भूमिका
"दोस्तो! देश के महत्वपूर्ण मानव संसाधनों के साथ हम अपने ब्लॉग के माध्यम से जनसामान्य का अंतर्संबंध निरंतर कराते रहते हैं। इसी क्रम में एक शिक्षक सितारे श्री हंसराज हंस जी के साथ आज हम भेंट करेंगे एक अन्य शिक्षक सितारे श्री दिनकर विजयवर्गीय जी से।"
प्रेरणादायी परिचय
साथियो! आज हम टोंक जनपद के पीपलू ब्लॉक के एक ऐसे व्यक्तित्व से आपका परिचय करवाने जा रहे हैं जो बहुआयामी प्रतिभा के धनी तो हैं ही, साथ ही जिन्होंने बहुत कम समय में ही एक सरकारी शिक्षक की नौकरी करते हुए सामाजिक सरोकारों को अपने जीवन में रचा बसा लिया है। उनका नाम दिनकर विजयवर्गीय है, जो टोंक जिले के पीपलू ब्लॉक के राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय जयकिशनपुरा में दस वर्षों से कार्यरत हैं। इनका जन्म एक साधारण विजयवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम श्री रामबाबू विजयवर्गीय (रिपोर्टर, राजस्थान पत्रिका) व माता का नाम श्रीमती माया देवी विजयवर्गीय (गृहणी) है। इनके भाई रवि विजयवर्गीय दीनन हितकारी पाक्षिक समाचार पत्र के संपादक है। इनकी पत्नी पूजा विजय एवं दो बच्चे दीपान्वी, नित्यांश हैं। इन्होंने बहुत कम समय में ही टोंक जिले में नवाचारी, उत्साही व रचनात्मक शिक्षक के रूप में अपनी पहचान कायम कर ली है। आपके शिक्षा व शिक्षण के प्रति समर्पित भाव को देखकर ही जिले के कई सरकारी शिक्षक आपसे मोटिवेट भी हुए हैं। राज्य सरकार ने भी आपको राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान देकर सम्मानित किया है, जो टोंक जनपद के लिए गौरव की बात है। आपने शिक्षा की बेहतरी के लिए अपने विद्यालय में भामाशाहों के सहयोग से तमाम जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई ही है, पर मुझे यह कहते हुए गौरव की अनुभूति हो रही है कि आपने टोंक जिले के लगभग एक सौ सरकारी विद्यालयों को भी अंत्योदय फाउंडेशन मुंबई के सहयोग से खिलौना किट, स्मार्ट टीवी, साउंड सिस्टम, इन्वर्टर, लाइब्रेरी बुक, बायोग्राफी, विद्युत घंटी, हीटर, बच्चों के लिए कपड़े, जूते, टाई बेल्ट, शिक्षण सामग्री किट आदि कई तरह का उपयोगी सामान उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाई है। आप सामाजिक सरोकार के कार्यों में भी पीछे नहीं हैं। वृद्धों के लिए गर्मी में छाता वितरण हो, बुढ़ापे का सहारा स्टिक हो, चप्पल जूते आदि सामान भी एनजीओ के माध्यम से समय-समय पर उपलब्ध करवाते रहते हैं। इसके साथ ही आप सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं, बालिकाओं, विधवा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील हैं। इसके लिए उनको नि:शुल्क सिलाई मशीन, सिलाई प्रशिक्षण की व्यवस्था भी अंत्योदय फाउंडेशन मुंबई के माध्यम से करते हैं। बच्चों की प्रतिभा के निखार हेतु भी आप अंत्योदय फाउंडेशन के माध्यम से समय-समय पर एनएमएमएस व नवोदय प्रतियोगी परीक्षाओं की भी नि:शुल्क कोचिंग क्लासेज वोलिटिंयर के माध्यम से संचालित करवाने की भी पहल कर रहे हैं। पूरे टोंक जिले में अंत्योदय जिला सेवक शिक्षक के रूप में आपकी पहचान है। आपने शिक्षा में भी कई सारे नवाचार किए हैं और लगातार कर रहे हैं। इन सबकी बदौलत ही आपको अभी राज्य स्तर पर शिक्षक सितारे के रूप में भी शिक्षा सचिव रहे श्रीमान नवीन जी जैन द्वारा सम्मानित किया गया है। आपका सरल व मिलनसार स्वभाव जिले के हर शिक्षक को अच्छा कार्य करने के लिए मोटिवेट करता हैं। मोटिवेशन के आप बेताज बादशाह हो इसका प्रमाण हाल ही में आपके विद्यालय को पूरे ग्रामवासियों द्वारा सरसों की तूडी बेचकर एक मुश्त 25 लाख रुपयों का दान देना है। यह पूरे टोंक जिले के लिए गौरव की बात है। आपकी मिलनसारिता का जिले का हर शिक्षक कायल है।
पूरे स्टाफ साथियों को आप सदैव साथ लेकर चलते हैं। आपके मोटिवेशन व विश्वास से ही आपके विद्यालय के शिक्षकों द्वारा ब्लॉक व जिला स्तर पर शिक्षक सम्मान लगातार प्राप्त किए जा रहे हैं। आपने अभी भी अपने मन में अपने विद्यालय के लिए कई सारे सपने संजो रखे हैं। उनमें प्रमुख राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय जयकिशनपुरा को पीएमश्री योजना में चयनित करवाना। विद्यालय में राज्य का पहला भव्य एजुकेशनल पार्क तैयार करवाना है। हम निरंतर आपके द्वारा किए जा रहे कार्यों की भूरि भूरि प्रशंसा करते हैं व ईश्वर से आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी करते हैं। आप निरंतर नई बुलंदियों को छूकर अपना व अपने जिले का यश चहूं ओर खूब फैलाएं। आप निश्चित रूप से एक दिन राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित हों, ऐसी हम सब अभिलाषा रखते हैं। अब आप से निवेदन है कि जिले के शिक्षकों को आत्मबल व मोटिवेशन मिले। इसके लिए आप हमारे कुछ प्रश्नों के जवाब देकर हमें अनुग्रहित करें।
बातचीत
प्रश्न 1. दिनकर सर, सरकारी विद्यालय के प्रति आमजन का विश्वास थोड़ा कम होता है पर आपके स्टाफ ने उनको कैसे मोटिवेट करके विद्यालय विकास के लिए 25 लाख रुपए प्राप्त कर लिए?
उत्तर - "विद्यालय के लिए दूरदर्शी सोच के साथ निरंतर छोटे छोटे बदलाव करते हुए कार्य किया जाता है। विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ग्रामीण अभिभावक को शेयर की जाती है। एक्स्ट्रा क्लास, एनएमएमएस, इंस्पायर अवार्ड में लगातार चयन, कक्षा 5 एवं 8 वीं बोर्ड का बेहतर परिणाम से ग्रामीण अभिभावक में विद्यालय को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हुई है। इन सब कार्यों से प्रभावित होकर ग्रामीणों ने भी विद्यालय के विकास में योगदान देना निरंतर शुरू किया है। तूड़ीदान भी विद्यालय के नए भवन निर्माण को लेकर किया गया है।"
प्रश्न 2. सर, आपने सरकारी सेवा में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काफी कार्य किया है तो हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधारों के नाम पर किए जा रहे बदलावों से आप कितने सहमत हैं?
उत्तर - "मैं शत-प्रतिशत सहमत हूं। शिक्षक विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों का शत-प्रतिशत पालना करें, तो यह उनके विद्यालय को बेहतर बनाएंगे।"
प्रश्न 3. सर, हम देखते हैं आप छोटे बच्चों के साथ संलग्न रहकर विद्यालय में विभिन्न गतिविधियां करवाते रहते हैं। ऐसी वह क्या बात है जो आपको यह सब करने के लिए प्रेरित करती रहती है।
उत्तर - "कर्तव्य। माता पिता से हमेशा यह ही प्रेरणा मिली है कि जो भी कार्य करें, उसे पूरी शिद्दत से किया जाएं।"
प्रश्न 4. सर, बच्चों को हिंदी भाषा के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा सिखाने हेतु अलग से आपके क्या प्रयास रहते हैं?
उत्तर - "रोजाना एक्स्ट्रा क्लास के माध्यम से उन्हें cvc वर्ड का अभ्यास करवाया जाता है। साथ ही रोज एक सरल पैराग्राफ बोर्ड पर लिखकर उसका बच्चों से उच्चारण करवाया जाने सहित उसकी समझ विकसित की जाती है। किसी एक नियम से बनने वाले वाक्यों का रोज अभ्यास करवाया जाता है। जिससे उनमें अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर हुई है।"
प्रश्न 5. सर, जिज्ञासु व्यक्ति हमेशा सीखता रहता है। आप विद्यार्थियों के साथ अधिकांश समय जुड़े रहते हैं। कभी आपका बच्चों से भी सीखना हुआ है क्या? कृपया हमें बताएं।
उत्तर - "बच्चों से रोज आपको कुछ नया सीखने को मिलता है। मुझे बच्चों से सीखने को मिला कि उन्हें जितना बोलने का अवसर देंगे, उतना ही वो जल्दी सीखेंगे।"
प्रश्न 6. सभी सरकारी/विभागीय योजनाओं में आपका विद्यालय बढ़- चढ़कर हिस्सा लेता है। इनकी व्यवस्था हेतु सरकार से कोई ज्यादा बजट नही मिलता है पर आप यह सब बड़ी आसानी से कर रहे हैं सर। कैसे? हमें बताइए।
उतर - "ग्रामीणों के सहयोग से यह सब संभव हो पा रहा है। ग्रामीण अभिभावक सहयोग करने के लिए तत्पर रहते हैं।"
सृजक
हंसराज हंस




दिनकर सर को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएं।
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