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पाती लेखन

भूमिका
सृष्टि में असीमित तकनीकी बदलाव आ जाने के बावजूद भी पत्रों की भूमिका जस की तस है।

पाती लेखन को लेकर वीडियो

अभियान पर रिपोर्ट

आदरणीय नेगी सर, मीना जी 🙏

कल के आयोजन की एक संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की है प्रेषित है।स्वीकारें,

संक्षिप्त रिपोर्ट

स्वप्न साकार होने जैसा है पत्र मुहिम से जुड़ना

पत्र लेखन हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। आज भी उस पीढ़ी के लोग हैं जिन्होंने दहलीज पर खड़े हो डाकिया का इंतजार किया है। पत्रों में अपनों की महक को महसूस किया है। अपने उन परिजनों को उनके पत्र पढ़कर सुनाए हैं जिनमें शब्द ज्ञान का अभाव था। अपनों को वो बातें जो हम प्रत्यक्ष नहीं कह पाते थे पत्र बहते जरिया हुआ करते थे। फिर संवाहक के रूप में कबूतर, बाज़ से लेकर डाकिए तक के सफर को देखा है।लेकिन विकास की वीथिकाओं में यह पत्र संस्कृति कहीं विलुप्त सी हो गई थी।

जिसे पुनः प्राण दान दिया राजस्थान सवाईमाधो पुर में प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन , बेहद संवेदनशील व्यक्तित्व डा. सूरज सिंह नेगी जी एवम उनकी जीवन संगिनी सु श्री मीना सिरोला जी एवम दोनों पुत्रों ने। अनुकरणीय यह है कि प्रशासनिक दायित्वों के बीच आदरणीय नेगी जी ने संवेदनाओं को जीवित रखने यह कोना तलाश और तराशा भी।

कल 10 सितंबर को पाती अपनो के नाम मंच की ओर से एक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया ।अवसर था पाती लेखन मुहिम के 6 वर्ष पूर्ण हो जाने के बाबत ।

इस अवसर पर सूरज नेगी जी ने अपनी छह वर्षों की यात्रा का वृतांत सुनाते हुए बताया _" आज के संवेदना खोते युग में उन्हें पत्र लेखन की आवश्यकता महसूस हुई और उन्होंने एक छोटे से प्रयास के रूप में इसे स्कूली छात्र-छात्राओं से आरंभ किया तथा पत्र लेखन के प्रति उनकी रुचि देखते हुए उन्हें होंसला हुआ कि इसे और बढ़ाया जाए। अतः उन्होंने धीरे-धीरे इस मुहिम को एक प्रतियोगिता का रूप देते हुए देश भर का आव्हान किया।हर्ष का विषय यह रहा कि आज भारत की सीमा पार कर यह मुहिम विदेशों तक पहुंच गई है।उसी का परिणाम है कि 2018 से आरंभ हुई आज 2024 में उनके पास 3 लाख से अधिक पत्र आ चुके हैं। इन 6 वर्षों में 16 पुस्तक भिन्न-भिन्न विषयों को लेकर पत्र लेखन पर आ चुकी हैं। कई पुस्तकों का बड़े मंच पर विमोचन भी इस उद्देश्य से किया है कि पाती परिवार के सदस्य एक परिवार के रूप में आपस में जुड़ सकें।

 आपने बताया कहा यह मुहिम ऐसी है जैसा कोई सपना देखा था। आसान नहीं था सफर क्योंकि प्रकाशक पुस्तक प्रकाशन को लेकर संदेह में थे कि क्या होगा इन पुस्तकों का कौन खरीदेगा? लेकिन आज यह उम्मीद से कहीं अधिक फलीभूत हुई है ।

इस अवसर पर इस मुहिम से आरंभ से जुड़े कई साहित्यकारों ने अपने विचार रखे।

नीना छिब्बर जी ने कहा कि पत्र मुहिम निःसंदेह लोकप्रिय हुई है किंतु यदि हर प्रांत के साहित्यकार अपने-अपने प्रांत के समाचार पत्रों में अपनी भाषा में इन पत्रों पर एक आलेख लिखे तो इस मुहिम को और भी दूर तक पहुंचा जा सकता है। 

इस अवसर पर डॉ.लता अग्रवाल "तुलजा"ने कहा नि:संदेह हमने अपने संपर्कों का दायरा बढ़ाया है। किंतु पड़ोस में बैठे व्यक्ति के भावों को नहीं पढ़ पा रहे हैं। कारण है संवाद हीनता। पत्र इसका एक सुगम माध्यम है। यह महज शब्दों से उकेरी रेखाओं से कागज रंगना नहीं बल्कि इन शब्दों की उंगलियां थाम कर हम अपने अपनों संग अतीत की वीथिकाओं में भ्रमण करते हैं ।

श्रीमती प्रभा पंत जी ने कहा, जिस तरह मोर के अंडे को पेंट नहीं किया जा सकता। वह देखते ही पता चलता है। इस तरह पाती परिवार को किसी पहचान की आवश्यकता नहीं। उसकी लोकप्रियता आज अपने शिखर पर है।

सु श्री सीमा जैन ने कहा पत्र विधा को सामाजिक स्तर पर लाने का एक सफल प्रयोग नेगी जी ने किया है। इससे निःसंदेह पत्रो की उपयोगिता बड़ी है ।

पत्र विद्या में शिद्दत से जुड़े स्कूली छात्र-छात्राओं में लोकप्रिय बनाने में अपना मूल्य योगदान देने वाले श्री शिवराज सिंह कुर्मी जी ने कहा कि यह आरंभ स्कूली स्तर से किया गया था जिसका मैं साक्षी हूं।आज इसे फलीभूत होते देख बहुत प्रसन्नता हो रही है।

श्री बनवारी लाल शर्मा जी ने कहा पाती लेखन को पुनर्जीवित करने के लिए नेगी जी अकेले ही चले थे लेकिन उनका उद्देश्य बहुत ऊंचा था यही कारण रहा कि लोग जुड़ते गए कारवां बढ़ता गया। आज इसे वट वृक्ष के रूप में फलते देख प्रसन्नता हो रही है।

इस अवसर पर पत्र मुहिम से जुड़ी स्कूल छात्राओं में कु. परवीन बानो ने कहा कि पहले भी हम पत्र लिखते थे छोड़ देते थे। किंतु उसे वह मुकाम कभी नहीं मिल पाया जो नेगी जी के साथ जोड़कर हमें मिला है ।

कु. चंद्रमणि कानावत ने कहा जो भावनाएं हम ऐसे व्यक्त नहीं कर पाते उन्हें हम पत्रों के माध्यम से करते हैं और इस प्रतियोगिता की वजह से ही हममें पत्र लेखन के प्रति रुचि बड़ी है ।

कु. कृतिका जोशी ने कहा, मंच द्वारा आयोजित नियमित प्रतियोगिताएं और पत्र लेखन के प्रति हमें उत्साहित करने के लिए नेगी जी का धन्यवाद। इस मुहिम से हमारे ज्ञान में इजाफा हुआ है ।

कु. अलका नैनी ने कहा हमारे पाती लेखन परिवार के मुखिया आदरणीय नेगी जी हैं । बहुत अच्छा लगा इस मुहिम से जुड़कर, पत्र समाज में उत्पन्न खटास को कम करता है और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है ।

कु. सृष्टि गुर्जर ने कहा पत्र हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। यह संस्कृति आज छुप गई थी किंतु नेगी जी ने इसे पुनः र्जीवित कर प्राण दान दिया है ।

इस अवसर पर शिक्षा विभाग के सेवानिवृत संयुक्त निदेशक श्री सुभाष चंद्र जी शर्मा जी ने कहा कि आज पाती मुहिम जिस स्तर पर पहुंची है, इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए । नेगी जी ने जो दीपक जलाया है उसका प्रकाश अब धीरे-धीरे दूर तक पहुंच रहा है ।

इस अवसर पर पत्र मुहिम से जुड़े कई ऐसे साथी जो हमारे बीच आज नहीं हैं उन्हें श्रद्धा से स्मरण किया गया। जिनमे स्व. देवदत्त जी के प्रयासों को विशेष रेखांकित किया गया।

अंत में सुश्री मीना सिरोला जी ने सभी पाती लेखकों, प्रकाशकों तथा इस मुहीम में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष साथ देने वाले साथियों का आभार व्यक्त किया।

डा. लता अग्रवाल 'तुलजा' 

पत्र लेखन दिवस पर विशेष

अपनों को हम पत्र लिखें, लिख दें मन की बात।

अभी तलक तो दिवस है, फिर अंधेरी रात।।

     आओ हम सब प्यार का, छेड़ें इक नव राग।

     पाती अपनों को लिखें, पायें फिर अनुराग।।

अपने भी है रूठते, उन्हें मनायें आज।

पाती लिख हम प्रेम से, खोलें दिल के राज।।

     कलम उठा लो हाथ में, लिख दो पाती एक।

     दर्द दिलों का बांटना, काम बड़ा ही नेक।।

पाती लेखन से मिले, अपनों को आराम।

देती कितने फायदे, करे दवा का काम।।

     फोन में हम मस्त हुये, छोड़ा लिखना आज।

     गहराई में दब गये, दिल के सारे राज।।

बंधु से भी बंद हुआ, सबका मेल मिलाप।

अपने अपने राग को, सब ही रहे अलाप।।

🙏🙏 श्योराज बम्बेरवाल 'सेवक'मालपुरा टोंक राजस्थान

विवरण

पाती समूह के सभी विद्वतजनों को मेरा नमस्कार

पाती लेखन श्रृंखला के अंतर्गत बहुचर्चित एवम भारतीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने हेतु *सम्मानीय डॉ सूरज सिंह नेगी, डॉ मीना जी सिरोला एवम चन्द्र मोहन जी उपाध्याय द्वारा सम्पादित* पाती पुस्तक *बच्चो की पाती मतदाताओं के नाम* एक इतिहास रचा है । इस पुस्तक में भारत के कौने कौने से बच्चो ने अपने माता- पिता, अभिभावक,बड़े भाई बहन,एवम रिश्तेदारों को पत्र लिख कर मतदान के लिए जागरूक किया ।

इस पुस्तक में शिक्षक वर्ग,साहित्य कार,समाज सेवी एवम अन्यान्य सभी ने अपना सहयोग प्रदान करते हुए उत्साह पूर्वक सहभागिता निभाई है ।

पुस्तक में मुहिम से जुड़े शिक्षा विदों एवम सहयोगियों के अनुभवो एवम विचारों को भी स्थान प्रदान किया गया है ।

इसी क्रम में मेरे अनुभवों एवम विचारों पुस्तक में स्थान दिया गया । 

मैं आदरणीय एवम हम सबके सम्मानीय डॉ नेगी सर जी का तहेदिल से आभार व्यक्त करता हूँ ।

पुस्तक का कवर पेज एवम साजो सज्ज़ा देखते ही दिल को भा जाती है * *यह पाती पुस्तक उन सभी बच्चों के लिए एक अद्भुत उपहार है जिनके पत्र इस पुस्तक में प्रकाशित हुए है।*

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उदाहरण


सूचना स्रोत
संदीप कुमार जैन
प्रस्तोता












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