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ऑनलाइन कार्यशालाओं के रिसोर्स पर्सन श्री हेमंत जी

 परिचय

आज हमारे साथ हैं श्री हेमन्त कुमार शर्मा जी (अध्यापक लेवल-प्रथम), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, गरजेड़ा ब्लॉक मालपुरा जिला टोंक (राजस्थान), जो विगत दस वर्षों से प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों के पक्षधर रहे हैं। इनका शैक्षिक नवाचार, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं, ऑनलाइन कार्यशालाओं में रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्य करने का लगभग आठ वर्षों का अनुभव रहा है। राजस्थान सरकार द्वारा बच्चों के लर्निंग गैप्स व लॉस को कम करने के लिए राज्य भर में चलाए जा रहे RKSMBK कार्यक्रम में आप लगातार टोंक जिले के शिक्षा विभाग के अधिकारियों व मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, मालपुरा श्री श्योजी लाल बैरवा तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन मालपुरा के साथ मिलकर के साथ जुड़कर भागीरथी प्रयास कर रहे हैं। आप टीम वर्क पर विश्वास करते हैं। इन प्रयासों की बदौलत ही टोंक जिला अपंनी अच्छी रैंकिंग बनाए हुए है। आपके शैक्षिक नवाचारों को शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित 'पिटारा गतिविधि पुस्तिका' में भी स्थान मिला है। इसके लिए आपको शिक्षा सचिव (स्कूल शिक्षा), राजस्थान सरकार श्रीमान नवीन जैन द्वारा राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। इससे पूर्व मालपुरा उपखंड स्तर के उपखंड अधिकारी महोदय द्वारा कोविड-19 के समय पर बच्चों तक ऑनलाइन माध्यम से नियमित जुड़कर शिक्षण कार्य करवाने पर आजादी के 'अमृत महोत्सव' पर स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय शिक्षक वेबिनार में मुख्य पैनलिस्ट में चयन तथा राज्य स्तर पर साप्ताहिक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में प्रश्न निर्माण करना। साथ ही आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जिले के सभी शिक्षकों को समय-समय पर विभागीय जानकारी भी उपलब्ध करवाते रहते हैं। आप सदैव दुसरों की सेवा व सहयोग करने को तत्पर रहते हैं। तो आइए आज मिलते हैं राजस्थान के टोंक जनपद के मालपुरा ब्लॉक से शिक्षा के धनी हेमन्त कुमार शर्मा जी से।

श्री हेमंत कुमार शर्मा जी
   श्री हेमंत जी को प्रशस्ति पत्र देते हुए शासन सचिव महोदय

बातचीत

प्रश्न १. सर, छोटे बच्चों के साथ ऑनलाइन शिक्षा को लेकर आपके क्या अनुभव हैं?

उत्तर - "ऑनलाइन शिक्षा; वर्तमान में शिक्षा के सभी स्तरों के लिए उपभोगी साबित हुई है। प्रारम्भिक स्तर पर छोटे बच्चों को सिखाने व उनमें सीखने के प्रति रुचि विकसित करने में ऑनलाइन शिक्षा ने महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बालक किसी भी समय सीख सकता है। उसे शिक्षा प्राप्त करने हेतु विद्यालय के समय जैसा पाबन्द नहीं रहना पड़ता है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर अनेक शिक्षण सामग्री उपागम; जैसे - विडियोज, पुस्तकें आदि उपलब्ध हैं, जिनका प्रयोग बालक विभिन्न तरीकों से सीखने हेतु कर सकता है। नियमित कक्षाओं की तुलना में ऑनलाइन शिक्षा में सिखाई गई बातें छोटे बच्चे तुलनात्मक रूप से जल्दी सीख जाते हैं तथा वे बातें उनके मस्तिष्क में भी अधिक समय के लिए स्थायी रहती हैं। ऑनलाइन शिक्षा ने छोटे बच्चों में उस घबराहट को कम किया है जो उन्हें नियमित कक्षा में अपने शिक्षक के समक्ष होती है। ऑनलाइन शिक्षा ने छोटे बच्चों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है। कई ऐसे टॉपिक्स जिनमे बच्चों को कठिनाई आती है उनको वे स्वयं ऑनलाइन प्लेटफार्म पर सर्च करके सीखने सकने में रुचि लेते हैं। ऑनलाइन माध्यम से ऐसी अनेक रोचक गतिविधियां उपलब्ध हैं,  जिनसे बच्चे आसानी से सीख सकते हैं। ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चे नई तकनीकों और ऑनलाइन टुल्स का प्रयोग करना सीखते हैं, जो कि उनके भावी जीवन के लिए उपयोगी है।"

प्रश्न २. शिक्षा की गुणवत्ता के सुधारों के नाम पर किए जा रहे शिक्षा में बदलावों से आप कितने सहमत हैं?

उत्तर - "वर्तमान समय में नवीन शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किये जा रहे हैं और शिक्षा के निर्धारित पाठ्यक्रम के साथ-साथ दक्षता व कौशल आधारित शिक्षण करवाया जा रहा है। इससे छात्रो के शैक्षिक स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है; जैसे- कार्यपुस्तिका ABL किट, पुस्तकालय, रीडिंग कॉर्नर प्रिन्ट रीच वातावरण, खेल गतिविधियाँ आदि के द्वारा उपचारात्मक शिक्षण करवाया जा रहा है।"

प्रश्न ३. आपको सरकारी शिक्षा की बेहतरी के प्रयास करने की प्रेरणा कैसे मिली?

उत्तर - "मेरे को सरकारी शिक्षा में बेहतरी करने के सार्थक प्रयास की प्रेरणा शासन सचिव स्कूल शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार श्री नवीन जैन के शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार व राजस्थान के 'शिक्षक सितारे' कार्यक्रम और RKSMBK कार्यक्रम के बाद श्री अरुण कुमार शर्मा, बीकानेर तथा APF मालपुरा के साथ मिलकर निरन्तर कार्य करने से मिली।"

प्रश्न ४. हिंदी भाषा के अतिरिक्त आपका अन्य प्रिय विषय कौन-सा है और क्यों?

उत्तर - "हिंदी भाषा के अतिरिक्त मुझे गणित विषय अत्यधिक प्रिय है। क्योंकि जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त मनुष्य गणित से जुड़ा रहता  है। विद्यार्थियों को अपने पारिवारिक परिवेश में गणितीय कौशलों का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग है; जैसे-दैनिक जीवन में गणित करते हैं का उपयोग गणितीय खेल, ABLकिट, मोती-माला बाजार में खरीददारी आदि। अतः विद्यार्थियों को गणित से सिखायी जा सकती है। आसान तरीकों से सिखाई जा सकती है।"

प्रश्न ५. सर, आपके क्षेत्र में विद्यार्थियों का सरकारी शिक्षा के प्रति रुझान कैसा है?

उत्तर - "मेरे क्षेत्र में विद्यार्थियों का सरकारी शिक्षा के प्रति रुझान निरंतर बढ़ रहा है। इसके लिये विद्यालयों का शैक्षिक वातावरण, प्रार्थना-सभा, खेल-कूद, नो-बैग डे, निपुण मेला, बाल-मेलों PTM राष्ट्रीय-पर्व आदि के साथ-साथ विभिन्न, सरकारी योजनाएँ - जैसे राष्ट्रीय पोषाहार कार्यक्रम, निःशुल्क यूनिफॉर्म वितरण, मुख्यमंत्री बालगोपाल योजना, छात्रवृतियाँ, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, ट्रांसफर वाउचर योजना कार्यक्रम आदि से विद्यार्थियों व अभिभावकों का रुझान सरकारी शिक्षा के प्रति निरन्तर बढ़ रहा है।"

श्री हेमंत कुमार शर्मा जी का संपर्क सूत्र - (+91) 9982564754

संकलनकर्ता एवं सृजक - श्री हंसराज हंस जी

प्रस्तुति





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