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तलाश ढाई आखर की

विवरण

पुस्तक का नाम-तलाश ढाई आखर की।

पुस्तक संपादक-श्रीमती बसन्ती पंवार, जोधपुर।

पुस्तक समर्पण-कंचनलता, राजेश एवं अमित।

भूमिका-वरिष्ठ साहित्यकार डा. मनोहर सिंह राठौड़, जोधपुर।

मन के आखर-वरिष्ठ साहित्यकार राजस्थानी भाषा- श्रीमती बसन्ती पंवार, जोधपुर।

फ्लैप कवर पर-डा. उषा माहेश्वरी, जोधपुर।

कहानी समीक्षक-शिवराज कुर्मी, संयोजक, साहित्य मंच टोडारायसिंह जिला-केकड़ी।

कुल कहानियाँ-22.

पृष्ठ आवरण-सूरज की लालिमा से मनोरम दृश्य, पेड़ एवं चिंताग्रस्त एक नारी का चित्र।

पुस्तक प्रकाशन-साहित्यागार,चौड़ा रास्ता, जयपुर।

कहानी समीक्षा

कहानी क्रमांक 10

कहानी का नाम-दादी।

कहानीकार-श्रीमती बसन्ती पंवार, जोधपुर।

कहानी की विशेषता-वर्तमान परिवेश पर आधारित सटीक कहानी।

कहानी के मुख्य पात्र दादी, नमिता, उसकी सहेली राखी, माता आदि।

घटनाक्रम              

दादी नमिता से पूछती है कि अभी कौन आई है| नमिता ने कहा मेरी सहेली राखी| ये कहाँ जा रहीं हैं| नमिता ने उत्तर दिया स्कूल जा रहे हैं| यहाँ दादी सवाल करती है कि राखी की ड्रेस बहुत छोटी है इतनी सजधज कर स्कूल जाना ठीक नहीं है|

इनके जाने के बाद दादी सोचने लगी कि इन लडकियों को क्या हो गया? स्कूल में पढ़ने जाती है या अपनी नुमाइश करने| सम्भालना मुश्किल हो रहा है इन लडकियों को|

दादी ज्यादा तनाव में आ जाती है|सोचती है कि नमिता बड़ी हो रही है वो उसे कैसे समझायेगी? अब तो बायफ्रेंड का भी फैशन बन गया है|ये हाथ में हाथ ऐसे घूमते हैं जैसे पति-पत्नी हो| हमारे जमाने में ऐसा नहीं होता था| माना कि समय बदल गया|मगर हर बात की एक सीमा होती है|ये सब टी, वी, सिनेमा एवं मोबाईल की देन है| बच्चे मोबाईल पर देर तक न जाने क्या- क्या देखते हैं| उनकी हमेशा चौकसी नहीं की जा सकती है| यहाँ तक मोबाईल ने तो झूठ बोलना सीखा दिया| ईश्वर इन सभी को सद्बुद्धि दे|

दादी साल भर के लिए अपने छोटे पुत्र के यहाँ चली गई| साल भर बाद वापिस आई तो नमिता को देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई| उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि नमिता इतनी बदल जायेगी| 

नमिता कालेज से आते ही दादी जी को प्रणाम करती है| दादी कहती है कि तुम्हारे कपडों को क्या हुआ? घोंसले नुमा बाल, होठ पर लिपिस्टिक, हाथ में मोबाईल| ये सब क्या हो रहा है? अरे दादी, मैं कालेज में पढ़ने जाती हूँ वहाँ सभी लडकियों ऐसे ही रहती है|

दादी नमिता की मम्मी को आवाज देकर बुलाकर कहती है ये सब क्या चल रहा है❓मेरे पीछे से,,,,,, ये नाम मात्र के कपड़े,,,, कुछ लाज - शरम है कि नहीं|क्या सारे संस्कार खूंटी पर टांग दिए है तुम लोगों ने,,,,,? दादी का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया| किसने ये कपड़े लाकर दिए और इनको पहनकर कालेज जाने की इजाजत किसने दी| 

अरे कोई बोलता क्यों नहीं? क्या सबको सांप सूंघ गया है❓ दादी का बेटा राकेश बोला, आप फालतू में परेशान न हो| बेटा तू जानता नहीं कि जमाना कितना बदल गया| लडकियों की सुरक्षा को लेकर कितने ढोल पीटे जा रहे हैं| अखबार में तुम अवश्य पढते हो आए दिन होने वाली घटनाएं|

पर कुछ लडकियों की वजह से ऐसा होता है| नमिता कहती है दादी बहुत हो गया| अब आप जैसा कहोगी वैसा ही होगा|क्योंकि भगवान् ने मुझे लड़की बना कर मेरे साथ अन्याय जो किया|भैया को देखों, उसे तो कोई कुछ नहीं कहता| वो चाहे जो पहने, जब चाहे तब आए|

दादी कहती है नहीं बेटा, ऐसी बात नहीं है| लड़कों में भी अच्छे संस्कार होगे तभी लडकियों सुरक्षित रह पाएगी| घटिया सोच बदलनी होगी| युवाओं को समझाना होगा| योग, प्राणायाम, ध्यान से स्वयं को जोड़ना होगा| अच्छा साहित्य पढ़ने को प्रेरित करना होगा| अच्छाई बुराई के अन्तर को बताना होगा| माता- पिता एवं बडो़ को सम्मान देना होगा|

दादी चैन से सो नहीं पाई। दूसरे दिन अखबार में समाचार पढ़ कर चौंक गयी| अरे! ये तो नमिता की सहेली राखी है| उसके साथ ये क्या हुआ| हे भगवान्,,,,, ,,,, | नमिता भी समाचार पढ़कर हक्की- बक्की रह गयी| उसने कहा दादी आप गलत नहीं हो| राखी के परिवार वालों की लापरवाही से ऐसा हुआ है| अति खुलापन से राखी का जीवन बर्बाद हो गया| माना कि पहनावे से कुछ नहीं होता मगर लोगों की नजरों को तो हम नहीं बदल सकते| सच में हमें कोई भी काम करने से पहले उसके अच्छे और बुरे परिणाम के विषय में गहराई से विचार कर लेना चाहिए|

प्रत्येक माँ- बाप, घर के बड़े- बुजुर्ग अपनी लड़की की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं| उनका अपना अनुभव................।

नमिता यूँ विचारों में गुम हो जाती है| क्या हुआ बेटा? दादी, जिसने राखी के साथ ऐसा किया, उसकी स्वयं की भी तो ऐसे ही रहती है| इन लड़कों में ऐसी दोगली मानसिकता क्यों है? 

अन्त में दादी कहती है बेटा, हर घर में संस्कारों के बीज बोने की आवश्यकता है|संस्कार ही वह जादुई चिराग है जिसके उजाले में मानसिकता को बदला जा सकता है| युवाओं को बर्बादी के गर्त में गिरने से बचाना होगा| लड़कियों को अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होना होगा|

इतना होने पर नमिता दादी से कहती है कि अब ऐसे कपड़े नहीं पहनूंगी| अपने से बडो़ का मान सम्मान करुंगी|

शिक्षा

वर्तमान समय को ध्यान में रखते हुए स्वयं को जागरूक रहना होगा।

प्रस्तोता



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