सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

राजस्थान का एक शिक्षक सितारा हैं ललिता जी

परिचय

साथियो आज हमारी अतिथि ललिता पारिक जी राजस्थान राज्य के टोंक जिले से हैं। शिक्षा विभाग में एक प्राथमिक अध्यापक के रूप में ये वर्ष 2007 से नियुक्त हैं। ये राजस्थान शासन के 'स्पर्श' कार्यक्रम से भी जुड़ी हुई हैं। नवीन जैन सर की पहल का तहेदिल से आभार व्यक्त करते हुए ये बताती हैं कि यह अभियान एक अभियान ना होकर एक पुण्य कार्य है। इन्होंने अभियान से जुड़ने के दौरान ही अनेक अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में जाना और समझा तथा उस पर चर्चा कर अपने विचार भी साझा किए। स्पर्श के माध्यम से गुड और बैड स्पर्श से अवगत कराकर बालकों को आत्मनिर्भर करके मासूम बच्चों का जीवन सुरक्षित हो सके, तो इनको संतोष मिलेगा। तो आइए आज मिलते हैं ललिता पारिक जी से।

बातचीत

प्रश्न १. मैडम, आपने शिक्षा से जुड़ने का निर्णय कैसे लिया?

उत्तर - "शिक्षा से जुड़ने का निर्णय मैंने बारहवीं में पास होने के बाद ही ले लिया, क्योंकि मुझे लगा कि शिक्षक एक ऐसी भूमिका का निर्वहन करता है जो समाज में आदर्श व समाजसेवा द्वारा अपनी एक पावन छवि बना लेता है और मेरे आदर्श शिक्षको के मार्गदर्शन द्वारा यह संभव हो पाया।"

प्रश्न २. मैडम, आप वर्ष २००७ से शिक्षिका हैं। आपको 'स्पर्श' अभियान से जुड़ने का अवसर कैसे मिला?

उत्तर - " 'स्पर्श' से  जुड़े अभी मुझे मात्र छह माह हुए हैं या यूं कहूं कि अभी तो करना शुरू हुआ है और इस अभियान के प्रणेता श्रीमान IAS नवीन जैन सर द्वारा मुझे इस मुहिम से जोड़ा गया। सर ने यह कार्यक्रम अपने शिक्षा विभाग के कार्यकाल में इस अभियान को 'सुरक्षित स्कूल सुरक्षित राजस्थान' नाम से सभी राजकीय विद्यालयों में आयोजित करवाया, परंतु 'स्पर्श' से जुड़ने के बाद मुझे लगा कि क्यों नहीं यह कार्य हम झुग्गी झोंपड़ी, निजी विद्यालय या मदरसा में भी आयोजित करवायें, क्योंकि बच्चे तो सभी हमारे ही हैं ना बस यहीं से कारवां प्रारंभ हो गया।"

प्रश्न ३. मैडम, आपका 'शिक्षक सितारे' के अंतर्गत चयन कब हुआ और जब आपको यह सूचना मिली आप तब की अपनी अनुभूति से कृपा कर अवगत कराइए।

उत्तर - "सर, मेरा 'शिक्षक सितारे' में चयन 24 अक्टूबर 2023 को हुआ, जिसमें बच्चों के साथ की गई शनिवारीय गतिविधि में खेल-खेल में शिक्षण कार्य करवाने का वीडियो फेसबुक द्वारा शिक्षा शासन सचिव श्रीमान नवीन जैन सर द्वारा देखकर इन नवाचारों की सराहना कर 30 नवंबर 2023 को राजस्थान के शिक्षक 'सितारे सम्मान' से मुझको नवाजा गया और इस प्रकार राज्य स्तर पर सम्मानित होना मुझे लगता है एक अलग ही खुशी का अहसास दिलाता है। सर द्वारा दिनांक 2 नवंबर 2023 को राज्य स्तरीय वेबिनार 'बात आपकी हमारी' में भी मुझको आमंत्रित किया गया और स्कूल में किए जाने वाले नवाचारों पर चर्चा की गई जो कि मेरे लिए अविस्मरणीय पल रहेगा।"

प्रश्न ४. मैडम, आपको कब ऐसा लगा कि 'स्पर्श' अभियान से जुड़कर आपने उचित निर्णय लिया है?

उत्तर - "स्पर्श एक एहसास है यह मैंने 'स्पर्श' समूह से जुड़कर जाना, क्योंकि जरूरी नहीं कि हम जो कार्य करें वह किसी सम्मान की प्राप्ति के लिए ही हो। जैसे-जैसे मैंने 'स्पर्श' के सेशन लेने प्रारंभ किया, उन छोटे-छोटे मासूम बच्चों को गुड टच और बैड  टच के बारे में बताया, तो परिणाम आने पर सुकून मिला। मुझे लगा कि अगर इस प्रकार मैं बच्चों के जीवन को थोड़ा सा भी सुरक्षित कर पा रही हूं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़े सम्मान है। 'स्पर्श' मिशन एक पुण्य कार्य में एक आहुति के समान है जो कि मैं अपने जीवन भर करना चाहूंगी। इस प्रकार बच्चों को सुरक्षित एहसास के साथ जागरूक करना मुझे आत्मसंतोष देता है।"

प्रश्न ५. मैडम, लेखन में आपका सर्वप्रिय विषय क्या है और क्यों?

उत्तर - "वैसे तो लेखन में मेरा सर्वाधिक प्रिय विषय हिंदी काव्य विधा है, क्योंकि सामान्यतया मेरा मन प्रेरणादाई और संघर्षमय कविताओं को लिखने के लिए स्वतः प्रेरित करता है और मुझे लगता है कि संघर्षशील इंसान के लिए प्रेरणादायक कविता एक महत्व ऊर्जा का कार्य करती है।"

प्रश्न ६. मैडम, यदि 'उलझन सुलझन पत्र प्रकाशन समूह' आपसे नित्यप्रति एक संदेश जनहित में देने का आग्रह करे तो क्या आप प्रयास करेंगी?

उत्तर - "श्रीमान उलझन सुलझन मासिक पत्र वाकई में स्वयं में एक अद्भुत पत्र है, जो मनुष्य द्वारा किए गए विभिन्न नवाचारों को एक क्रम से जोड़ती हुई माला के समान है और मेरा 'उलझन सुलझन' के पाठकों के लिए यही संदेश है कि 

"लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती 

और! कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।"

और यदि हम किसी कार्य को करने का विचार कर लें, तो वह निश्चित रूप से पूर्ण होता है और हमें अपने जीवनकाल में एक न एक सामाजिक सेवा प्रण  के साथ जरूर करनी चाहिए। फिर चाहे वह नशा मुक्ति हो, बाल श्रमिकों को लेकर हो, नारी उत्पीड़न संबंधी हो, गुड टच बैड टच, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, आत्म रक्षा हो या फिर कोई और। ऐसे कार्यों से जुड़कर और उनको समयबद्ध तरीके से करके हमें सम्मान मिले या ना मिले पर आत्मसंतोष तो निश्चित रूप से मिलती है।"

प्रस्तोता

शब्दशिल्प

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...