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धारा के विपरीत सफलतापूर्वक तैरने के कौशल के धनी हैं प्रधानाचार्य परम सिंह

भूमिका

मानव जीवन को संघर्ष की संज्ञा देना यदि उपयुक्त कहा जायेगा तो जीवन के झंझावातों के कारण और हमारे आज के मेहमान परम सिंह ऐसे झंझावातों से जूझने के माहिर हैं और स्कूल प्रबंधन को लेकर एक व्यवस्थापन पुस्तिका की रचना कर चुके हैं जिसको प्रशासनिक हलकों में भूरि भूरि प्रशंसा मिली है और उसको अनेक शिक्षण संस्थानों ने अपनाया भी।

परिचय

साथियो! मानव जीवन को कितना विस्तारित किया जा सकता है इसका आकलन कोई सरल सहज कार्य नहीं। आज हमारे साथ हैं प्रधानाचार्य परम सिंह जी जो धारा के विपरीत सफलतापूर्वक तैरने का कौशल रखते हैं। शिक्षार्जन के उपरांत जीवन-यापन के विविध स्रोतों का स्पर्श करते हुए आज वो हसनपुर स्थित श्रीमती सुखदेवी इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित कर रहे हैं। शैक्षणिक सुधारों को लेकर निरंतर प्रयासरत रहते हैं और शैक्षणिक प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के ध्येय से संकल्प शीर्षक से एक व्यवस्थापन कैप्सूल की रचना कर प्रसिद्धि पा चुके हैं। निरंतर सुधारों के बारे में सोचते हैं। शैक्षणिक चैनलों की कलुषिता से परे रहकर उत्तम सोचते और उत्तम करते हैं। संकल्पबद्ध तरीके से निर्भीक जीवन व्यतीत करने के अभ्यस्त हैं और अपनी साफगोई के लिए जाने जाते हैं। आइए मिलते हैं प्रधानाचार्य परम सिंह जी से।




बातचीत
प्रश्न १. सर, आपने शिक्षा के क्षेत्र का अब तक क्या आकलन किया है?
उत्तर - "पाठ्‌यक्रम या उसके कुछ अंश का अभ्यास करा देना, उसके आधार पर बालक द्वारा कक्षोन्नति प्राप्त कर लेना और शिक्षा पूर्ण कर धनार्जन हेतु नौकरी पा लेना या व्यवसाय कर लेना ही शिक्षा पूर्ण होना समझ लिया जाता है।
मेरे विचार से शिक्षा का सम्बन्ध मनुष्य की पाँच प्रधान क्रियाओं से है- भौतिक, प्राणिक, मानसिक, आन्तरात्मिक और आध्यात्मिक। और! यह शिक्षा बालक के जन्मकाल से बल्कि माँ के गर्भ में आने के समय से ही प्रारम्भ हो जानी चाहिए। प्रथम गुरु के रूप में माता तथा अन्य के रूप में शिक्षक अपनी-अपनी भूमिका का निर्वहन करें। इसके लिये वातावरण और सभी गुरुओं का व्यवहार व आचरण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि बालक पर गुरुओं द्वारा कही गई अच्छी व बुद्धिमानी की बातों के अपेक्षा गुरुओं के जीवन्त उदाहरणों का प्रभाव अधिक होता है।"
प्रश्न २. शिक्षा के क्षेत्र को करियर रूप में अपनाने की प्रेरणा आपको किस से मिली? और! क्या इस क्षेत्र में आकर आपकी आकांक्षाएं पूरी हुईं?
उत्तर - "कैरियर हेतु मेरी प्राथमिकताएं थीं- प्रथम - न्याय, दूसरी शिक्षा। क्योंकि इन दोनों क्षेत्रों में सही कार्य करने की स्वतन्त्रता बहुत है।
शिक्षा में व्यावहारिक रूप से जो प्रचलित है और जो वास्तव में होना चाहिए, उनमें गैप बहुत अधिक है। उस गैप को भरने हेतु मैं जितना कार्य करने में सफल हो सका उतनी ही आकांक्षा पूर्ण हुई। इस गैप को भरने के लिये पूरा जीवन भी कम होगा।
'आज' के प्रधानाचार्य' के रूप में प्रतिदिन बारी-बारी से छात्रों के द्वारा विद्यालय का कुशलतापूर्वक आत्मविश्वास के साथ संचालन करना हमारे विद्यालय की उपलब्धि है।"
प्रश्न ३. आप समाज में व्याप्त नकारात्मकता का कितना प्रभाव शिक्षा क्षेत्र पर पाते हैं?
उत्तर - "मेरे विचार से शिक्षा पर नकारात्मकता का प्रभाव कम, अज्ञानता एवम् उदासीनता का अधिक है।"
प्रश्न ४. शिक्षा से विलग कौन-सा क्षेत्र आपको सर्वाधिक आकर्षित करता रहा है?
उत्तर - "न्याय का क्षेत्र मुझे सबसे अधिक आकर्षित करता है।"
प्रश्न ५. आपका ऐसा कौन से शिष्य और मित्र तथा सम्बन्धी रहा जिसने आपकी तमाम आकांक्षाओं को पूरा किया ऐसा आपको लगता हो?
उत्तर - "मेरी आकांक्षाओं पर खरे उतरने वाले तथा पूर्ण करने में सहायक सिद्ध होने वाले मेरे कई शिष्य, मित्र व सम्बन्धी हैं, उन सबका विवरण देना कठिन व बड़ा कार्य है। एक शिष्य सुशान्त जो अपने शुद्ध व सुन्दर विचारों, निश्छल स्वभाव एवम् अपने जीवन को ही एक अच्छी पुस्तक मानकर जीवन जीने की कला अपनाने के कारण मुझे अति प्रिय है तथा मेरी आकांक्षाओं पर खरा भी है।
मित्रता उन्हीं से होती है जिनसे विचारधारा मेल खाती है। मेरी आकांक्षाओं में सहयोग करने में मित्रों व सम्बन्धियों की भूमिका को शब्दों में व्यक्त करना सम्भव नहीं है। मैं उन सबका ऋणी हूँ और हृदय से आभारी भी।"
प्रश्न ६. यदि आपको अपने क्षेत्र में सुधार करने का अवसर और आजादी मिले तो सर्वोच्च वरीयता पर क्या होगा और क्यों?
उत्तर - "ऐसा अवसर मिलने पर मेरा सर्वोच्च लक्ष्य होगा-शिक्षा के स्वरूप में परिवर्तन, नारी शिक्षा, गुरुओं की सुयोग्यता व सम्मान तथा सामाजिक जागरूकता।"
प्रश्न ७. सेवानिवृत्ति के बाद के लिए आपका क्या प्लान है?
उत्तर - "अभी सेवा में रहते अपने कर्तव्य के प्रति मेरे समर्पण से ध्यान न भटके, इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद का अभी कुछ प्लान नहीं किया है।"
आभार
प्रधानाचार्य महोदय का हार्दिक आभार कि अपनी व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर अपने मनोभावों से अवगत कराया।
प्रस्तोता




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