संवाद न्यूज एजेंसी (अमर उजाला से साभार)
शाकंभरी। घाड़ क्षेत्र के गांव कोठड़ी की युवा किसान शुभावरी ने जैविक आम की कई प्रजातियां तैयार की हैं। उनके द्वारा तैयार आम की शहरों में काफी मांग है। आम हाथोंहाथ बिक जाता है। शुभावरी चौहान अपनी मां ममता और पिता संजय के साथ मिलकर जैविक खेती करती हैं। जैविक खेती की प्रेरणा इन्हें कृषि विज्ञान केंद्र सहारनपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आई के कुशवाहा से मिली है।

अब इनके द्वारा अपने आम के बगीचे को भी नेचुरल तरीके से तैयार किया गया है। इसमें इन्होंने आम की फसल पर कोई रासायनिक केमिकल का प्रयोग नहीं किया है। इन्होंने अपने आम के फलों पर कवर लगा कर रखे हैं जिससे फलों पर कीड़ों का प्रकोप नहीं होता। फल भी सुंदर व स्वस्थ रहता है। फलों को निर्गुडी और बांसा के पत्तों से पकाते हैं। लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, मल्लिका सहित अन्य प्रजाति के आमों की दिल्ली, गुड़गांव, एनसीआर सहित जयपुर (राजस्थान), लुधियाना (पंजाब) के ऑर्गेनिक स्टोर पर भारी शुभावरी बताती हैं कि जैविक कृषि के लिए किसानों को जागरूक करने की मुहिम भी चला रखी है। शुभावरी को पूर्व में सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ, उद्यान विभाग द्वारा शाक भाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार, कृषि विभाग की जनपद स्तरीय मिलेट्स कार्यशाला में सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें कई मंचों पर पुरस्कृत किया जा चुका है।
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