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होनहार बालक की रचनाएं जैसे उसके पदचिन्ह

शिविरा का विवरण

राजस्थान सरकार के माध्यमिक शिक्षा विभाग, बीकानेर से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका शिविरा का अध्ययन करने के लिए उसकी पीडीएफ़ डाउनलोड भी की जा सकती है। इस पत्रिका में शिक्षा विभाग से जुड़े मासिक आदेश, परिपत्र, दिशा-निर्देश, साहित्यकारों, शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों के आलेख, नवाचार, और शैक्षिक चिंतन से जुड़ी रचनाएं प्रकाशित होती हैं।



बालक गिर्राज

अप्रैल 2024 की राज्य स्तरीय शिविरा पत्रिका जो माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर से प्रकाशित होती है। उसमें बालक गिर्राज की कविता प्रकाशित हुई है, जो इस प्रकार है -
'शहीद के लिए'

कविता

जो खुद के लिए रोता है।

वह खुदगर्ज होता है।।

जो भगवान के आगे रोता है।

वह भक्त होता है ।।

जिसके शहीद होने पर सारा देश रोता है

वह देशभक्त होता है ।।

अपनी जिन्दगी तो हर कोई जीता मरता है।

पर जो देश के लिए जीता है।

वह कभी नहीं मरता है ।।

वह तो अमर होता है।

शहीद की शहादत की जब चर्चे चल पड़ते हैं।

तो आँखों से आँसु निकल पड़ते हैं।

अरे दुनियाँ वालों मेरे आँखों से निकलता है।

वह पानी नहीं है।

यह तो मेरे दिल का दर्द है।

जो देश के लिए शहीद हुए है।

उन्हें गिर्राज कोटी-कोटी नमन करता है।
प्रेरक प्रसंग

असंभव कुछ भी नहीं


इस दुनिया में इंसान के लिए असंभव केवल मरने के बाद जिंदा करना ही है, बाकी और कोई भी कार्य असंभव नहीं है।

इंसान अगर किसी चीज की चाहत रखता है, तो वह उसे जरूर पाता है। बस उसको अपनी चाहत में मेहनत को शामिल करना जरूरी होता है। किसी ने बिल्कुल ठीक कहा है जहाँ चाह, वहाँ राह है। यदि इंसान किसी चीज को पाने के लिए दृढ़ संकल्प कर ले तो फिर उसके लिए इस धरती पर कुछ भी असंभव नहीं के होता है।

ऐसे हजारों उदाहरण हमें देखने व सुनने को मिलते हैं। जिन लोगों ने अपनी इस ऊर्जा को पहचाना है, उन्होंने कई इतिहास रचे हैं।

साथ ही वे दूसरों के लिए प्रेरणा के स्रोत भी बने हैं। उनके कार्य को देखकर लोग कहते हैं चूंकि वह तो किस्मत वाला था। पर यह सही बात नहीं है। आप देखोगे जितने भी लोग शक्तिशाली हुए हैं। उन्होंने सबसे पहले अपने मन की शक्ति को पहचाना है जैसे स्वामी विवेकानंद, महात्मा गाँधी, नरेंद्र मोदी जी आदि। ये सब इतने सफल और शक्तिशाली बने हैं कि दुनिया के हर ताकत इनके सामने छोटी लगती है। इन महान व्यक्तियों द्वारा असंभव कार्य को संभव किया गया है। हम सच जानते हैं कि ब्रिटेन के महान ओलंपिक कोच हैरी एड्रिउस ने कहा था कि एक मील की दौड़ को चार मिनट से पहले पूरी करना असंभव है। कई धावकों को यह बात असंभव ही लग रही थी। पर दुनिया में कोई कार्य असंभव नहीं है यह साबित कर दिखाया सन 1954 में रॉजर बैनिस्टन ने एक मील की दौड़ को 3 मिनट 59.4 सैकण्ड में पूरा करके विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया था। इसके दस साल बाद एक स्कूल के बच्चे ने एक मील की दौड़ को 3 मिनट 59 सैकण्ड में पूरी करके दुनिया के सामने ब्रिटेन के महान ओलंपिक कोच के द्वारा बताए गए असंभव कार्य को एक बार फिर संभव कर दिखाया।

इसी प्रकार सचिन तेंदुलकर से पहले यह सोचा जाता था कि कोई भी खिलाड़ी एक दिवसीय क्रिकेट प्रतियोगिता में डबल शतक नहीं बना सकता है। यह असंभव था लेकिन असंभव को संभव करके सचिन ने दिखा दिया। यही नहीं सिर्फ डाई सी मैच के बाद ही वीरेंद्र सहवाग ने भी डबल शतक लगा दिया और उसके बाद तो कई खिलाड़ियों ने शतक लगाए हैं।

एक उदाहरण रविंद्र जैन का भी है जो कि बचपन से दोनों आँखों से देख नहीं सकते थे। उन्होंने बिना कुछ प्रकृति को देखे ही ऐसी-ऐसी कल्पनाएँ कि जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते हैं। उन्होंने हमारे देश के सबसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिक 'रामायण' को संगीत दिया, जिसके टेलीविजन पर शुरू होते ही सब लोग अपना काम-धाम छोड़कर उसे देखने के लिए टेलीविजन सैट की ओर दौड़ पड़ते थे। लोग उसे देखने के लिए सप्ताह भर बड़ी बेसब्री से इंतजार करते थे। उस सीरियल रामायण के प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन ही थे। जिन्होंने जन्मांध होने के बावजूद भी असंभव कार्य को संभव करके दिखाया।

इंसान के चाहने पर हर असंभव कार्य को संभव बनाया जा सकता है।

उपर्युक्त उदाहरणों से हम यह बात समझ सकते हैं कि दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं होता है, इसमें केवल महत्त्वपूर्ण है व्यक्ति कि दृढ़ इच्छाशक्ति। जब-जब भी व्यक्ति ने प्रयत्न किए, कोशिश की तो उसने असंभव को भी संभव करके दिखाया ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा का कार्य भी किया है।

जिससे उसके बाद बहुत सारे व्यक्तियों ने उस काम को लगातार आगे बढ़ाया है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
गिर्राज
कक्षा 8
शारदा माध्यमिक विद्यालय, बनेठा,
तहसील-उनियारा,
जिला-टोंक (राज.)-304024
बालक गिर्राज की ये रचनाएं ही प्रकाशन उपरांत उसका हौसला बढ़ाती हैं और लेखन के लिए उसको प्रेरित करती हैं।
शुभकामनाएं





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