सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वृक्ष मित्र अवार्ड 2024🏆

माननीय राज्यपाल, राजस्थान सरकार श्रीमान कलराज मिश्र जी की गरिमामयी उपस्थिति में श्री कल्पतरू संस्थान की ओर से "वृक्ष मित्र सम्मान समारोह" 2024 🏆 का आयोजन किया गया !

संस्थान की ओर से यह सम्मान प्रतिवर्ष उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थान के स्वयंसेवकों, सहयोगियों और शुभचिंतकों को प्रदान किया जाता है। इस वर्ष वृक्ष मित्र पुरस्कार 2024 के लिए देश के 22 राज्यों और दुनिया के 13 देशों से अनेक आवेदन प्राप्त हुए । जिनमें से वर्ष 2023 में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाली वालंटियर के रूप में संस्थान की सक्रिय कार्यकर्ता उमा व्यास जी को "वालंटियर ऑफ द ईयर" प्रदान किया गया ! जिसमें स्मृति चिन्ह, प्रमाण पत्र एवं 5100 रुपए का चेक शामिल है।

साथ ही 9 अन्य पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संस्थाओं को वृक्ष मित्र सम्मान 2024 प्रदान किया गया ! जिसमें स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र शामिल है।

साथ ही अन्य 32 पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संस्थाओं को स्मृति चिन्ह देकर मनोबल बढ़ाया गया ।




इस अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय ने संस्थान की ओर से प्रस्तावित वैश्विक स्तर के कार्यक्रम "जयपुर एनवायरमेंट फेस्टिवल" (जयपुर पर्यावरण महाकुंभ) के पोस्टर का भी विमोचन किया । इस अवसर पर माननीय राज्यपाल महोदय को संस्थान की गतिविधियों सहित ग्रीन लंग्स अभियान, ग्रीन बचपन अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी प्रदान की गई ।

समारोह के दौरान संस्थान के माध्यम से अन्य शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों द्वारा किए गए इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए भी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए । इस अवसर पर पौधारोपण और परिंडे लगाने जैसे सेवा कार्य भी किए गए । कार्यक्रम का शुभारंभ और समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। 

समारोह में देश और दुनिया से अनेक गणमान्य लोगों ने पहुंचकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया ।

हम संस्थान की ओर से मान्य राज्यपाल महोदय राजस्थान सरकार श्रीमान कलराज मिश्रा जी का विशेष आभार व्यक्त करते हैं । जिन्होंने खुले मन से संस्थान के स्वयंसेवकों और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा कर आशीर्वचन प्रदान किए।

       कल्पतरु संस्थान के अध्यक्ष श्री मान विष्णु लाम्बा ( Tree Man) ने साहित्य मंच टोडारायसिंह के शिवराज कुर्मी (संयोजक) एवं आशीष विजयवर्गीय ( प्रचार प्रमुख) को गौरैया संरक्षण जागरुकता अभियान, गौरैया पोस्टर प्रतियोगिता आयोजन, परिडा़अभियान, घोंसला अभियान एवं पौधारोपण अभियान में सराहनीय कार्य करने पर प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया|

 सूचना स्रोत🙏🌳

शिवराज जी कुर्मी

साभार

Team Kalptaru 

teamkalptaru108@gmail.com

What's: Team +919828611108

www.shreekalptarusansthan.org

#TeamKalptaru #Jaipur #Rajasthan #VrikshaMitraSammanSamaroh #Kalptaruawards #GreenBachpan #JaipurEnvironmentFestival #GreenLungs #environment #TreePlantation #VrikshMitra President of India Kalraj Mishra Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India UN Environment Programme

प्रस्तोता



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...