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कैदियों का जीवन संवारने को पहल

भूमिका

दुनिया भर में समाज का जुर्म और मनोविज्ञान से संबद्ध लोगों से साबका पड़ता रहता है। मनोविज्ञान विविध तरीकों से मानव व्यवहार को लेकर समाज को सजग करता रहता है और जुर्म की दुनिया से विविध कारणों से जुड़ जाने वालों में सुधार की संभावनाओं को तलाशता रहता है। यहां पर कुछ ऐसे ही प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

गतिविधियां

आगरा। केंद्रीय कारागार में सजायाफ्ता कैदियों का जीवन संवारने के लिए एक पहल की गई है। कारागार में कंप्यूटर की शिक्षा देने के लिए विशेष कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। प्रशिक्षण लेने वालों में 30 साल से 62 साल तक के कैदी शामिल हैं। कैदी काफी उत्साहित हैं।

कारागार में विकलांग सहायता संस्था, मथुरा की आगरा शाखा ने 10 कंप्यूटर लगवाए हैं, इसमें संस्था के संस्थापक सचिव डा. वीके गुप्ता, अध्यक्ष डा. एमसी गुप्ता, सचिव प्रेमचंद जैन, उपाध्यक्ष सतीश मांगलिक, अनिल अग्रवाल, सीए संजीव माहेश्वरी का योगदान रहा। एक अगस्त से प्रशिक्षण शुरू हुआ है। चार घंटे की क्लास लगती है। शिक्षक रजत सक्सैना ने बताया कि कैदियों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी दी जा रही है। डा. वीके गुप्ता ने बताया कि संस्था की ओर से उत्तर प्रदेश में ऐसा यह पहला प्रयास है। इसका मुख्य उद्देश्य जेल से सजा पूरी करके जाने वाले कैदियों का जीवन संवारना है, जिससे वह रोजगार पा सकें। इससे समाज उन्हें स्वीकार कर सकेगा। प्रशिक्षण प्रात करने वाला कैदी अगर, दूसरी जेल में जाएगा तो वह वहां दूसरे कैदियों को सिखा सकेगा।

आगरा ही में कंप्यूटर की शिक्षा लेने में 62 साल के राज सिंह सबसे आगे रहे। वह सबसे ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। इसके अलावा कंप्यूटर सीखने में कैदी उत्साहित हैं। कंप्यूटर की शिक्षा लेने के लिए 37 कैदियों ने पंजीकरण कराया है। वृद्ध कैदी भी रुचि दिखा रहे हैं। मुजफ्फर नगर निवासी 62 साल के राज सिंह 2010 से सजा काट रहे हैं। 2015 में वह केंद्रीय कारागार आगरा आए। वैसे तो वह खेतीबाड़ी करते थे, ज्यादा पढ़ नहीं सके। गांव में, कभी कंप्यूटर चलाया नहीं है। अब उन्हें मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अगर व जेल से रिहा हो सके तो घर जाकर अपने बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा न देंगे। झारखंड के धनबाद जिले के पार्थो मुखर्जी का कहना है कि उन्होंने ड्री । इंटर किया था। मगर, जेल में आने के बाद बीए किया। वह पेंटिंग भी - करते हैं। कंप्यूटर शिक्षा उनके लिए काफी फायदेमंद रहेगी। वहीं मोहम्मद इनाम इंटरमीडिएट पास से थे। उन्होंने जेल में बीए और एमए किया। आगे भी पढ़ने की इच्छा है। उन्होंने अपनी रिहाई के लिए हाईकोर्ट में अपील की है। वह कई कोर्स और डिप्लोमा कर चुके हैं। अब कंप्यूटर सीखकर साथी कैदियों को भी शिक्षित करने की सोचे बैठे हैं। मुजफ्फर नगर के सोनी इंटरमीडिएट फेल थे। उन्होंने जेल में चित्रकारी, संगीत, हारमोनियम सीखा। उर्दू की शिक्षा भी ली. उनके अलावा 60 साल के राजकुमार यादव, 52 साल के राम अवतार सहित पिंटू सैनी सहित 37 कैदी हैं। जेल प्रशासन के अनुसार कंप्यूटर सीखने वाले कैदियों को जेल में विभिन्न कार्यों में लगाया जाएगा। कैदियों में उत्साह है। वह ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षण लेना चाहते हैं। (ब्यूरो एस)


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