सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता के विचार (अपडेटेड)

आयोजन

चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में विश्वविद्यालय का 22वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को मनाया गया। इस दौरान कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक मौजूद रहे। वहीं बतौर मुख्य अतिथि नई दिल्ली स्थित जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट के चीफ ऑफ स्ट्रेटजी एंड एचआर सरदार हरभजन सिंह  एवं  ग्रामीण विकास मंत्रालय के पूर्व निदेशक डॉ. महिपाल विश्वविद्यालय पहुंचे। 

निमंत्रण


मुख्य वक्ता
सीडीएलयू के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूम में बोलते हुए मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेवलेपमेंट के पूर्व निदेशक डॉ महिपाल ने भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल जी के जीवन की उपलब्धियों एवं वर्तमान परिपेक्ष्य में उनकी विचारधारा की
प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए बताया कि "किस प्रकार शोध के क्षेत्र में उच्चतर शिक्षण संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शोध का अर्थ केवल अकादमिक जगत को फायदा पहुंचाना भर नहीं होता बल्कि समाज हित को केंद्र में रखते हुए भी शोध विषयों का चयन किया जाना समय की मांग है। उन्होंने संचार व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की और कहा कि अपनी बात को बेहतर तरीके से रखकर विद्यार्थी जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छू सकते हैं।" इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। 
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने की और कहा कि विश्वविद्यालय अपने उच्चतर शिक्षा के विभिन्न मानदंडों की प्राप्ति की दिशा में नित नये प्रयास कर रहा है और यहां के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोह्य अकादमिक, शिक्षा, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में मनवा रहे हैं। इस अवसर पर डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. सुरेश गहलावत ने भी अपने विचार रखे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ राजेश कुमार बंसल ने मेहमानों का स्वागत किया, जबकि धन्यवाद युवा कल्याण निदेशक डॉ. मंजू नेहरा द्वारा किया गया। मंच का संचालन प्रो. कासिफ किदवई द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए योगदान देने वाले कर्मचारियों की हौसला अफजाई भी की गई।

मुख्य अतिथि की टिप्पणी
Dr Mahipal, Sir! Meeting you in today's event was a pleasure. Your illustrious career and indepth knowledge of the subject was highly impressive. Will be in touch. Regards Harbhajan

प्रस्तुति







टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...