संयम को प्रबुद्धजनों ने स्वयं से युद्ध की संज्ञा दी है, जबकि मूलतः यह आत्मनियंत्रण है।
ऐसा समझना किसी का व्यक्तिगत अनुभव हो सकता है, जबकि वास्तव में संयम अर्थात् सहनशीलता एक विस्तृत चारित्रिक भाव है, जिसमें आत्मनियंत्रण भी है और धैर्य भी। यह सफलता की प्रत्याभूति या ज़मानत तो नहीं देता, लेकिन असफलता से पार पाने के कई आसान रास्ते अवश्य सुझाता है, जिसके द्वारा मनचाहा अर्जित किया जा सकता है।
अतः समझिए ऐसे कि


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