सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

लिख दूँ पाती यादों के गलियारे से

 पुस्तक विवरण

 1. पुस्तक का नाम-लिख दूँ पाती यादों के गलियारे से।


पुस्तक आवरण

2. सम्पादक-डा. सूरज सिंह नेगी, डा. मीना सिरौला जी, श्री चन्द्रमोहन जी उपाध्याय।

3. पुस्तक समर्पण-स्व. श्री देवदत्त शर्मा, अजमेर (पाती मुहिम के मार्गदर्शक)। 

4. मन की बात-डा. सूरज सिंह नेगी (वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी, जयपुर)।

5. पत्र समीक्षक-शिवराज कुर्मी (संयोजक साहित्य मंच टोडारायसिंह)।

6. भाषा शैली- सुन्दर, स्पष्ट और सरल।

7. कुल समायोजित पत्र-90.

8. पृष्ठ आवरण-बहुत ही सुन्दर सफेद एवं केसरिया रंग युक्त कवर।

9. विशेषता-फ्लैप कवर पर चुनिंदा विशेष पत्रों के खास अंश।

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक 08

लेखक- श्री अवधेश पारीक (संवाददाता), राजस्थान पत्रिका, टोडारायसिंह

लेखक ने पत्र के माध्यम से अपने प्रिय मित्र को ऐतिहासिक नगरी, बीसलपुर बांध एवं प्राकृतिक छटा में पहाड़ी झरनों का भ्रमण करने के लिए सपरिवार आमंत्रित किया है।

लेखक ने लिखा है कि ऐतिहासिक नगरी टोडारायसिंह को ऐतिहासिक धरोहरों की खान कह दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस शहर में प्राचीन भव्य महल, विशाल पत्थरों से निर्मित वास्तुकला, शिल्पकला युक्त प्राचीन मंदिर, पर्वतों की प्राकृतिक छटा, वर्षाकाल में कल-कल करते मनोरम प्राकृतिक छटा युक्त झरने, प्राकृतिक झील बुद्ध सागर, हाडीरानी कुण्ड , बीसलपुर बांध आदि दर्शनीय स्थलों के बारे में उल्लेख किया है। 

लेखक  ने प्राचीन महलों के बीच कुण्ड में संगमरमर के 12 खम्भों से निर्मित बारहदरी जो चित्रकारी व मीनाकारी का अद्भुत संगम एवं सोलंकी शासकों की ओर से निर्मित महलों में लगे नौ हाथ के छज्जों का उल्लेख अपनी कलम से लिखा है। 

लेखक द्वारा समय समय पर ऐतिहासिक धरोहरों की खबरें चित्र सहित राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित की जाती हैं, ताकि युवा पीढ़ी को ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी मिल सके।

लेखक ने अपने पत्र में अनेक प्रसिद्ध बावडियों के बारे में जिक्र किया है; जैसे- हाडी रानी कुण्ड, किंगसी बावड़ी, महल बावड़ी, जगन्नाथ बावड़ी, भोपत बावड़ी, चोर बावड़ी,  सारडा बावड़ी, लाडपुरा बावड़ी आदि। 

लेखक ने खण्डहर होते महल, बावडियों, मन्दिरों पर चिंता भी प्रकट की है।  समय समय पर राजस्थान पत्रिका के जनसरोकार कार्य के तहत इन बावडियों, झीलों की साफ-सफाई का कार्य किया जाता है|

अन्त में लेखक ने युवा पीढ़ी से इन ऐतिहासिक धरोहरों की सार- सम्भाल करने के लिए प्रेरित किया है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...