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और! हम कर सके!

भूमिका

आत्मविश्वास से भरा यह शीर्षक उलझन सुलझन मासिक के लिए ऊर्जा की मानिंद है। राजस्थान राज्य के शिक्षक सितारे समूह से जुड़कर वैचारिक आदान प्रदान ने उलझन सुलझन प्रबंध तंत्र के आत्मविश्वास में अनंत वृद्धि की है तो वह ऐसे कि सीखने और सिखाने का एक अद्भुत सिलसिला जुड़ गया है।

आत्मविवेचन 

आत्मविश्वास की उत्पत्ति

उलझन-सुलझन पत्र के साथ जुड़ने से लेकर विविध क्षेत्रों में किए कार्यों से पाया कि हमारे जीवन में कितनी मिठास है। हम अपने व्यक्तित्व का और कार्यों का स्वयं ही असीमित विस्तार कर सकते हैं। पहली बार जब पत्र की टीम के प्रतिनिधि से बातचीत हुई तो सचमुच जीवन में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

जब बातों ही बातों में पता लगा कि टीम उलझन सुलझन सबके जीवन में अच्छाइयां, सकारात्मकता लाने हेतु कई तरीकों से प्रयासरत है तो बहुत अच्छा लगा। उसी कड़ी में प्रतिदिन उलझन सुलझन के यूट्यूब चैनल पर चाय के साथ काम की बात शीर्षक से शॉर्ट एवं स्वीट रूप से संदेशों को कहने की आपकी कला मन को भा गई। पत्र के माध्यम से समय-समय पर हमें बहुत सारी अच्छी-अच्छी बातें पढ़ने को मिलीं। उसमें प्रकाशित मोटिवेशनल व बहुआयामी प्रतिभाशाली लोगों से साक्षात्कार पढ़ने को मिल रहे हैं। साथ ही दैनिक जीवन की हर उस अच्छी गतिविधि को आप शेयर करते हैं जो समाज में सकारात्मक वातावरण निर्मित करती है। यह कार्य अपनेआप में मुझे बहुत महत्वपूर्ण लगा, क्योंकि आज की दुनिया में प्रशंसा करना लोग भूलते जा रहे हैं। ईर्ष्यालु व घमंडी स्वभाव का प्रसार होता जा रहा है। ऐसे समय में पत्र की प्रत्येक सकारात्मक मुहिम निश्चित रूप से हम सबके लिए अनुकरणीय व प्रेरणास्पद है। लगातार आपके साथ जुड़कर मैं और मेरे कई साथी बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं।

आपके व पत्र के सदप्रयास हमेशा फलते-फूलते रहें। हम सबकी ओर से पुनः पत्र को अनंत  शुभकामनाएं व बधाइयां।

हंसराज हंस

टोंक (राजस्थान)

और! मैं सीख गई!

'उलझन सुलझन' मासिक पत्र के माध्यम से सीखने-सिखाने की प्रक्रिया व गतिविधियों से जुड़े मुझे अधिक समय नहीं हुआ है। कुछ दिन पूर्व ही मैं इसका हिस्सा बनी हूँ। आदरणीय हंसराज जी का आभार व्यक्त करती हूँ कि आपने मुझे इस पत्र का हिस्सा बनाया। 'टोंक शिक्षक सितारे' व्हाट्सएप समूह में निरंतर साझा होती पोस्ट पढ़कर व देखकर स्व-प्रेरणा से कुछ पोस्ट मैंने भी साझा की। उन पर 'उलझन सुलझन' की ओर से मिले फीडबैक ने मुझे कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया व मेरी मौलिकता को भी सराहा। मेरी रचनाओं को आवाज़ देकर इस टीम ने मेरा मनोबल बढ़ाया। पत्र के एक प्रतिनिधि सर ने मुझे इस ई-पत्रिका की उपयोगिता व उद्देश्यों के बारे जानकारी दी। मेरे द्वारा सृजित बाल गीतों को आपने अपनी टीम के सहयोग से आवाज़ देकर यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया व मुझे प्रेरित किया कि मैं भी इस तरह का नवाचार कर सकती हूँ।अपनी रचनाओं को स्वयं की आवाज़ देकर पटल पर प्रेषित कर सकती हूँ। आरंभ में मैंने असमर्थता ज़ाहिर की तो मेरा हौसला बढ़ाते  हुए संदेशों के माध्यम से मुझको पूरी प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि यह तो बहुत आसान है और आप सहज भाव से कर पाएँगी। जिज्ञासावश संदेशों द्वारा प्रेषित पूरा प्रोसेस समझा और बहुत थोड़े से परिश्रम का परिणाम यह हुआ कि मैं सीख गई और आत्मविश्वास से भर उठी।

मैं उलझन-सुलझन के साझा प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा करती हूँ।आपके प्रयास निरंतर प्रगति पर हों। इसी आशा और विश्वास के साथ कि पत्रिका से मेरे सतत जुड़े रहकर सीखने में आप सदैव मेरी मदद करेंगे।

धन्यवाद 🙏🏻

ममता जाट 'मंजुला'

टोंक (राजस्थान)

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