मराठा साम्राज्य की स्थापना कर 'छत्रपति शिवाजी' कहलाए।
वे समर विद्या में पारंगत हो छापामार युद्ध का नवाचार लाए।
19 फरवरी 1630 में, शिवनेरी किले में जन्म पाये।
शाहजी व जीजाबाई के वो कुंवर कहलाए।
माता जीजाबाई से, धार्मिक शिक्षा पाई।
निडरता व बहादुरी से, 'शौर्य पुरुष' कहलाए।
मुगलों के खिलाफ, भारत की थे वे शान।
छोटी-सी उम्र में ही, होने लगा था इनका गुणगान।
सबसे पहले तोरण (बीजापुर) किले पर, किया था हमला।
बहादुरी व शौर्यता से, छोटी-सी उम्र में ही जीता किला।
मुगल शासक औरंगजेब को, खूब नाकों चने चबवाया।
अपनी वीरता व पराक्रम से, मुगलों को खूब छकाया।
आदिलशाह को अपनी ताकत पर था, बड़ा अभिमान।
शिवाजी को चालाकी व धूर्तता से, मारना चाहता था वह बेईमान।
बाजूओं में ही मसलना चाहता था, पर शिवाजी निकले हीरा।
बुद्धिमानी और बहादुरी से, उसके पेट को चीरा।
गुरु रामदास से पाई थी शिक्षा, जो राष्ट्रीयता के थे परिचायक।
रामायण और महाभारत से प्रभावित, हिंदू साम्राज्य के थे पहले महानायक।
वे नहीं थे खिलाफ, मुसलमानों और मुगलों के।
खिलाफ थे वे, औरंगजेब की कट्टरता व उद्दण्डता के।
ऐसे महान वीर पराक्रमी का 3अप्रैल 1680 को हुआ देवलोक गमन।
हिंदू सम्राट छत्रपति शिवाजी को, हम सब करते है कोटि-कोटि नमन।


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