कारगिल युद्ध में 'ऑपरेशन विजय' के दौरान शहीद हुए बारह जाट रेजीमेंट के लाँसनाइक खड़ग सिंह गुर्जर (निवासी उदयपुरवाटी, झुंझुनूं) के चारों बच्चे; सुनीता, बबली, ममता और संदीप; चारों आज डॉक्टर हैं, जो अद्भुत श्रेणी की तपस्या है। वीर नारी को सलाम जिसने बच्चों को इतनी अच्छी परवरिश दी कि देश के काम आए शहीद के जनसेवा अभियान को आज भी जारी रखे हुए हैं।
दैनिक भास्कर से साभार
कारगिल युद्ध में 'ऑपरेशन विजय' के दौरान शहीद हुए बारह जाट रेजीमेंट के खड़ग सिंह गुर्जर का बेटा और तीनों बेटियां डॉक्टर बन चुकी हैं और समाज की सेवा कर रही हैं। झुंझुनू के खड़ग सिंह 6 मई 1999 को दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। परिवार में उनकी पत्नी मनोहरी देवी के अलावा बेटी सुनीता, ममता, बबली और बेटा संदीप हैं। खड़ग सिंह के शहीद होने के बाद वीरांगना मनोहरी ने चारों बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर पैरों पर खड़ा करने का प्रण लिया और वीरांगना का यह सपना कोटा ने पूरा किया। चारों बच्चे आज डॉक्टर हैं और इनमें से तीन ने कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर कैरियर बनाया।
सहयोग से बनी संभावना
इंस्टीट्यूट द्वारा इन स्टूडेंट्स को रूटीन शुल्क में रियायत देकर प्रोत्साहित किया गया। शौर्य छात्रवृत्ति योजना लागू करने के बाद बबली व संदीप को दो वर्ष तक नब्बे प्रतिशत स्कॉलरशिप दी गई। सेना में सेवारत और सेवानिवृत्त सैनिकों के बच्चों को शौर्य छात्रवृत्ति के तहत पंद्रह से नब्बे प्रतिशत तक रियायत दी जाती है। पिता देश की रक्षा के लिए शहीद हो गए और मां ने बच्चों का कॅरियर बनाकर उन्हें देश की सेवा के लिए तैयार किया। एक परिवार की इससे बड़ी सफलता नहीं हो सकती। शहीद खड़ग सिंह के सभी बच्चों का चिकित्सक बनना हमारे लिए भी गौरव है कि इस सफलता में हम भागीदार बन सके। नवीन माहेश्वरी, निदेशक इंस्टीट्यूट।
बहन का प्रोत्साहन
खड़ग सिंह की शहादत के समय उनकी सबसे बड़ी बेटी सुनीता गुर्जर आठ वर्ष की थी। ऐसे समय में शहीद की पत्नी मनोहरी एवं भाई नवीन कसाणा ने परिवार को संभाला। सुनीता ने बारहवीं कक्षा के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी की और उसे एमबीबीएस के लिए डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज जोधपुर में एडमिशन मिल गया। डॉ. सुनीता ने तीनों भाई-बहनों क्रमशः ममता, संदीप और बबली को भी मेडिकल की तैयारी के लिए प्रेरित किया। बबली ने 2019 में नीट परीक्षा पास की। ममता ने वर्ष 2016 में नीट krack किया। वहीं, भाई संदीप ने भी वर्ष 2014-15 में कोटा में पढ़ाई की और 2017 में नीट क्रैक किया।
दादी ने बढ़ाया संबल
डॉ. सुनीता ने बताया कि हमारे लोगों की धारणा थी कि बेटियों को अधिक पढ़ाना नहीं चाहिए। कम उम्र में शादी कर दो। पढ़ाई में जो पैसा लगाने के बजाय उसकी जगह अच्छा खासा दहेज दे देना। हम लोगों को भी ऐसी बातों का सामना करना पड़ा। लेकिन, हमारी दादी पताशी देवी ने लोगों को जवाब दिया कि म्हारी छोरियां जहां भी जायेंगी नाम ही रोशन करेंगी। आज हमारे गांव में सिर्फ हम तीनों बहनें ही हैं, जिन्होंने गांव से बाहर जाकर पढ़ाई की। (दुर्भाग्यपूर्ण पर सत्य)
"आज सब गर्व करते हैं!" डॉ. सुनीता कहती हैं, जो भीलवाड़ा के बड़ा महुआ स्थित पीएचसी में मेडिकल ऑफिसर हैं। ममता एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर से एमबीबीएस के द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत हैं, जबकि सबसे छोटे भाई-बहन में संदीप और बबली आम मेडिकल कॉलेज दिल्ली से एमबीबीएस कर रहे हैं। डॉ. सुनीता ने बताया कि पापा का सपना था कि चारों बच्चे बेहतरीन शिक्षा प्राप्त कर परिवार का नाम रोशन करें।
यह दृष्टांत नज़ीर है उन समाजों के लिए जो रूढ़ियों के वशीभूत होकर भावी पीढ़ियों को हतोत्साहित करके उनकी प्रगति के मार्ग को बाधित करने का काम करते हैं और धन्य हैं कुरीतियों से जूझकर बालकों के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करने वाली महिलाएं जिन्होंने शहीद के स्वप्न को प्राणपण से पूरा करके दिखाया।
प्रस्तुति
प्रतिक्रिया
Great Family. Inspiration for others.
Wishing all to get maximum height in their career.
Professor Kalam Singh ji, Muzaffarnagar (UP)
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