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इस पहल की भांति कुछ करके तो देखिए

भूमिका

साथियो, दुनिया में सकारात्मक तरीकों से नवाचार करने वालों की कमी नहीं है और वो नवाचारी बधाई के पात्र हैं हो हद दर्जे के नकारात्मक हो चुके माहौल में भी बेहतर करने के लिए सदैव उत्सुक रहते हैं। आइए एक ऐसे ही उच्च कोटि के प्रयास से रूबरू होते हैं जिसके केंद्र में एक शिक्षक संदीप जोशी जी हैं।

अच्छी पहल

बच्चे नवाचार करें और उस से कुछ सीखें, यह सोच राजस्थान के जालोर में शिक्षक संदीप जोशी ने एक पुस्तकालय बनाया जिसके लिए तीन सौ से से अधिक पुस्तकों का संग्रहण किया। अब देखिए यह कैसे उपलब्ध संसाधनों ही को व्यवस्थित करके किया गया। रेवत स्कूल के वरांडे में पुस्तकालय की कल्पना को साकार किया गया। वहां पर बच्चे नि:शुल्क पढ़ते हैं व पुस्तकें घर भी ले जा सकते हैं।



दिनेश जांगिड़ | जालोर

आज यदि आप अवलोकन करें तो पाएंगे कि आजकल पढ़ाई से बच्चों का मोहभंग सा हो रहा है। फलतः स्कूल और कॉलेज में पुस्तकालय सूने दिखते हैं। ऐसे में जालोर जनपद के एक स्कूल ने एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है जहां कि पुस्तकालय ही बच्चों के बीच आ गया है। बच्चों की जब इच्छा हो, कोई भी पुस्तक किसी भी समय लेकर पढ़ सकते हैं, कक्षा में ले जा सकते हैं और इच्छा हो तो घर भी ले जा सकते हैं। यहां पुस्तकों का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता और न ही इन्हें इश्यू किया जाता है। यह है जिले के रेवत गांव स्थित सरकारी स्कूल का बरामदा जिसमें कि पुस्तकालय स्थापित कर उसमें बच्चों के लिये उपयोगी लगभग तीन सौ पुस्तकें रखी गई हैं। इसके लिए बरामदे में ही विशेष रैक बनाई गई है। 


सुबह विद्यालय आरम्भ होते ही बच्चे रैक में सारी पुस्तकें जमा देते हैं और छुट्टी के समय उनको पुनः निर्धारित कक्षाकक्ष में रख देते हैं। दिन भर में जब भी कोई खाली कालांश या मध्यावकाश होता है, बच्चे बरामदे में आकर पुस्तकें पढ़ सकते हैं। हालांकि विद्यालय में मुख्य लाइब्रेरी भी है। मगर इश्यू व जमा करवाने का झंझट नहीं होने के कारण बच्चों का रुझान इस नवाचार के रूप में स्थापित बरामदा पुस्तकालय की ओर निरंतर बढ़ता जा रहा है।

प्राध्यापक संदीप जोशी ने बताया कि यह बरामदा पुस्तकालय स्थापित करने का पहला उद्देश्य, बच्चों में पुस्तक पढ़ने का स्वभाव एवं रुचि पैदा करना तथा उनमें विश्वास का भाव पैदा करना है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य बच्चों को उत्कृष्ट मानव संसाधनों से अवगत कराना है।

यहां विभिन्न महापुरुषों, समाज सुधारकों, खिलाड़ियों, क्रांतिकारियों की जीवनियां एवं बालकों के रुचि की, दैनिक जीवन से जुड़े विषयों से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध है। बच्चों के मनोरंजन के लिए पुस्तकालय में भविष्य में प्रेरणास्पद कॉमिक्स जोड़ने की भी योजना है।

इसी क्रम में एक अन्य पहल का उल्लेख करना भी जरूरी है। जालोर गर्ल्स कॉलेज की गैलरी लाइब्रेरी उन शिक्षण संस्थाओं को सीख देने वाली है, जहां पुस्तकालय की किताबें तालों में बंद रहती हैं। दरअसल, गर्ल्स कॉलेज प्राचार्य ने पहल करते हुए कॉलेज परिसर में गैलरी लाइब्रेरी बनवाई है, जिससे एक सौ पचास से अधिक पुस्तकों वाला पुस्तकालय छात्राओं के मध्य आ गया है। यहां न कोई शुल्क है न ही पंजीयन का झंझट। छात्राओं की जब इच्छा हो, कोई भी पुस्तक किसी भी समय पढ़ सकती हैं और बिना रोक टोक पुस्तक को कक्षा और घर भी ले जा सकती हैं। पुस्तकों का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है, न ही इन्हें इश्यू करते हैं। छात्राएं किताब लेती हैं, पढ़ती हैं और वापस लाइब्रेरी में रख देती हैं। कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक पुस्तकें जन सहयोग एवं पुराने विद्यार्थियों के सहयोग से जुटाई जा रही हैं। एक सौ पचास पुस्तकों का संग्रहण परोपकारी लोगों के सहयोग से हो पाया है। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. एमएल जांगिड़ ने स्टाफ साथियों के सहयोग से लाइब्रेरी को तैयार करवाया है। इसे गैलरी लाइब्रेरी यानी बरामदा पुस्तकालय का नाम दिया गया।

प्राचार्य डॉ. एमएल जांगिड़ ने बताया कि उनको एक सेमिनार के दौरान मिला यह आइडिया। इसी के फलीभूत होने पर कॉलेज रोल मॉडल बन रहा जालोर महोत्सव की कॅरियर गाइडेंस सेमिनार के दौरान राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के सदस्य संदीप जोशी द्वारा दिए गए आइडिया पर काम करते हुए हमने यह इनोवेशन किया है। उन्होंने विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं नेक लगातार देश भर के महाविद्यालयों को शिक्षा में नवाचार के लिए प्रेरित कर रहा है। ऐसे में जालोर गर्ल्स कॉलेज का यह नवाचार राजस्थान ही नहीं पूरे देश भर के लिए रोल मॉडल के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। शिक्षक मो. इरफान ने बताया कि पुस्तकालय में विविध विषयों से जुड़ी पुस्तकों का संग्रह है। महापुरुषों की जीवनी, समाज सुधारकों, खिलाड़ियों, क्रांतिकारियों की जीवनियां, प्रतियोगी परीक्षा संबंधित एवं छात्राओं के रुचि की,  और दैनिक जीवन से जुड़े विषयों से संबंधित पुस्तकें यहां उपलब्ध हैं।

समाचार पत्र दैनिक भास्कर में प्रकाशित सूचना पर आधारित


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