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मृत्यु शैय्या से पत्नी के सच्चे भाव (कल्पित)

मैं कभी भी अपने भाव मुक्त रूप से आपके समक्ष न रख सकी, जबकि यदि मैं कहती तो वो बहुत गहरे, भावनात्मक और ह्रदयस्पर्शी हो सकते थे। मैं आपके प्रेम, सहयोग और समर्पण के लिए कृतज्ञ हूं पर कभी यह सब व्यक्त ना कर सकी उस जीवन साथी के समक्ष जिसका जीवन भर साथ रहा। आपको यह जानकर शांति और सुकून मिलेगा कि हमने पूर्ण समर्पण और समझदारी से यह गठबंधन साझा किया। आपसे अलग होने के बारे में व आपको खोने पर दु:ख की गहरी भावना भी महसूस कर रही हूं, लेकिन संयोग और विछोह सृष्टि के अधीन हैं। मैं कहीं भी होऊं लेकिन मेरी स्मृतियों को सदैव संजोकर रखना। बस यही अंतिम विनती है मेरी आपसे।

आपकी धर्मपत्नी

लेकिन एक भुक्तभोगी द्वारा प्रदत्त विवरण

💖जीवन संगिनी - धर्म पत्नी की विदाई! 

हमको यह जान और समझ लेना चाहिए कि यदि अर्धांगिनी अर्थात पत्नी है तो सब कुछ है। राजा जैसी आन और शान तथा दुनिया में सिर ऊंचा रखने के लिए सदैव अपनी अर्धांगिनी का शुक्रिया अदा कीजिए। आपकी सुख-सुविधा व अकारण क्रोध को संभालती है। आपके सुख-दु:ख से कदमताल करती है। आप और अन्य परिजन रविवार को देर तक बिस्तर पर रहते हैं लेकिन अर्धांगिनी का कोई रविवार या त्योहार नहीं। निरंतर फरमाइशें, ये ऐसा, वो वैसा। निरंतर असहनीय ताने। उसके पास भी बौद्धिक क्षमता है और केवल उसी और उसी के कारण ही तो आपका जीवन व्यवस्थित चल रहा है। वरना दुनिया में आपको कोई भी न पूछे। 

अब जरा इस स्थिति की सिर्फ कल्पना भर करें - 

एक दिन अर्धांगिनी अचानक रात को गुजर जाती है !

घर में रुदन हो रहा है और उसका अंतिम दर्शन चल रहा था।

पत्नी की आत्मा उस वक्त जो कह रही है उसका वर्णन:

मैं अब जा रही हूँ हमेशा के लिए अब हम फिर कभी नहीं मिलेंगे।

जाते जाते बस यह ध्यान दिलाना चाहती हूं कि जिस दिन फेरे लिए थे उस वक्त साथ साथ जिएंगे ऐसा वचन दिया था, पर अचानक, अकेले और यों जाना पड़ेगा मुझको आभास तक नहीं था।

अब, मुझे जाने दो।

अपने आंगन में ही अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ।  

बहुत दर्द हो रहा है मुझे, लेकिन मैं मजबूर और विवश होकर अब जा रही हूँ। मेरा मन तो नहीं मान रहा पर मेरे वश में कुछ भी नहीं।

मुझे जाने दो।

मैं सबको ऐसे रोते नहीं देख सकती और उनको दिलासा भी तो नहीं दे सकती। अपना बेटा बेटी अभी नासमझ हैं, इनको बोलना कि मम्मी आपके लिए ढेर सारी आइसक्रीम लेने भगवान के पास गई है। कुछेक दिनों में लौट आएगी। और! आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न पड़ना।

अब मुझे जाने दो।

अभी आपकी बहन ससुराल से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी तब उसे संभालना और शांत करना। और! आप बिल्कुल भी ना रोना।

मुझे जाने दो।

जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है वो यहाँ से ऊपर भी अवश्य गया है। धीरे धीरे मुझे भूल जाना, मुझे बहुत याद नहीं करना। और आप अपने काम में डूब जाना। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत जल्दी से डाल लेना।

मुझे जाने दो।

आपने इस जीवन में मेरा कहा तो कभी माना नहीं है। पर अब जिद छोड़कर व्यवहार में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़ कर जाते मुझे बहुत कष्ट और चिंता हो रही है। लेकिन मैं मजबूर हूं।

मुझे जाने दो।

आपको ब्लड प्रेशर है और डायबिटीज भी। गलती से भी कभी मीठा नहीं खाना अन्यथा परेशानी होगी।  

सुबह उठते ही दवा लेना न भूलना। चाय अगर आपको कभी देर से मिले तो मां पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूं यह समझ कर जीना सीख लेना।

मुझे जाने दो।

अपना बेटा बेटी और मां कुछ बोले तो

चुपचाप सब सुन लेना। कभी गुस्सा नहीं करना। हमेशा मुस्कुराते रहना कभी उदास नहीं होना। 

मुझे जाने दो।

अपने बेटे बेटी के साथ खूब खेलना और दोनों बच्चों को यह एहसास ही मत होने देना कि मम्मी नहीं है और उसकी कमी घर में खलती है। जैसे जैसे ये दोनों बड़े होंगे अपनेआप समझदार होकर जान जाएंगे। इनको अपनेआप ज्ञात हो जाएगा कि पापा हमसे झूठ बोला करते थे। हमारे लिए मम्मी आइसक्रीम लेने नहीं गई। मम्मी तो हमें छोटा सा छोड़कर भगवान के पास बिना बताए सदा के लिए चली गई थी। और हां आप भी अपने दोस्तों के साथ थोड़ा बाहर समय बिताना और अब थोड़ा धार्मिक जीवन जिएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद कभी आये तो चुपचाप एकांत में रो लेना लेकिन कभी कमजोर नही होना।

मुझे जाने दो।

'मेरा रूमाल कहां है?', 'मेरी चाबी कहां है?' अब ऐसे चीखना चिल्लाना नहीं। सब कुछ ध्यान से रखने और याद रखने की आदत डालना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। अगर मां भूल जाये तो सामने से याद कर लेना। जो भी खाने को मिले प्यार से खा लेना और गुस्सा नही करना।

मेरी अनुपस्थिति खलेगी पर कमजोर नहीं होना।

मुझे जाने दो।

बुढ़ापे की छड़ी भूलना नहीं और धीरे धीरे से चलना।

यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा।

मुझे जाने दो।

शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा पानी माँग लिया करना। प्यास लगे तभी पानी पी लेना।

अगर आपको रात को उठना पड़े तो अंधेरे में कुछ लगे नहीं इसका ध्यान रखना।

मुझे जाने दो।

शादी के बाद हम बहुत प्यार से साथ रहे। परिवार में फूल जैसे बच्चे दिए। अब उस फूलों की सुगंध मुझे नहीं मिलेगी।

मुझे जाने दो।

'उठो सुबह हो गई' अब ऐसा कोई नहीं कहेगा। अब अपनेआप उठने की आदत डाल लेना किसी की प्रतीक्षा नहीं करना।

मुझे जाने दो।

और हाँ .... एक बात तुमसे छिपाई है, जिसके लिए मुझे माफ कर देना।

आपको बिना बताए बाजू की पोस्ट ऑफिस में बचत खाता खुलवाकर 14 लाख रुपये जमा किये हैं। मेरी मां ने सिखाया था। एक-एक रुपया जमा करके कोने में रख दिया। इसमें से पाँच - पाँच लाख बेटे और बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख रखना अपने लिए।

मुझे जाने दो।

भगवान की भक्ति और पूजा करना भूलना नही। अब फिर कभी नहीं मिलेंगे !!

मुझसे कोई भी और कैसी भी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।

 "मुझे जाने दो!"

 "मुझे जाने दो!"

#हर_बेटी_मेरी #Repost

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