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एक समर्पित शिक्षक रहे शिवराज जी कुर्मी

परिचय

साथियो! आज हमारे साथ हैं एक अनूठी प्रतिभा श्री शिवराज कुर्मी जी (बी.ए. बी-एड.), जो अपने शिक्षण कौशल का प्रदर्शन कर अभी सेवानिवृत्त हुए हैं। राजस्थान जन मंच द्रस्ट, जयपुर द्वारा समाज रत्न सम्मान 2022 से अलंकृत कुर्मी जी को दैनिक भास्कर, जयपुर द्वारा बेस्ट टीचर अवार्ड से वर्ष 2022 में नवाजा गया। इसके अतिरिक्त उनको अनेक पुरस्कार एवं सम्मान मिले हैं, जिनमें उपखण्ड स्तर पर सेवा कार्य हेतु प्रशस्ति पत्र, समर्पण संस्था, जयपुर द्वारा समाज गौरव सम्मान (2017), सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग, जयपुर द्वारा अम्बेडकर सामाजिक सेवा पुरस्कार तथा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017 में ब्लॉक स्तरीय योग शिक्षक सम्मान भी मिला है| छत्तीस वर्ष तक अध्यापन कार्य के अतिरिक्त डा. सूरज सिंह नेगी (वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी, जयपुर) की मुहिम, 'पाती अपनों को', से प्रभावित होकर स्कूली विद्यार्थियों के बीच रहकर पत्र और निबंध लेखन, चित्रकला, कहानी लेखन के अतिरिक्त पत्र वाचन में सक्रिय सहभागिता के साथ साथ विद्यार्थियों का मनोबल बढा़ने में भी प्रमुख भूमिका निभाई है| इनका विशेष लगाव सामाजिक सरोकारों तथा प्रकृति से रहा है तथा जीव दया के पुण्य कार्य में भरपूर सहभागिता रही है| विगत वर्षों में आपके द्वारा प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में काफ़ी नवाचार किए गए। परिणामस्वरूप यह लगातार साहित्य मंच टोडा के संयोजक रहे। आप निरंतर सामाजिक सरोकार के कार्यों में संलग्न रहे हैं। आपके प्रयासों से स्कूली बच्चों में पत्र लेखन, चित्रकारी की अद्भुत क्षमताओ का विकास हुआ है। विलुप्त होती पत्र विधा को पुनः जागरूकता लाने में सक्रिय भागीदारी हेतु साहित्य मंच टोडारायसिंह में जिला स्तर पर सम्मान हुआ है| आप लगातार लुप्तप्रायः गौरैया को बचाने के लिए हस्ताक्षर अभियान,परिंडा,घोंसले वितरण एवं पाती लेखन, पत्र वाचन, समीक्षा आदि अनेकानेक कार्य सतत रूप से समाज में जागरूकता लाने हेतु करते रहे हैं। अभी हाल के राजस्थान में संपन्न लोकसभा चुनाव में भी मतदान जागरूकता अभियान में आपकी टीम ने घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का अनथक प्रयास किया है। आपका हमेशा टीम वर्क में विश्वास रहा है। नई नई प्रतिभाओं को मंच देने व उनमें क्षमताओं के विकास हेतु आप सतत रूप से क्रियाशील रहते हैं। आपका सरल व सौम्य स्वभाव बरबस ही सबको आकर्षित कर लेता है। आप धर्मपरायण व सामूहिक नेतृत्व क्षमता में विश्वास रखने वाले सरल व सहज व्यक्तित्व के धनी हैं। आपके इन जागरूक प्रयासों से निरंतर टोंक जिले का नाम और यश पूरे राजस्थान राज्य में फैल रहा है। आप सदैव दूसरों की सेवा, सहयोग करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। उनके इन सब भागीरथी प्रयासों के कारण गणतंत्र दिवस पर जिला कलेक्टर महोदय टोंक द्वारा आप और आपकी टीम को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। आइए, आज हम आपको मिलवाते हैं राजस्थान के टोंक जनपद के टोडारायसिंह ब्लॉक से शिक्षा के पुरोधा रहे श्री शिवराज कुर्मी साहब से।




बातचीत

प्रश्न १. सर, आप लगातार विभिन्न तरह के सामाजिक सरोकार के कार्यों में संलग्न रहते हैं। आखिरकार इन सबके लिए आपको इतनी ऊर्जा व प्रेरणा आपको कहां से मिलती है?

उत्तर - "मां शारदे के आशीर्वाद से बचपन से ही सेवा कार्यो में रुचि रही है। सेवा में रहते हुए भी नि:स्वार्थ सेवा कार्य में सक्रिय भूमिका रहती थी। इससे मन में खुशी का भाव जाग्रत होता था।"

प्रश्न २. सर, आप पहले सरकारी शिक्षक भी रहे हैं तो हम जानना चाहते हैं कि शिक्षा में गुणवत्ता सुधारों के नाम पर किए जा रहे बदलावों से आप कितने सहमत हैं?

उत्तर - "छोटे- छोटे बच्चों के साथ आनन्द दायी शिक्षण, खेल गतिविधि आधारित शिक्षण। बच्चों को अपनी बात रखने का अवसर।"

प्रश्न ३. सर, आप बच्चों की विभिन्न क्षमताओं के विकास हेतु कई सारी गतिविधियां जैसे पत्र लेखन, समीक्षा, नाटक मंचन आदि करवाते रहते हैं। क्या आपको ऐसा लगता है कि अभी भी कुछ कराने से रह गया है तथा आगे और क्या-क्या करवाने की योजना है?

उत्तर - "सबसे पहले तो बच्चों में साहित्य अकादमी के प्रति लगाव पैदा कर आत्मविश्वास के साथ किसी भी विषय पर अपने विचार रख पानने में उनको सक्षम किया। फिर विलुप्त होती पत्र विधा के प्रति जागरूक करने के लिए पत्र, निबंध, कहानी लेखन करवाया। साथ ही पत्र समीक्षा की समझ पैदा की। मुझको इतना पर्याप्त लगता है।"

प्रश्न ४. सर, हिंदी भाषा के अतिरिक्त आपका अन्य प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?

उत्तर - "वह सामाजिक विज्ञान है, प्रकृति प्रेमी होने के नाते स्कूली विद्यार्थियों संग अधिकाधिक पौधारोपण एवं संरक्षण। विलुप्त होती गौरैया चिड़िया संरक्षण की जानकारी देकर पत्र लेखन, हस्ताक्षर अभियान, पोस्टर बनाने के लिए प्रेरित करना, परिंडे और घोंसले लगाना।"

प्रश्न ५. सर, व्यक्ति हमेशा सीखता रहता है। आप विद्यार्थियों के साथ अधिकांश समय जुड़े रहते हैं। कभी आपका बच्चों से भी सीखना हुआ है क्या? कृपया हमें बताएं।

उत्तर - "मनुष्य सामाजिक प्राणी है। वह अपने आसपास के वातावरण से हमेशा सीखता रहता है। जीवन में छोटे बच्चों से भी हमें सीखने का अवसर मिलता है। प्रत्येक व्यक्ति में एक अलग सी विशेषता होती है। अलग- अलग हुनर बच्चों में भी देखने को मिलते हैं जिससे हम सीख पाते हैं।"

अन्त में 

मेरा आप सभी से विनम्र निवेदन है कि जीवन में नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने की सोच रखनी चाहिए। बेजुबान और निराश्रित जीवों के कल्याण कार्य के सहभागी बनें।"

"जय हिंद, जय भारत।"

निवास

धाकड़ कालोनी, वार्ड नं. 01, 

टोडारायसिंह, जिला टोंक (राजस्थान) 

मोबाइल

+919252815751

संकलनकर्ता एवं सृजक 

श्री हंसराज 'हंस' जी

प्रस्तुति







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