यार्थी था तब से ही चित्रकारी में अनुराग पैदा होने लगा था। मेरे द्वारा मन्दिरों में चित्रकारी एवं रावण का पुतला बनाने में सहभागिता रही!"

प्रश्न २. सर, आपने जो काम अपने पूर्वजों से सीखा उसमें आपका अपना नवाचार क्या माना जा सकता है?

उत्तर - "मेरे पूर्वज पुरानी शैली के चित्र बनाते थे।आधुनिकता की दौड़ में मैंने उन चित्रों को परिवर्तन कर नये ढंग से चित्र बनाए।

प्रश्न ३. क्या श्वेत श्याम चित्रकारी रंगीन का मुकाबला किसी भी रूप में कर सकती है, यदि हां तो कैसे?

उत्तर - "हां, श्वेत-श्याम चित्रकारी में मिक्सिंग शेडिंग का अनुभव यदि अच्छा हो, तो रंगीन चित्रकारी से भी बेहतर चित्र बनाए जा सकते हैं।"

प्रश्न ४. क्या आपने अगली पीढ़ी में किसी को इस क्षेत्र में ट्रेन किया है?

उत्तर - "हां, अपने परिवार के सदस्यों को, मौहल्ले के बच्चों को एवं स्कूली विद्यार्थियों को चित्र बनाना सिखाया, जो आज स्वरोजगार से युक्त हैं। बेटियों को भी इस कला में आगे लाने का प्रयास किया।"

प्रश्न ५. आपको जन्मदिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं और आपका अपना जन्मदिन मनाने का क्या तरीका है?

उत्तर - "बहुत बहुत आभार, सर।   

भारतीय संस्कृति के अनुरूप भगवान् के मन्दिर में दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा अर्चना की जाती है। इसके बाद गौ-शाला में जाकर गौमाता को हरा चारा, गुड़ खिलाया जाता है।  इसके बाद गौशाला के कार्मिकों को वस्त्र, मिठाई आदि भेंटकर उनका सम्मान किया जाता है। इस प्रकार से जन्मदिन मनाया जाता है। पाश्चात्य संस्कृति के तहत केक नहीं काटा जाता है। दीपक बुझाने की परम्परा की जगह दीपक जलाया जाता है। तो, यह रहा मेरे जन्मदिन का संस्मरण।"

हरिराम जी का हस्तशिल्प
















सूचना स्रोत 

शिवराज जी कुर्मी

प्रस्तुति 




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