परिचय
साथियो! आज हमारे साथ हैं एक नवोदित कवि और लेखक श्री संदीप कुमार जैन जी टोंक, राजस्थान से जो सरकारी प्राथमिक विद्यालय के नवाचारी शिक्षक हैं । अपने शिक्षण कौशल का विगत दस वर्षों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
विगत वर्षों में आपके द्वारा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी नवाचार किए गए हैं। परिणामस्वरूप आपको ब्लॉक स्तरीय शिक्षक अवार्ड 2021 राज्य सरकार द्वारा नवाजा गया है । इससे पूर्व संकुल स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार 2011 भी प्राप्त कर चुके है । हाल ही में कलम के जादूगर साहित्य मंच द्वारा "पोयट ऑफ द मंथ माह मार्च 2024" साहित्य सम्मान से सुशोभित हुए है । साहित्य संवर्धन के क्षेत्र में ओर भी कई छोटे बड़े सम्मान आप प्राप्त कर चुके है ।
आप निरंतर सामाजिक सरोकार के कार्यों में संलग्न रहते हैं। आपके प्रयासों से स्कूली बच्चों में अद्भुत क्षमताओं का विकास हुआ है। आपका सरल व सौम्य स्वभाव बरबस ही सबको आपकी ओर आकर्षित कर लेता है। आप धर्मपरायण व सामूहिक नेतृत्व क्षमता में विश्वास रखने वाले सरल व सहज व्यक्तित्व के धनी हैं।आप सदैव दूसरों की सेवा व सहयोग करने के लिए तत्पर रहते हैं। आपका नाम आपके क्षेत्र में "नवोदित" लेखक व श्रेष्ठ कवियों में शुमार होता है। आपने हर विषय पर कई सारी रचनाएं लिखी हैं। जल्दी ही आपकी एक पुस्तक भी प्रकाशित होने वाली है। आपके इन सब भागीरथी प्रयासों के कारण ही शिक्षा के क्षेत्र में भी आप एक नवाचारी व एनर्जेटिक शिक्षक के रूप में पहचान बनाए हुए हैं।
आइए, आज हम आपको मिलवाते हैं राजस्थान के टोंक जनपद के उनियारा ब्लॉक से श्री संदीप कुमार जैन जी से ।
बातचीत
प्रश्न १. सर, आपने लगातार विभिन्न तरह के सामाजिक, राजनैतिक, पारिवारिक रिश्तों को लेकर कविताएं लिखी हैं और लगातार लिख रहे हैं। आखिरकार आपको यह सब करने की ऊर्जा व प्रेरणा कहां से मिलती है ?
उत्तर - मुझे बचपन से बाल साहित्य पुस्तकें पढ़ने की आदत व शौक रहा है। इसके अतिरिक्त मैं डायरी लेखन भी किया करता था। बस वहीं से कविता, गीत, शायरी, मुक्तक लिखने की आदत बनती चली गई और अब निरन्तर लेखन के लिए अभिप्रेरित हूं। सामाजिक बुराइयों व समसामयिक घटनाक्रमों पर लिखना पसंद करता हूँ। ये सब प्रयास इसलिए जिससे समाज को सही दिशा मिल सके। यही मेरे लिखने का उद्देश्य है।
प्रश्न २. सर, आप एक शासकीय शिक्षक हैं तो हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधारों के नाम पर किए जा रहे बदलावों से आप कितने सहमत हैं?
उत्तर - बदलते समय के अनुरूप बदलाव होना जरूरी भी है। शिक्षा के क्षेत्र में नित नये बदलाव आज की शिक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी हैं। गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे बदलाव को लागू करने से पहले उस तरह के पूरे संसाधनों की व्यस्थायें विद्यालयो में स्थापित की जानी बेहद जरूरी हैं, अन्यथा बदलाव तो कर दिए जाते हैं मगर व्यवस्थायें करने में निरर्थक तरीके से कई वर्ष निकल जाते हैं। बदलाव वास्तविक व आवश्यकता के अनुरूप पूरी तैयारी के साथ होने चाहिए न कि राजनीति से अभिप्रेरित।
प्रश्न ३. सर, आप बच्चों को विद्यालय में विभिन्न क्षमताओं के विकास हेतु कई सारी गतिविधियां करवाते रहते हैं। क्या आपको ऐसा लगता है कि अभी भी कुछ कराने से रह गया है तथा आगे और क्या-क्या करवाने की योजना है ?
उत्तर - बालको के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षिक व सहशैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाना अत्यंत जरूरी है। प्रत्यक्ष अवलोकन के लिए गतिविधियों के माध्यम से बच्चे स्वयं करके सीखते हैं। यह स्थायी भी होता है। बच्चों की क्षमता व क्षमता के अनुरूप गतिविधियों का चुनाव करना पहली शर्त है। बच्चों की रुचि अभिरुचि को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। अधिकतर बच्चे आज भी सार्थक संवाद यदि नहीं कर पाते, तो इसके लिए अभिप्रेरणा विकसित करने की नितांत आवश्यक्ता है।
प्रश्न ४. सर, हिंदी भाषा के अतिरिक्त आपका अन्य प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?
उत्तर - हिंदी के अतिरिक्त मेरा प्रिय विषय विज्ञान रहा है ।
मनुष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का होना भी जरूरी है। हमें क्यों? और कैसे? समझने के लिए व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ उसके पीछे के वैज्ञानिक आधार को समझना भी बहुत जरूरी है।
प्रश्न ५. सर, जिज्ञासु व्यक्ति हमेशा सीखता रहता है। आप विद्यार्थियों के साथ अधिकांश समय जुड़े रहते हैं। कभी आपका बच्चों से भी सीखना हुआ है क्या? कृपया हमें बताएं।
उत्तर - सीखना जीवन पर्यंत चलते रहने वाली प्रक्रिया है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। अधिकतर बच्चे सत्यवादी व छलकपटरहित होते हैं। वे हर बात को सच सच बयान करते हैं।
मैं बच्चों से सत्य बोलना , निश्छल स्वभावी बनना सीखता हूँ।
सृजक
श्री हंसराज 'हंस'
प्रस्तुति एवं कल्पना



संदीप जी के साथ बातचीत करके बहुत अच्छा लगा।आप निरंतर नई बुलंदियों को छुए। आपकों हमारी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं व बधाइयां।
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