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जीवन में जो भी करो खुशी के साथ करो

ध्यान दें

जीवन मंत्र जो भी दे स्वीकारो! जीवन भर ऐसा बहुत कुछ होता है जो अनछुआ या अनदेखा रह जाता है लेकिन सुझावों के रूप में मिल जाता है तो यह समझने की जरूरत है कि जिज्ञासु बने रहा जाए और जीवन मंत्र के रूप में चीजों को ग्रहण कर लिया जाए।

आत्माभिव्यक्ति

इंजीनियरिंग के लिए काउंसलिंग चल रही थी। सोनू अपने पापा के साथ वहां गया था। कुछ देर बाद उसके पापा के विभाग का सुरक्षाकर्मी भी अपनी बेटी के साथ वहां आया। सोनू ने उसकी रैंक पूछी, तो वह काफी कम निकली। उसने सोनू से पूछा, "तुमने इंजीनियरिंग क्यों चुनी?" सोनू ने जवाब दिया, "बस, ऐसे ही मन था।" शाम को 7 बजे काउंसलिंग खत्म हुई। कुछ समय बाद परिणाम घोषित हुआ और सोनू को नौकरी मिल गई। धीरे-धीरे कई साल व्यतीत हो गए और सोनू को समझ आया कि परीक्षा के नंबर बस कागजी खुशी देते हैं। अच्छी नौकरी के बावजूद कुछ अधूरापन-सा था। एक सुबह सोनू अखबार पढ़ रहा था। 

तीसरे पन्ने पर एक तस्वीर थी, जो उसको जानी-पहचानी सी लगी। हेडलाइन थी - 

'सुरक्षाकर्मी की बेटी बनी आईएएस।' 

थोड़ा पढ़ा तो सोनू आठ साल पीछे चला गया। यह वही लड़की थी, जो उसे काउंसलिंग में मिली थी। उससे पूछा गया था कि "इंजीनियरिंग छोड़कर आईएएस क्यों चुना?" उसने जवाब दिया था.. "मेरा सपना अपने लोगों के लिए कुछ करने का था। जरूरी नहीं कि सब आईएएस ही बनें, पर खुशियों के संग जीना ज्यादा जरूरी है।" उसका जवाब पढ़कर सोनू को समझ आया कि जो भी काम करो, खुशी से करो। 

 तुषार कौशिक, फरीदाबाद 

(दैनिक अमर उजाला १२.०४.२०२४ अंक से साभार)

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