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समाज उत्थान का यह कैसा प्रयास? समझने की जरूरत और समझना समाज को ही होगा

भूमिका

सृष्टि का कोई भी समाज सभी वर्गों की एक अप्रतिम कार्यशाला है, जिसमें अपने-अपने तरीके से नागरिक अपने-अपने उद्देश्य से निरंतर क्रियाशील रहते हैं। एक ऐसा ही प्रयास देश के प्रमुख गुर्जर समाज के नागरिकों के माध्यम से गुर्जर इतिहास संरक्षण समिति, भोपुरा (गाजियाबाद) के तत्वावधान में जब मेरठ स्थित एक शिक्षण संस्थान में किया गया तो वहां वितरित पत्रकों ने एक दो नहीं अनेक प्रश्न खड़े कर दिए तो - 

आइए जानने का प्रयास करते हैं कि ऐसा यदि लोगों को ऐसा लगा तो क्यों? यह चर्चा करने की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि ऐसा प्रयास केवल मात्र गुर्जर समाज ही के साथ नहीं अपितु अधिकांश खेतिहर समाजों के साथ होता है और निरंतर।

समझने का प्रयास

मामले का समग्र भाव लेने के लिए सब कुछ हम साथ-साथ ही पढ़ेंगे और समझेंगे -

प्रथम पत्रक 

विवरण पत्रक

समाज के प्रबुद्ध एवं जागरूक महानुभावों से की गई अपील

पूरा गुर्जर समाज अपने अस्तित्व, अपनी अस्मिता और अपने अधिकारों के लिए व्यग्र, बेचैन और व्याकुल है और अति सक्रिय है। लेकिन हालातों और परिणाम की विवेचना के बाद लगता है कि उसकी दिशा ठीक नहीं है। संघर्ष के उपाय लोकतांत्रिक नहीं हैं। समाज का नेतृत्व संवाद में असफल है। ऐसी स्थिति में आपकी सामाजिक चेतना का भी दायित्व है कि आपातकाल में जैसे रेलवे का प्रबंधन समय के अनुकूल अपने यात्रियों की कुशलता और उन्हें समय पर अपने गंतव्य पर पहुंचाने हेतु गाड़ी का मार्ग बदल देता है, ठीक वैसे ही यह संकल्प गोष्ठी भी समाज के प्रयासों को सही दिशा में ले जाने के मार्ग परिवर्तन का एक प्रयास है। एक नया प्रयोग है, जिसमें आपकी भूमिका का सहयोग अपेक्षित है।

8 मार्च 1908 में यही प्रयास श्रीमती धर्मरक्षणी क्षत्रिय गुर्जर महासभा ने किया था, उसी महासभा के साक्षी आज राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ यशवीर सिंह और आप सब हैं।

उत्पन्न प्रश्न 

क्या राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय और हम उसके (वर्ष 1908 के) साक्षी किसी भी रूप में हो सकते है?

उन महानुभावों ने जो 20-21 मार्च 1909 में मुजफ्फरनगर में सामाजिक उत्थान के उद्देश्य तय किए थे, यह उनका ही परिणाम है कि समाज में पूर्ण जागरूकता, प्रगति, आर्थिक समृद्धि आई है। महासभा के तत्कालीन उद्देश्यों से वर्तमान समाज को अवगत कराना हमारा कर्तव्य है. जो निम्नलिखित हैं:

1. समाज को संगठित कर उसकी पहचान कायम करने के प्रयास किए जाएं।

 उत्पन्न प्रश्न 

इतने वर्षों में पूरे देश में कहां कहां संगठन हो पाया यह तो स्पष्ट कर दिया जाना था! 

2. राष्ट्रभक्ति के कारण गुर्जर समाज की बनी सत्ता विरोधी छवि को बदला जाए और सत्ता शासन और प्रशासन से संवाद कर अधिकार प्राप्ति के प्रयास किए जाएं।

उत्पन्न प्रश्न 

अधिकार प्राप्ति की बात समाज के किस सेक्टर को ध्यान में रखकर कही जा रही है? 

3. समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास को दूर कर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा किया जाए।

उत्पन्न प्रश्न 

इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए जिन मानव संसाधनों ने प्रयास किए व क्या क्या प्रयास किए इंगित किया जाना चाहिए था।

4. तकनीकी और रोजगार मूलक शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाए एवं शिक्षा और संस्कारों की गुणात्मकता का विकास किया जाए।

उत्पन्न प्रश्न 

क्या ऐसी सोच विकसित करने की दिशा में किए गए प्रयासों का विवरण दिया जाना चाहिए था कि नहीं?

5. गरीब एवं वंचित मेधावी छात्रों की सहायता के सार्थक प्रयास किए जाएं।

उत्पन्न प्रयास एवं प्रश्न 

प्रयास

ऐसा नोएडा में यद्यपि आरंभ किया गया है लेकिन इसके लिए विद्यार्थी मौखिक रूप से चयनित कर लिए जाते हैं, जबकि अमर उजाला पत्र प्रकाशन समूह ऐसा ही प्रयास करने के लिए प्रदेश स्तरीय लिखित परीक्षा कराकर पात्र लोगों का चयन करता है। ऐसा करने से समाज के प्रश्न सृजित करने में सक्षम मानव संपदा को उत्तम श्रेणी के प्रश्न सृजित करने पर गौरव की अनुभूति कराई जा सकती है।

प्रश्न

क्या हम लोग अपने शिक्षक वर्ग की सहायता से ऐसा राष्ट्रीय स्तर पर नहीं कर सकते?

6. सामाजिक सौहार्द्र और संगठन की भावना को मजबूत किया जाए।

उत्पन्न प्रश्न 

आरंभ में इंगित वर्ष से अब तक कितना काम हुआ क्या यह बताने में कोई संकोच होना चाहिए और यदि नहीं किया गया तो क्यों? 

वास्तविकता

सामाजिक सौहार्द्र तो इस समाज में नैसर्गिक है क्योंकि लगभग प्रत्येक धर्म में इस समाज का प्रतिनिधित्व है।

7. अपनी संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जुड़ी जीवन सभ्यता को अक्षुण्ण बनाया जाए।

8. गौरवशाली इतिहास की अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने के सामूहिक प्रयास किए जाएं।

उत्पन्न स्थिति 

उपस्थितजन किस अमूल्य धरोहर के संरक्षण को समझें? इस तरह लिख देने से क्या कोई समझ पाएगा?

आओ सब एक साथ मिलकर संकल्प लें कि अपने पारिवारिक दायित्वों के साथ-साथ अपने समाज के समग्र उत्थान के प्रयासों में अपनी प्रभावशाली भूमिका का निर्वाह करेंगे। महानुभावों, कण-कण से पर्वत बनता है और बूंद-बूंद से सागर फिर आप तो स्वयं में एक विलक्षण व्यक्तित्व के समर्थ व्यक्ति हैं। आपका प्रयास ही भावी समाज की भव्य इमारत की बुनियाद बनेगा और भावी संतति आप पर गर्व करेगी।

इतिहास संरक्षण समिति, भोपुरा गाजियाबाद (उ.प्र.)

भ्रमात्मक विवरण 

उपरोक्त अपील तथा उल्लिखित उद्देश्यों  को तय करने के वर्ष १९०८-०९ दर्शाए गए हैं और तब से अब तक इनमें उल्लिखित उद्देश्यों में से कौन-सा प्राप्त कर लिया गया। इसका कोई विवरण नहीं है। और! यदि प्राप्त नहीं किया गया तो समझने की जरूरत यह है कि यह संगठन की विफलता है या कि सफलता। इतिहास संरक्षण समिति के लिए किसी का भी दायित्व निर्धारित न किया जाना और पूरा पोस्टल एड्रेस ना मेंशन किया जाना कितना बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाता है?

द्वितीय पत्रक  

इतिहास बचाओ, स्वाभिमान बचाओ

संकल्प गोष्ठीः 2 अक्टूबर 2023

1. संकल्प गोष्ठी के विचारणीय बिन्दु और भावी कार्य योजना पर सार्थक चिन्तन-

गुर्जर समाज के हित में जो भी विषय अदालत में कानूनी कार्यवाही के चल रहे हों, उनकी पैरवी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाये। 

(किसके द्वारा)

इसके लिए सजग सक्रिय कार्यकर्ता एवं वकीलों की देय फीस की व्यवस्था हो। 

(यह व्यवस्था सशुल्क हो या कि नि:शुल्क?)

2. राजनैतिक सत्ताधारी सक्षम नेतृत्व से संवाद एवं ज्ञापन का दायित्व सुनिश्चित करें।

(राजनीतिक सत्ताधारी ऐसा कैसे करें स्वविवेक से या फिर जनता से संवाद करके?)

3. वर्तमान समय में मीडिया की बड़ी भूमिका है इसलिए समाज के हित में मीडिया प्रबंधन सुनिश्चित करें।

(डॉक्यूमेंटेशन में हमारी स्थिति प्रस्तुत पत्रकों का अवलोकन करके ही समझी जा सकती है। क्या इस स्थिति में उपयुक्त मीडिया प्रबंधन संभव है?)

4. हिंसक आन्दोलन न हो, नेतृत्व इसकी गारन्टी सुनिश्चित करें।

(हमारे नेतृत्व में ऐसे कितने कुशल नेतृत्वकर्ता हैं जो भीड़ प्रबंधन में सक्षम हैं? और ऐसी गारंटी दे सकते हैं?)

5. इतिहास का लेखन, प्रकाशन एवं वितरण सुनिश्चित करें। 

(बढ़िया)

6. शासन से माँग की जाए कि निर्दोष लोगों को आन्दोलन की धाराओं में न फंसाए, इसके लिए सक्षम समिति का गठन हो।

(यदि शासन मांग ना माने तो सक्षम समिति के समक्ष क्या विकल्प होगा?)

7. भावी राजनीति की दिशा और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राजनैतिक एवं सामाजिक स्तर पर ओ.बी.सी. संघ के साथ सौहार्द स्थापित करने का प्रयास करें एवं ओ.बी.सी. संगठन में अपनी पहचान मजबूत करें।

(यह थिंक टैंक का काम है क्या आमजन के लिए ऐसा कर पाना संभव है?)

8. किसी भी समाज के प्रति आवेश में अभद्र शब्दों का प्रयोग न करें। अपनी बात को प्रमाणिक तथ्यों के साथ ही प्रस्तुत करें। दूसरे समाजों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करें ताकि अन्य समाजों में आपकी स्वीकार्यता बढ़े।

(ऐसे निदानों में क्या समाज के आमजन को प्रशिक्षित किए जाने की क्या कोई योजना है?)

9. समाज का प्रत्येक उत्तरदायी नागरिक परिवार और समाज दोनों स्तरों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपने बच्चों में पैदा करें, ताकि वह वक्त के साथ अपनी प्रगति सुनिश्चित कर सके।

(क्या हमारे सीधे सरल निरक्षर और साक्षर जनमानस के लिए ऐसा कर पाना संभव है?)

प्रस्तावक

गुर्जर इतिहास संरक्षण समिति भोपुरा, गाजियाबाद (उ.प्र.)

(देखें फिर से कोई प्रमाणित पता नहीं?)

क्या निरर्थक प्रयासों से किसी भी धर्म, समुदाय अथवा वर्ग का भला संभव है? यह बताने के लिए कोई ना आएगा। हमको स्वयं ही सोचना होगा कि क्या हमारे हित में और क्या अहित में तथा क्या किसी भी समाज या वर्ग को अपने संख्या बल का दुरुपयोग करने का हक़ किसी को भी देना चाहिए कि नहीं।

निवेदक

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