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अपने क्षेत्र के साथ कई विधाओं को विकसित कर लेने वाले नायक जी से मुलाकात

 💥परिचय💥

साथियो! हमारे साथ आज राजस्थानी भाषा में शानदार सृजन करने वाले व एक जबरदस्त चित्रकार श्री बाबूलाल जी नायक हैं। आप वर्तमान में इतिहास विषय के व्याख्याता पद पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खरेड़ा ब्लॉक टोडारायसिंह में पदस्थापित हैं। आपने अपनी सरकारी सेवा की शुरुआत एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में आज से पैंतीस वर्ष पहले की थी। आपने इस सेवाकाल में कई अविस्मरणीय कार्य शिक्षा विभाग के लिए किए हैं। आप राज्य के बाहर शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर राजस्थान राज्य के शिक्षकों के साथ लगातार बीस वर्षों से संदर्भ व्यक्ति के रूप में राजस्थान व अन्य प्रदेशों में बेहतरीन कार्य कर रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा समय समय पर सभी प्रकार के चुनाव (नगर परिषद, नगर पालिका, सरपंच, सी.आर.डी.आर. विधानसभा व लोकसभा) के सभी महत्वपूर्ण चुनावों में E.V.M. के मास्टर ट्रेनर के रूप में लगातार उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं।

आप सदैव पढ़ते लिखते रहते हैं। आपकी सृजन क्षमता व चित्रकारी देखते ही बनती है।

आप राजस्थानी‌ भाषा में भी कई कविताओं, दोहों व छंदों की निरंतर रचना कर रहे हैं। इन सारे कार्यों की बदौलत आप कई बार जिला स्तर पर सम्मानित भी हुए हैं। आपके कई शिष्य वर्तमान में कई अच्छे-अच्छे पदों पर ईमानदारी के साथ कार्य कर, आपके यश को चहुं ओर फैला रहे हैं।आप आपके 'नायक' नाम को वास्तव में फलीभूत कर रहे हैं। इसमें कतई अतिशयोक्ति नहीं है। वास्तव में आप से नव‌नियुक्त शिक्षकों को बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। आप शिक्षकों के नायक हैं। आप हमेशा सबको साथ लेकर टीम वर्क से कार्य करने में विश्वास रखते हैं और कई वर्षों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। आपके प्रयासों से स्कूली बच्चों में अद्भुत क्षमताओं का विकास हुआ है। आपका सरल व सौम्य स्वभाव बरबस ही सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। आप धर्मपरायण व सामूहिक नेतृत्व क्षमता में विश्वास रखने वाले सरल व सहज व्यक्तित्व के धनी हैं।आप सदैव दूसरों की सेवा व सहयोग करने के लिए तत्पर रहते हैं। आपका नाम आपके क्षेत्र में नवोदित लेखक व श्रेष्ठ कवियों में शुमार होता है। आपने हर विषय पर कई सारी रचनाएं लिखी हैं। आपके इन सब भागीरथी प्रयासों के कारण ही शिक्षा के क्षेत्र में भी आप एक नवाचारी व एनर्जेटिक शिक्षक के रूप में पहचान बनाए हुए हैं।

आइए, आज हम आपको मिलवाते हैं राजस्थान के टोंक जनपद के टोंक ब्लॉक से श्री बाबूलाल जी नायक साहब से।

💥बातचीत💥

प्रश्न १. सर, आपको लिखने का शौक कब और कैसे लगा? थोड़ा हमें भी बताइए।

उत्तर - "मुझे लिखने का शौक सर्विस में आने से पहले से ही रहा है।(१९८७ -८८ B.ed अध्ययनरत) निजी विद्यालय में अध्यापन व साहित्य सृजन में छोटी-छोटी बाल कविताएं, कहानी, दोहा, छंद,  मातृभाषा, राजस्थानी भाषा में लिखने का शुरू से शौक रहा है, लेकिन अधिक मात्रा में COVID-19 काल से लिखने का एक जज्बा बना हुआ है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन टोंक द्वारा स्थापित स्वैच्छिक शिक्षक मंच के साथ मिलकर कई प्रकार के अनुभव प्राप्त किये और अनुभवों को साझा करते हुए लिखने का एक प्रयास किया, जिसमें सभी शिक्षक साथियों से मिलकर और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से कुछ लिखने की प्रेरणा मिली और मैं लिखता गया लिखता गया।वर्तमान परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान में ज्वलंत मुद्दों पर और व्यावहारिक ज्ञान को मद्देनजर रखते हुए मन में व्यावहारिक मुद्दों पर परिवेश में दिखने वाले परिदृश्यों पर लिखने का एक सफल प्रयास किया जा रहा है।" मेरा अनुभव है कि 

✍️पोथी पढ़ सचेत हुआ, लगा लेख का शौक। 💥

✍️सतत चली सत लेखनी, कोई न पाय रोक।।💥

प्रश्न २. सर, आपने शासकीय सेवा में शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काफी कार्य किया है, तो हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधारों के नाम पर किए जा रहे बदलावों से आप कितने सहमत हैं?

उत्तर - "शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के नाम पर किए जा रहे बदलाव से मैं पूर्णतया सहमत हूॅं। मैंने लगातार एस.आई.ई.आर.टी. उदयपुर की कई रिसर्च प्रशिक्षण कार्यशालाओं में भाग लिया और वहां पर शिक्षक संदर्शिकाएं बच्चों की छोटी-छोटी बाल कविताएं, चित्र मॉड्यूल ,कार्टून निर्माण में मैंने खूब भाग लिया है। उससे प्रेरित होकर यह स्पष्ट हुआ है कि शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए नए-नए प्रयोग अति आवश्यक हैं, क्योंकि परिवेश के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सामाजिक बदलाव, समय-समय पर शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव, नए-नए नवाचार जो सभी बच्चों तक पहुंच सकें जो बालक बालिकाएं शिक्षा से वंचित हैं उन बालकों तक भी शिक्षा की गुणवत्ता नवीन परिवेश की सजगता और जो नए बदलाव किए जा रहे हैं उसके अंतर्गत बालकों को लाभ मिल सके और नए परिवेश शिक्षा में बदलाव की जानकारियां खेल-खेल में शिक्षा, आनंददायी शिक्षा, चाइल्ड सेंटर्ड पेडगॉजी के साथ रोचक गतिविधियों के द्वारा शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है।" इस संदर्भ में मेरा आकलन है - 

✍️शिक्षा में बदलाव को, सहर्ष किया स्वीकार।💥

✍️खेल-खेल में सीखते, शिक्षा का अधिकार।।💥

प्रश्न ३. सर, अब आप पदोन्नत होकर प्रथम श्रेणी के शिक्षक तो बन गए हैं, पर हम देखते हैं अब भी आप छोटे बच्चों के साथ विद्यालय में विभिन्न गतिविधियां करवाते दिखते हैं। ऐसी वह क्या बात है जो आपको यह सब करने के लिए प्रेरित करती रहती है?

उत्तर - "मैं पदोन्नति पाकर प्रथम श्रेणी का शिक्षक तो बन गया, लेकिन आज भी मेरे अंदर बचपन विद्यमान है, क्योंकि मेरी प्रथम नियुक्ति प्राथमिक विद्यालय में हुई, जो बचपन मेरे साथ खेल और कई प्रकार की रोचक गतिविधियों के साथ मेरे साथ हिलमिलकर के उन्होंने हॅंसी मजाक के साथ शिक्षा ग्रहण की। आज भी मैं बालकों में मेरा बचपन खोजता हूॅं और बच्चों के साथ हिलमिलकर के उनकी गतिविधियों में रोचकता लाने के लिए उनको आनंद की अनुभूति कराने के लिए मैं उनके साथ घुल-मिल जाता हूॅं और मुझे छोटे बालकों में छोटी-छोटी गतिविधियाॅं में आनन्द आए। बालकों के साथ गतिविधियाॅं करने में बड़ा आनन्द आता है और मैं बच्चों से लगातार जुड़ा रहता हूॅं। जब भी मुझे समय मिलता है विद्यालय में उन बच्चों के साथ बातचीत करना व उनके साथ खेलना नए-नए प्रयोग करना, नवाचार करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। बच्चे नवाचारी होते हैं।"

✍️बच्चों के संग खेलते, नित करे नवाचार।💥

✍️अक्षर-अक्षर जोड़ के, शब्द बनाते सार।।💥

प्रश्न ४. सर, हिंदी भाषा के अतिरिक्त आपका अन्य प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?

उत्तर - "हिंदी भाषा के साथ-साथ मेरे प्रिय विषय संस्कृत साहित्य, इतिहास और चित्रकला रहे हैं। चित्र बनाना मुझे बचपन से ही अच्छी तरह से पसंद है। शब्द चित्रण को रेखाचित्रण में बदलना मुझे अधिक पसंद है। इतिहास में घटित घटनाओं को पढ़कर उनकी तथ्यात्मकता को जानने का प्रयास करता हूॅं। बचपन से ही इन विषयों से जुड़ा हुआ हूॅं और मैं इन तीनों विषयों में (हिंदी, संस्कृत व इतिहास) स्नातकोत्तर किया है। चित्रकला का हायर सेकंडरी तक अध्ययन किया है। अभिनय, नाटक, रोल प्ले ,पशु-पक्षियों की विभिन्न प्रकार की आवाजें निकालना, चित्रकला, मूर्तिकला, काष्ठकला, मुखौटे बनाना, लुगदी से आकृतियाॅं बनाना, कबाड़ से जुगाड़ कर अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी कृतियाॅं बनाना बचपन से ही मेरी कुशलता रही है। साहित्य का अध्ययन मेरी अभिरुचि रही है और मैं लगातार जो भी मुझे अच्छा साहित्य मिलता है उनका अध्ययन करता रहता हूॅं। उनसे जो प्रेरणा मिलती है उसको अपने जीवन में तथा बच्चों के साथ उतारने का प्रयास करता हूॅं। बच्चों के साथ 'गुरुमित्र' बनकर शिक्षण कार्य करवाने में मुझे बड़ा आनन्द आता है।"

✍️अनुपयोगी कबाड़ को, करे शिक्षण उपयोग।💥

✍️पशु पक्षियों की बोलियां, बोले नित प्रयोग।।💥

प्रश्न ५. सर, जिज्ञासु व्यक्ति हमेशा सीखता रहता है। आप विद्यार्थियों के साथ अधिकांश समय जुड़े रहते हैं। कभी आपका बच्चों से भी सीखना हुआ है क्या? कृपया हमें बताएं।

उत्तर - "मेरी बचपन से ही नवीनता को जानने की जिज्ञासा रही है। मैं जिज्ञासु प्रवृत्ति का व्यक्ति हूॅं। बच्चों के साथ जो व्यक्ति घुल-मिल जाता है, वह बच्चों से बहुत अधिक सीखता है क्योंकि बच्चे विभिन्न परिवेश के विभिन्न समुदायों से और विभिन्न प्रकार के अनुभवों को लेकर हमारे पास आते हैं। वह परिवेश की सृजकता और वहाॅं के वातावरण के बारे में जब अपने परिवेश की बातचीत करता है तो विभिन्न प्रकार की बातचीत करने पर उस समय बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बच्चा अपने परिवेश की शब्दावली का प्रयोग करता है और अपनी मातृभाषा का उपयोग करता है तो उस समय विभिन्न प्रकार के ऐसे शब्द जो हमने पहली बार सुने हैं उनको जानकर उनके सार्थक अर्थ को समझकर एक नई भाषिक शब्दावली तैयार हो जाती है जो बहुत ही आनंद की अनुभूति कराता है। बालकों से क्षेत्रीय भाषा में बातचीत करके अधिक से अधिक सीखने का प्रयास किया जा सकता है तो बच्चों के साथ मिलकर काम करना हमारे अनुभवों को बढ़ाता है। बच्चा बनकर उनके साथ हिल-मिल जाना बहुत ही श्रेष्ठ अनुभवों को प्राप्त कराता है।"

✍️जिज्ञासा  मन  में  बड़ी, करना हटकर काम। 💥

✍️लगे नवीनता ज्ञान की, होय शिक्षण में नाम।।💥

प्रश्न ६. आजकल आप राजस्थानी भाषा में ज्यादा ही लिख रहे हैं। इसके पीछे कुछ खास उद्देश्य हो तो हमें भी बताइए जी।

उत्तर - "हम राजस्थान के वासी इस परिवेश से पूरी तरह परिचित हैं। ऐसी स्थिति में राजस्थानी भाषा में लिखना परिवेश की जानकारियां हमारे राजस्थानवासियों को क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने के लिए, राजस्थानी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए उसके महत्व को समझने के लिए और जन-जन तक क्षेत्रीय भाषा में राजस्थानी भाषा में अपने विचार लोगों तक पहुंच सकें, क्योंकि क्षेत्रीय भाषा को अधिक बोलने वाले लोग जो कि इनको आसानी से समझते हैं। बच्चों के साथ मातृभाषा राजस्थानी भाषा में बातचीत करके अप्रत्याव को बढ़ावा मिलता है और बालकों में सीखने की प्रवृत्ति जागती है और वह शिक्षक के साथ अपराध की भावनाओं को लेकर जुड़ता है और उसे ऐसा लगता है की वजह से मानव परिवार में ही अपने सदस्यों से बातचीत कर रहा है। हम अपने राजस्थान की भाषा पर गर्व करते हैं। राजस्थानी भाषा में लिखी व बोली गई कविताएं व कहानी बच्चों को बहुत ही आनंदित करती हैं तो मुझे भी बड़ा आनंद आता है। बच्चों के साथ राजस्थानी भाषा में गीत, कविताएं, कहानी सुनाकर बच्चों से कहानी सुनकर बहुत ही अच्छा लगता है। मुझे भी राजस्थानी भाषा में लिखकर  गर्व का अनुभव होता है। मुझे राजस्थानी भाषा पर गर्व है।"

इस भाषा के संदर्भ में मेरा मानना है कि - 

✍️भाषा  राजस्थान  की, उपजै  बहुत मिठास।💥

✍️गाथा गीत सुने सभी, 'नायक' मन विश्वास।।💥

सृजक

श्री हंसराज 'हंस'

प्रस्तोता 

शब्दशिल्प 

टिप्पणियाँ

  1. बाबुलालजी सर को बहुत बहुत शुभकामनाएं व ढेर सारी बधाइयां।

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