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सेमिनार विवरण

स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय

स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय (एसवीएसयू) नैक 'ए' ग्रेड, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 की धारा 2(एफ) के तहत स्थापित निजी विश्वविद्यालय है।

विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्तर्गत मेरठ में २५० एकड़ भूमि में फैला हुआ है। विश्वविद्यालय के अनेक संघटक महाविद्यालय है जो लगभग सभी विषयों जैसे मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, फार्मेसी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कानून, पत्रकारिता एवं जनसंचार, शिक्षा, शारीरिक शिक्षा, पुस्तकालय, कला और मानविकी, होटल प्रबंधन आदि में उच्च शिक्षा प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालय ने शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए कई पुरस्कार अर्जित किए हैं।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस शोधपीठ

स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय नेताजी सुभाषचंद्र बोस के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कृतसंकल्प है। इसी महत्वाकांक्षी सोच के साथ, 1 मार्च 2020 को सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अन्तर्गत 'अभिनव भारत चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा वित्त पोषित 'नेताजी सुभाषचंद्र बोस पीठ' की स्थापना की गई है।

स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय ने हमेशा वास्तविक जीवन के राष्ट्रीय नायकों को उचित सम्मान देकर हमेशा उनके वीरतापूर्ण कार्यों से प्रेरणा ली है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कई मायनों में हमारे जीवन को प्रभावित किया है। विश्वविद्यालय ने वैचारिक रूप से नेताजी सुभाषचंद्र बोस और उनके जीवन-दर्शन की राह पर चलने का प्रयास किया है। पीठ का मुख्य उद्देश्य आज की पीढ़ी के बीच नेताजी के जीवन और उनके योगदान को प्रचारित एवं प्रसारित करना है।

शोध-पत्र हेतु दिशा-निर्देश

समीक्षा और चयन के लिए शोध-सारांश (अधिकतम 200 शब्द) दिए गए ई-मेल आईडी पर भेजें।

• शोध-सारांश में अधिकतम 4-5 कुंजी शब्द होने चाहिए।

-सभी शोध-सारांशों की समीक्षा की जाएगी और चयनित शोध-सारांश के लेखकों को पूर्ण शोध-आलेख प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

• शोध-सारांश व आलेख हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आमंत्रित हैं।

• हिंदी भाषा के लिए कृतिदेव 010, मंगल और अंग्रेजी भाषा के लिए Times New Roman 12 फॉन्ट में 4000 शब्दों की अधिकतम सीमा के साथ, केवल एमएस वर्ड में डबल स्पेस के साथ प्रेषित करें।

• केवल शोध-आलेख का इलेक्ट्रॉनिक सबमिशन ही स्वीकार किया जाएगा।

- संदर्भ एपीए शैली में होना चाहिए।

- शोध-आलेख में अधिकतम 10 प्रतिशत से अधिक Plagiarism मान्य नहीं होगा।

• सह-लेखन की अनुमति है, (प्रति सबमिशन 2 सह लेखकों की ऊपरी सीमा के अधीन), प्रस्तुत सभी लेख, शोध-पत्र लेखक का मूल कार्य होना चाहिए और किसी भी रूप में कहीं और प्रकाशित या प्रकाशन के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।








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