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 "ताई जी! हमने दर्शन कर लिए हैं। हम वापस आ रहे हैं।"

राजस्थान के सीकर शहर से मेरठ के बिंदल परिवार के सदस्यों में से किसी एक ने यह सूचना प्रेषित की थी। और! अगले ही पल कार 🚗 आग का गोला बन चुकी थी। जिसके घेरे में आए समस्त परिजन काल का ग्रास बन गए।

आग का गोला  बनी कार

बचाव कार्य में संलग्न स्थानीय नागरिक
बचाव कार्य
आग काबू करने की दिशा में प्रयास
पुरानी तस्वीर उल्लास के पल
घटनाक्रम
पुलिस सूत्रों के अनुसार कार चालक पेपर रोल और कॉटन बॉक्स ले जा रहे ट्रक को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। तभी विपरीत दिशा से एक अन्य वाहन आता देखकर कार चालक ने दुर्घटना को टालने के लिए ट्रक को ही टक्कर मार दी, जिससे कार में मौजूद एल पी जी किट में आग लग गई।
तमाम अखबारी सूचनाएं कार में गैस किट लगी होने की पुष्टि कर रही हैं। अब प्रश्न उठता है अनमोल जीवन के लिए सुरक्षित परिवेश के निर्माण का कि आखिर कैसे वह सुरक्षित रहे? घरेलू गैस किट असुरक्षित होने के बावजूद भी इस विशाल और प्राचीन भारत देश के कितने वाहनों में लगी है इसका कोई लेखाजोखा है कि नहीं? और! यदि लेखाजोखा हो भी तो भी क्योंकर असुरक्षित मानी जाने वाली यह किट निरंतर वाहनों में लगाई जा रही है। इसके विपniरीत यदि यह एक उत्तम श्रेणी का माध्यम है तो क्यों नहीं इसको सुरक्षित करने की दिशा में प्रयास किए जाते? यह सबके समक्ष एक यक्ष प्रश्न है। प्रश्न वाहन उपयोगकर्ताओं के समक्ष भी है कि क्यों मितव्ययिता के फेर में सबके जीवन को दांव पर लगा दिया जाता है। जीवन अनमोल है तो इसको सुरक्षित रखने की दिशा में अथक व निरंतर प्रयासों की लगातार जरूरत है।
विशेष
इस हृदय विदारक घटना के बारे में जानकर उत्तराखंड के प्रख्यात कवि श्री कृष्णदत्त शर्मा कृष्ण ने निम्न कविता की रचना तत्काल ही कर डाली।

"जीवन है अनमोल"

जीवन है अनमोल विधि का अनुपम यह उपहार। 
इसीलिए जीवन से करता हर प्राणी है प्यार ।

हर जीवन से मानव जीवन जग में है अनमोल। 
मिला हुआ मानव जीवन में महा गुणों का घोल। 
ज्ञान ध्यान की सारी शक्ति मानव ने पाई है। 
सभी धर्मग्रन्थों ने महिमा मानव की गाई है। 
मानव जीवन है सृष्टि का एक मात्र आधार।
इसीलिए जीवन से करता हर प्राणी है प्यार।।१।।

लख चौरासी भोग भोगकर मानव जीवन मिलता। 
मात्र इसी योनि में प्राणी पाता जीवन खिलता। 
मानव जीवन ही इस जग में मुक्ति राह दिखाता। 
पुण्य कर्म से हरि मिलन की मन में चाह जगाता। 
मानव ही जीवन को जग में दे सकता विस्तार। 
इसीलिए जीवन से करता हर प्राणी है प्यार।।२।।

इस सृष्टि में मानव केवल एक अलौकिक रचना। 
मानव को चाहिए जीवन का मान सदा ही रखना। 
अनमोली जीवन में केवल कर्म करो अनमोली। 
इस जीवन में छटा बिखेरो मोहक व अलबेली। 
करो सार्थक मानव जीवन खुश हो जो करतार। 
इसीलिए जीवन से करता हर प्राणी है प्यार।।३।।

जीवन तो सबका बीतेगा जीव सभी जो जग के। 
पर जीवन है सदा निरर्थक चुने न कंटक मन के। 
आओ समझें महत्व जगत में इस मानव जीवन का। 
अनमोली ही बना रहे बस हर पल इस जीवन का। 
ये ही जीवन कर सकता है भव से बेड़ा पार।
इसीलिए जीवन से करता हर प्राणी है प्यार।।४।।


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