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राजस्थान के टोंक से शिक्षा जगत की त्रिमूर्ति

भूमिका

समाज में जिस प्रकार से प्रत्येक इंसान ईश्वर द्वारा प्रदत्त अपनी अपनी भूमिका निभाता चलता है ठीक ऐसे ही क्षमतावान को भी एसेस करके उनको दायित्व पारखियों के द्वारा सौंपे जाते हैं। राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उदयपुर द्वारा भी राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम का विश्लेषणात्मक अध्ययन करने हेतु राज्य के टोंक जनपद की तीन विभूतियों का चयन किया है, जिनका विवरण यहां पर प्रस्तुत किया जा रहा है।

कार्ययोजना 

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उदयपुर द्वारा एक समूह जिसमें टोंक, बीकानेर, झुंझनू व राजसमंद डाइट को शामिल करके लीडर डाइट बीकानेर के नेतृत्व में एक राज्य स्तरीय अनुसंधान करवाने के लिए प्रत्येक डाइट से तीन-तीन विशेषज्ञ शिक्षकों का चयन करके राज्य स्तरीय शोध करवाने के आदेश दिए गए।

बैठक के दृश्य 



टोंक डाइट से डा.थानेश्वर (वरिष्ठ अध्यापक, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय पचाला ब्लॉक उनियारा), हंसराज हंस (अध्यापक, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय बनेठा ब्लॉक उनियारा), बद्रीलाल गुर्जर (अध्यापक, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय नगर ब्लॉक मालपुरा) का चयन किया गया। छ: दिवसीय कार्यशाला में शोध का विषय 'राजस्थान के राजकीय विद्यालय में हेल्थ एंड वेलनेस कार्यक्रम का विश्लेषणात्मक अध्ययन' रखा गया है।

इस अनुसंधान की प्रथम वर्कशॉप दिनांक 22 जुलाई से 27 जुलाई तक बीकानेर डाइट में रखी गई।

त्रिमूर्ति 


त्रिमूर्ति के उद्गार
राज्य स्तरीय अनुसंधान टीम का सदस्य बनकर बहुत अच्छा लगा। समूह के सभी शोध विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिला। रिसर्च हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमें तथ्यात्मक रूप से तर्क सहित बात कहने का हक देता है।
हंसराज हंस
(शोध विशेषज्ञ)
उनियारा, टोंक (राजस्थान)
लगातार तीसरे वर्ष राज्य स्तरीय शोध कार्यशाला बीकानेर का हिस्सा बनना मेरे लिए गौरवान्वित करने वाला पल है। गत दो वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा खोज परीक्षा के बारे में बच्चों को प्रोत्साहित करके अधिक से अधिक आर्थिक लाभ उठाने पर कार्य किया गया था।इस वर्ष राज्य स्तरीय अनुसंधान टाॅपिक पर सभी सदस्यों ने अपनी बेबाक राय रखकर तीन दिन में सामूहिक रूप से शोध आकल्प निर्माण किया।
बद्रीलाल गुर्जर
(शोध विशेषज्ञ)
उनियारा, टोंक (राजस्थान)
अब की बार का शोध विषय बहुत ही सहरानीय इसलिए है, क्योंकि इस रिसर्च के माध्यम से नीति विभाग को विद्यालय वातावरण को बच्चों के सीखने सीखाने के लिए खुशहाल व समृद्ध बनाने हेतु कई सारे सुझाव रिसर्च के माध्यम से भेजने का सुंदर अवसर मिला है।
डा.थानेश्वर कुमार शर्मा  
(शोध विशेषज्ञ)
उनियारा, टोंक (राजस्थान)
सूचना स्रोत
हंसराज हंस
प्रस्तुति




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