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डिबेट्स में प्रतिभाग जागरूक करने का एक तरीका

भूमिका

सामान्यतः पुलिस अधिकारी किसी भी किस्म की डिबेट में दर्शकों को कानून व्यवस्था से संबंधित मुद्दों, सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रक्रियाओं के संदर्भ में जानकारी देकर दर्शकों को मौजूदा कानूनों और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करते हैं। पुलिस अधिकारी पुलिस विभाग की कार्यवाहियों और निर्णयों के पीछे के कारणों को स्पष्ट करने के लिए किसी टीवी डिबेट में शामिल होते हैं। इससे जनता में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ता है।

टीवी डिबेट में भाग लेकर, पुलिस अधिकारी समुदाय के साथ जुड़ते हैं और उनकी चिंताओं को सुनते हैं। यह सहभागिता पुलिस और समुदाय के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देती है। ऐसे कार्यक्रम में पुलिस अधिकारी की भागीदारी सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और समुदाय के साथ मजबूत संबंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

डिबेट में प्रतिभाग

दिनांक 27.6.24 को न्यूज वर्ल्ड टी वी पर 'सी.ए.ए. एवं 1 जुलाई 2024 से लागू हो रहे तीनों नए कानूनों के सन्दर्भ में डिबेट में पुलिस अधिकारी रमनपाल जी ने हिस्सा लिया और दोनों विषयों पर प्रकाश डाला। इस डिबेट मे भोपाल से भाजपा प्रवक्ता श्री मोहित गर्ग, कांग्रेस के प्रवक्ता श्री रितेश त्रिपाठी और आगरा से वरिष्ठ एडवोकेट डॉक्टर रवि अरोरा भी सम्मलित हुए।  रमनपाल जी द्वारा बताया गया कि सीएए कानून पूर्व द्वारा भारत का हिस्सा रहे पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश के आजादी पूर्व एवं उससे पहले के भारतीय नागरिको को धर्म के आधार पर पीडित होकर भारत आने पर भारत की नागरिकता दिये जाने का स्वागत किया जाना चाहिए।पूर्व में कुछ भ्रम फैलाया गया था जिसके कारण कुछ जगहो पर विरोध प्रदर्शन हुए लेकिन अब लोगों को समझ आ गया है। वर्तमान में किसी प्रकार की कोई समस्या इसमें नहीं है और इसके अंतर्गत नागरिकता प्रदान किए जाने का कार्य हो रहा है। 

1 जुलाई 24 से प्रभावी तीनों नए कानूनों के बारे में भी उनके द्वारा प्रकाश डाला गया कि वर्ष 1860 मे अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों की प्रासंगिकता अब 164 वर्ष बाद समाप्त हो गई है। आजाद हिन्दुस्तान एवं वर्तमान डिजिटल युग और आतंकवाद आदि के परिप्रेक्ष्य में इन कानूनों में बदलाव समय की मांग थी जिसे पूरा कर दंड प्रणाली को न्याय प्रणाली में परिवर्तित करते हुए सुधार किए गए हैं, जो स्वागत योग्य हैं। कुछ अनावश्यक धाराओं को हटाया गया है और आवश्यकता के अनुसार कुछ नई धाराओं को शामिल किया गया है। इंडियन पेनल कोड से भारतीय न्याय संहिता मे 153 धाराएं कम की गई हैं। छोटे छोटे अपराधों में दंड के स्थान पर कम्युनिटी सर्विस को जोडा गया है और गम्भीर अपराधों में तकनीकी व फॉरेंसिक सहायता पर बल दिया गया है और दंड को कड़ा किया गया है।


सूचना प्रदाता
रमनपाल सिंह

प्रस्तोता







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