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माँ की पाती बेटी के नाम

भूमिका


पुस्तक विवरण

पुस्तक का नाम- माँ की पाती, बेटी के नाम।

पुस्तक संपादक-डॉ. सूरज सिंह नेगी एवं डॉ. मीना सिरोला

प्रेरणादायी संदेश-रुक्मणि रियार, जिला कलेक्टर, बून्दी।

सकारात्मक पहल-स्व. श्री देवदत्त शर्मा, अजमेर।

संदेश-डॉ. पूनम पांडे, अजमेर।

मेरी कलम से-डॉ. सूरज सिंह नेगी, संयोजक, पाती मुहिम।

संपादक की कलम से-डॉ. मीना सिरोला (सहसंयोजक, पाती मुहिम)।

फ्लैप कवर पर संदेश- स्व. अमीर अहमद 'सुमन', वरिष्ठ साहित्यकार, टोंक।

पत्र समीक्षक- शिवराज कुर्मी, संयोजक, साहित्य मंच-टोडारायसिंह।

कुल पत्र-103.

भाषा शैली- सुन्दर व स्पष्ट।

पुस्तक मुद्रण में सहयोग- कार्यालय सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग, बून्दी (भैरुप्रकाश नागर, सहायक निदेशक) 

पृष्ठ आवरण-सतरंगी कागज पर माँ-बेटी का खूबसूरत चित्र।

पत्र समीक्षा        

पत्र क्रमांक 75

पत्र लेखिका- नवाचारी शिक्षिका श्री मती शोभा कंवर- तालेडा़, जिला- बून्दी (राजस्थान) 

नवाचारी शिक्षिका ने पत्र विद्यालय की बिटिया अंजली को लिखा है। अब कोई भी गम तुम्हें छू भी ना पाये। संवेदनशील शिक्षिका ने बताया कि अंजली के माता-पिता इस दुनिया से विदा हो चुके थे। शोभा कंवर के कोई संतान नहीं थी। अंजली के नाना जी तुम्हें स्कूल लेकर आये थे। उन्होंने अंजली के बारे में सब कुछ बता दिया था। अंजली अब से मेरी बेटी है उसकी जिम्मेदारी मेरी है। संवेदनशील शिक्षिका ने उस बिटिया को गोद ले लिया।

तुम्हारे नाना जी ने मुझे वो खुशी दी है जिससे अब मैं सबको यह बता सकती हूँ कि मेरी भी एक बेटी है। अंजली मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तुम पढ़-लिखकर एक मुकाम हासिल करो, लेकिन अंजली तुम स्कूल नहीं आती हो तो मुझे बहुत बुरा लगता है। तुम अभी छोटी हो, खैर तुम्हें पढाई के महत्व का पता नहीं है। धीरे धीरे सब समझ जाओगी। जब मैं तुम्हें कभी-कभी डांट देती हूँ, तो शायद तुम्हें बुरा लगता होगा, लेकिन मैं क्या करूं मेरे ऊपर दोहरी जिम्मेदारी है। तुम्हारी माँ और शिक्षिका की भी।

एक संवेदनशील शिक्षिका के लिए तो स्कूल के सभी बच्चे बराबर हैं। शिक्षिका ने पत्र में गुड टच-बैड टच के बारे में अवगत कराकर बच्चों को जागरूक किया।

शिक्षिका चाहती है कि अंजली अच्छी इंसान बने। सदा अपने से बड़ों का आदर करे। गुरुजनों की आज्ञाकारी बने। अन्याय का डटकर मुकाबला करे।

संवेदना व्यक्त करते हुए शिक्षिका ने लिखा है कि यदि किसी कारण तुम से दूर हो भी गयी तो सदा तुम मुझे अपने पास ही पाओगी।

    किसी का दिल ना दुखाना अंजली

           सबको प्यार तुम करना अंजली|

    मुझको भूल ना जाना अंजली

           खूब पढ़ना- लिखना अंजली||

                                            

                         तुम्हारी माँ

                        शोभा कंवर

टिप्पणियाँ

  1. बेटी को मां की अच्छी सीख देने वाला पत्र लिखा है शोभा जी ने। बहुत बहुत बधाई हो शोभा कंवर जी को।

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