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भारत में अभियांत्रिकीय सफलता की गाथा अपडेटेड (१७.०५.२०२४))

 परिचय

हमारे देश की अभियांत्रिकीय गतिविधियां उल्लेखनीय रही हैं और उन गतिविधियों से आम जनमानस को रूबरू कराने के लिए हमारे आग्रह को स्वीकार किया एक शानदार करियर को व्यतीत करने वाले अभियंता ने।

क्रमवार तिथिवार












ईसा पूर्व छठी शताब्दी में ग्रीक से आरंभ हुई पाइथागोरस गणना पद्धति और गणन सिद्धांत अभियांत्रिकी का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं जिनमें दशमलव का ज्ञान भारत की देन है, जिसके कारण आज हम सुपर कंप्यूटर के युग तक पहुंच गए हैं। यह बात अलग है कि हम अभियांत्रिकी में अध्ययनरत (1968 में) थे, तब तक कैलकुलेटर भी उपयोग में नही था। तब केवल लॉग टेबल्स ही का प्रयोग होता था। 
(१४.०५.२०२४)

ब्रह्मांड में पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण और गति अत्यंत महत्व के विषय हैं। गैलीलियो और न्यूटन ने सत्रहवीं और अठारहवीं सदी में इन संबंधी अपने मत को विषम परिस्थितियों में रखा, जिसको लेकर आज तक भी बुद्धिमान माने जाने वाले धर्म ने स्वीकार नहीं किया है, परंतु वर्तमान अभियांत्रिकी और विज्ञान की नींव इन ही की खोज पर टिकी है। (१५.०५.२०२४)
(१६.०५.२०२४)
(१७.०५.२०२४)

मिट्टी को सांचे में ढालकर आग में पकाकर हवा और आग को नियंत्रित करके हजारों वर्ष पहले उनका निर्माण आरंभ हुआ था, जो अभियांत्रिकी का एक उम्दा उदाहरण है। इनके उपयोग से भवन और सेतु तथा कुओं आदि के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। ईंटों के सुविधाजनक आकर पर भी काम हुआ, जो पहले बहुत बड़ा, फिर बहुत छोटा (लखौरी) और अब दोनों के बीच का बन रहा है। आजकल ईंटें फ्लाई ऐश/सीमेंट और रेत से फैक्ट्री में भी बन रही हैं और मजबूत हैं। मेरे मकान में एक भी मृदा निर्मित लाल ईंट का प्रयोग नहीं हुआ।

विश्व भर की सभी सभ्यतायें नदियों की तलहटियों में विकसित हुईं और अधिकांश पांच से सात हजार वर्ष पहले की हैं। जल को मानव ने केवल पीने के लिए ही प्रयोग नहीं किया, अपितु सुरक्षा के लिए भी प्रयोग किया। किलों के परकोटों में जल को सुरक्षा के लिए भरा गया। किले के अंदर भी जल संरक्षण प्रथम आवश्यकता थी। नदियां साम्राज्यों की सीमा भी निर्धारित करती थीं। युद्ध में भी सेनाओं के लिए नदियां अहम् भूमिका में रहीं। जल का प्रबंधन सबसे प्राचीन अभियांत्रिकी है।

भारतीय भूभाग में जल की अभियांत्रिकी का सबसे प्राचीन साक्ष्य मोहनजोदड़ो है, जिसमें नदी पर पत्थर व लकड़ी से बांध बनाकर नहर निर्माण कर जल को किले तक पहुंचाया गया था। इस तथ्य से सब ही अवगत हैं कि नगर में नाली विद्यमान थी तो जल को व्यवस्थित तरीके से वितरित करने के दृष्टिकोण से।
सृष्टि के तीन मूल तत्त्वों; अग्नि जल और वायु; के प्रयोग से जनित ऊर्जा/ शक्ति का उपयोग भार परिवहन में करना एक अभियांत्रिक क्रांति सदृश है। जेम्स वाट की खोज को अठारहवीं सदी के आरंभ मे थॉमस न्यूकोमेन ने स्टीम इंजन में परिवर्तित कर मानव जीवन को सरल करने में अनूठा योगदान दिया, जो एक स्मरणीय अभियांत्रिक तथ्य है। (22.05.2024)

चुम्बक के सिरे उत्तरी ध्रुव और दक्षिण ध्रुव की तरह कार्य करते हैं और इनमें एक सिरे तक अदृश्य शक्ति का प्रवाह होता है व समीप की धातु विशेष रूप से लोहे में भी ऐसा ही प्रवाह उत्पन्न करता है। यह एक अनूठी अभियांत्रिकीय खोज थी जो आज और आने वाली सदियो के लिए वरदान सदृश है। (23.05.2024)

भारी चुम्बकों को तीव्र गति (एक सेकंड मे पचास चक्कर) पर घुमा कर स्थिर चुम्बकों में तरंग (Current) उत्पन्न करना आज के युग की श्रेष्ठतम अभियांत्रिकी है।
टर्बाइंस को घुमाने के लिए कोयला जलाकर, परमाणु विस्फोट कर तथा नदियो पर बांध बना पानी की ऊंचाई बढ़ाकर और तल से पानी निकाल जनित शक्ति का प्रयोग विकसित अभियांत्रिकी का उदाहरण है। (24.05.2024)

इस मान्यता के बाद कि 'सूर्य स्थिर है और पृथ्वी चलायमान', पृथ्वी की दोनों गतियां निर्धारित की गईं। एक प्रतिदिन अपनी धुरी पर एक चक्कर और दूसरा सूर्य का 365.25 दिन में एक चक्कर। अध्ययन के उपरांत यह भी पाया गया कि भारतीय भूभाग जिसमें आज के अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका भी अपने मूल स्थान से हजारों किमी की यात्रा कर चुके हैं और अभी तक भी चलायमान है। (25.05.2024)
सूचना स्रोत
इंजीनियर शेषराज सिंह
प्रस्तुति














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