भूमिका
विश्व के सबसे विशाल लोकतंत्र की अठारहवीं लोकसभा के चुनावों में निर्वाचित सभी प्रतिनिधियों को हार्दिक शुभकामनायें और उनके लिये टीम उलझन सुलझन की मन की बात।
मन की भावना
आज चुनावी पर्व देश में शांत भाव से बीत गया है। मिली किसी को हार यहाँ है कोई समर में जीत गया है।
सांसद जो भी बना जीतकर उसको शत-शत आज बधाई। भूल सभी दल जावें मन से जो भाषण में हुई लड़ाई।
पक्ष और विपक्ष दोनों ही जनता के होते हितकारी। एक दूजे की करें बुराई भाव नहीं ये हैं संस्कारी।
संसद चले सुचारु ढंग से बहस मात्र हो सदा सार्थक। संसद चलती जनता धन से धन व्यय नहीं हो कभी निरर्थक।
सोच कोई हो पक्ष विपक्षी मात्र गलत है कैसे संभव। अहम भाव को तजकर सब ही करें असम्भव को भी संभव।
मात्र देश के हित की सोचें एक दूजे का मान करें सब। कतई नहीं कटुता को पालें करें आपस में सब अब।
सपने सब साकार करो मिल जो भी जनता को दिखलाये। जनता तो भोली होती है बहली उससे जो बहलाये।
भारत अपना विश्वगुरु हो बढ़ते कदमों को मत रोको। बात-बात पर किसी बात को उलटा करने को गत टोको।
कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण'
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