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पुस्तक विमोचन (अपडेटेड १५.०७.२०२४)

भूमिका

पुस्तक विमोचन और गौरैया संरक्षण के संदर्भ में प्रस्तुत एक कार्यक्रम का विस्तृत विवरण।

विवरण

दादू पर्यावरण संस्थान रानीपुरा ( टोंक) एवं साहित्य मंच टोडारायसिंह जिला केकड़ी के तत्वावधान में राजकीय उच्चतर माध्यामिक विद्यालय बघेरा  में डा. सूरज सिंह नेगी (वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी, जयपुर)  की प्रेरणा से  विलुप्त होती बेजुबान गौरैया चिड़िया की पीड़ा को अन्तर्मन से जाना। दो वर्ष पूर्व विलुप्त होती गौरैया चिड़िया संरक्षण को लेकर पाती मुहिम के तहत 'गौरैया की पाती मानव के नाम'  शीर्षक से अखिल भारतीय स्तर की पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। उसके तहत बासठ चयनित पत्रों की पुस्तक प्रकाशित हुई। इस पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार भंवर सिंह, देवगांव मौजूद रहे। इनका पत्र भी इस पुस्तक में प्रकाशित हुआ था। स्कूली विद्यार्थियों के समक्ष मुख्य अतिथि द्वारा स्वयं का पत्र वाचन कर गौरैया संरक्षण के लिए  प्रेरित किया। साथ ही इनको भी 'गौरैया की पुकार', पुस्तक सप्रेम भेंट की गई। कार्यक्रम में शाला परिवार के शिक्षकगण, साहित्य मंच के संयोजक शिवराज कुर्मी एवं स्कूली विद्यार्थी मौजूद रहे।






दिनांक  १५.०७.२०२४
साहित्य मंच टोडारायसिंह के पदाधिकारियों ने जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्टर केकड़ी श्वेता चौहान से शिष्टाचार मुलाक़ात कर गौरैया संरक्षण आधारित पुस्तक "गौरैया की पुकार" सप्रेम भेंट कर विलुप्त होती गौरैया चिड़िया के बचाव सम्बंधित विस्तृत चर्चा की गई| इसके बाद हरियालों राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण पर चर्चा एवं पर्यावरण को बढ़ावा देने हेतु बीसलपुर रोड पर स्थित प्रसिद्ध लाडपुरा बालाजी धाम की पहाडियों मे सीड्स बाल फैक कर पौधरोपण की जानकारी दी। पर्यावरण के बचाव के लिए धरती को हरा भरा रखना जरूरी है, इसके लिए पर्यावरणविद अनूपमा तिवारी द्वारा पर्यावरण को बढ़ावा देने हेतु सीड्स बाल उपलब्ध करायी गयी| जिसकों महिलाओं द्वारा जंगल में फेंकी गई| ताकि वर्षा काल में बीज अंकुरित होकर पौधे बन सकेंगे| संयोजक शिवराज कुर्मी व प्रवक्ता आशीष विजयवर्गीय ने साहित्य मंच द्वारा की जाने गतिविधिया जैसे पक्षियों के लिए परिंडे़ बांधना, वृक्षारोपण, पाती लेखन सहित विभिन्न सामाजिक व नवाचार कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी, 
साहित्य मंच द्वारा आगामी कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजन पर चर्चा कर जिला कलेक्टर महोदय को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया| इस अवसर पर साहित्य मंच टोडारायसिंह के संयोजक शिवराज कुर्मी, प्रवक्ता आशीष विजयवर्गीय मौजूद रहे|
चित्रों के झरोखे से


बाबूलाल नायक (व्याख्याता) का प्रयास
(राजस्थान उच्च माध्यमिक विद्यालय खरेड़ा टोडारायसिंह टोंक राजस्थान)

🐤कहाँ खो गयी गौरैया?🐤

डाली-डाली नीम की खाली,
कहाँ खो गयी गौरैया?
चीं-चीं-चीं-चीं करती उड़ती,
भूरी-चितकबरी गौरैया।।
सूनी पड़ी अटारी मेरी,
दाना-पानी अटा पड़ा।💧
नीड़ पुराना बना बनाया,
छज्जों के नीचे सड़ा।।
मेरी थाली से आकर के,
चांवल के दाने चुनना।
अपने बच्चों की भी जाकर,
चीं-चीं-चीं-चीं भी सुनना।।
बंधा परिण्डा नीम की डाली,
तुझको आज पुकार रहा।
कब आओगी छूने मुझको,
मेरा अस्तित्व नहीं रहा।।
मैं आऊँगी उड़ती-उड़ती,
करने को विश्राम वहाँ।
बंद कर देना पंखे अपने,
जाऊँगी मैं जहाँ-जहाँ ।।
मेरे शत्रु है ये पंखे,
प्राण-पखेरू हर लेते।
नन्हें बच्चे भूखे-प्यासे,
सिसक-सिसक कर दम देते।।
डोर पतंग की धार तेज ये,
गर्दन हम सबकी काटे।
उलझ-उलझकर हम दम तोड़ें,
छा जाते है घोर सन्नाटे।।
रक्षा करना सब मिलकर के,
ऐसा प्रण तुम लेना आज।
तभी बचूँगी इस कलयुग में,
रखना सारे मिलकर लाज।।
      //●●●//

एक पत्र मानव के नाम
प्रिय मनु सन्दीप, 
वंदन आपके चरणों में 
ची-ची चू-चू ची-ची ,,,,इस आवाज को सुनकर शायद तुम मुझे पहचान गए होगे। हां, बिल्कुल, मैं तुम्हारे घर आंगन में रहने वाली एक नन्ही सी चिड़िया गौरैया ही हूँ। 
मैं देख रही हूँ कि बड़ी प्रगति कर ली आप मानवों ने। बड़े बड़े घर,
भौतिकता से भरे पूरे साजो-सामान, शीशे के चमकदार खिड़की दरवाजे और भी न जाने क्या-क्या सुख-सुविधाएं। जरूरी भी है यह सब आप मनुष्यों के जीवन के लिए ।
 शायद तुम्हे याद होगा जब आप छोटे थे घुटनो के बल चलते थे , तब मेरी परदादी गौरेया आपके घर आंगन में दरवाजे के ऊपर वाली ताक (मेडा ) में घोसला बनाकर रहती थी । दिनभर मेरी परदादी यहां वहां आंगन में इधर से उधर फुदकती रहती थी और आप उसे देख देखकर खुश होते हुए घुटनो के बल सरपट दौड़ते हुए उसे पकड़ लेने की कई-कई असफल कोशिशें करते रहते थे । यह खेल दिनभर में न जाने कितनी ही बार चलता रहता था । मगर मैं आज तुम्हें अपना दुख दर्द सुनाना चाहती हूं ।आपकी इस भौतिकता वादी दुनिया ने हमारे अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है ।आपने अपनी सुख-सुविधाओं के लिए बड़े-बड़े शीशे की खिड़कियों वाले घर बना लिए हैं जिससे अब हमारा उन घरों में आना-जाना दूभर हो गया है । आपके पूर्वज पहले कच्चे घरों में रहते थे , जिससे हमारी कई पीढ़ियां उन घरों में आसानी से आटी जाती रहती थीं और कहीं भी अपना घोंसला बना लिया करती थी ।
जिससे हमारा जीवन सर्दी, गर्मी, बरसात सभी तरह की मौसमी घटनाओं से सुरक्षित था । मगर अब जिन पेड़ों पर हम अपना घोंसला बनाती थी ना वह पेड़ रहे और ना आपके मकान में है हमें आने की स्वतंत्रता । क्योंकि आपलोगो को एक ही डर सताए रहता है कि तिनके-तिनके लाकर हम कहीं आपके घर को गंदा ना कर दे । हमारी विष्ठा(बीट) से आपके घर आंगन में लगे मार्बल, टाइल्स ,स्टोंस मेला-कुचिला ना हो जाए । इसी कारण चौतरफा शीशे के खिड़की दरवाजों से बंद आपके मकान , आपके घर में हमारा आना जाना बंद हो गया है । बाहर के पर्यावरण में हमारे रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं बचा है । जिससे हमारा जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है और धीरे-धीरे हमारी संख्याएं भी कम होती जा रही है । मगर आप खुद अपने कृत्यों पर नजर डालें तो पाएंगे कि एक दिन में आप कितना कचरा इस धरती पर फैला देते हैं । उसका आप मनुष्य को कोई अफसोस नहीं है और हम अपना नीड बनाने के लिए जब एक तिनका भी आपके घर आंगन में गिरा देते हैं तो आप क्रोधाग्नि में जल उठते हैं और आपकी गृहिणीया झाड़ू लेकर हमें यहां वहां दौड़ती फिरती है और कभी आंख बचाकर अगर हम अपना घोसला बना भी लेती हैं तो यदा-कदा आप अपने मकानों की सफाई करके उस घोसले को बाहर सड़क पर फेंक देते हो । जरा सोचो कि उस वक्त हमारे दिल पर क्या बीतती होगी ।कितनी मेहनत से हम तीनका लाकर अपना घर बनाते हैं और आप उसे एक पल भर में कचरे के ढेर में फेंक देते हो । आप ही बताओ अब हम रहे तो कहां रहे । ना प्रकृति में हमारे लिए कोई स्थान बचा है और ना ही अब आप मनुषयो के घर में हमारे लिए कोई जगह बची है । कुछ मानवीयता बची है तो उन लोगों में जो अपने घरों में या आसपास हमारे रहने के लिए कृत्रिम चिड़िया घर बना करके दे रहे है । परिंडा अभियान चलाकर के हमारे लिए पेड़ों पर परिंडे बांधे जा रहे हैं । धन्य है कुछ ऐसे मानव भी जिन्हें हमारे लिए या हमारे जीवन की सुरक्षा के लिए इस तरह के अभियान चलाए हैं । आप भी उन्हीं इंसानियत का पालन करने वाली में से हो जिन्होंने हमारी संरक्षण के लिए अपने घर में हमें स्थान दिया है । मगर आपकी मनुष्य जाति के बहुत से इंसान ऐसे भी हैं जिन्हें हम फूटी आंख भी नहीं सुहाते और हमारे रहवासो को उजाड़ कर के रख देते हैं । इस धरती के समस्त प्राणी जगत में आप मनुष्य ही तो हमारे संरक्षक हैं ।हमारी रक्षा का उत्तरदायित्व आप पर ही निर्भर है । इसलिए मैं आप सभी से पुनः निवेदन करना चाहती हूं कि हमारी आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व बचा रहे और हम भी चिरकाल तक इस धरती के अंग बने रहे , तो हमारे संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करते रहे । हमें अपने घर आंगन में रहने के लिए एक छोटा सा कोना जरूर दें । जिससे सर्दी, गर्मी ,बरसात के मौसम से सुरक्षित रह सके । अगर आप ऐसा करते हैं तो आप हमारे लिए भगवान के समान है । हम आपके लिए आप हमारे लिए यही तो जीवन का मूल मंत्र है । असहाय,कमजोर एवम अबोध प्राणियों की रक्षा करना यही तो मानव धर्म है । बस मैं इतना ही कहना चाहती हूं कि आप एक प्रण ले कि आपकी वजह से हमारा अस्तित्व खतरे में नही पड़े और यह शिक्षा आप अपनी सन्तति को भी देकर जाए । जिससे उन्हें भी अपने कर्तव्य बोध का भान रहे । बस मैं इतना ही कहना चाहती हूँ , अंत में ,मैं पुनः अपना गीत सुना कर पाती समाप्त करती हूँ 
ची-ची ,चू-चू ,ची-ची-ची, चू-चू,ची-
ची । फुर्ररर,,फुर्ररर 

        आपके घर आंगन की एक नन्ही        
                   गौरैया चिड़िया

लेखक : सन्दीप कुमार जैन
प्रबोधक L-1
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ,सरदारपुरा ब्लॉक उनियारा जिला टोंक (राज )

प्रस्तुति





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