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वर्ष 2022 के पद्मश्री ओमप्रकाश गांधी जी से बातचीत

 परिचय

नारी शिक्षा व समाज के उत्थान के लिए कार्य करने पर प्रो. ओमप्रकाश गांधी को वर्ष 2022 में राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जहां ओमप्रकाश गांधी के साथ उनके भाई मनीराम जी व परिवार के अन्य लोग भी पहुंचे। 


बातचीत

संपादक जी, आपके प्रश्नों को अपनी बुद्धि से जैसा मैंने समझा है आपको मैं उत्तर दे रहा हूँ। ध्यान रहे कि मैं विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ मनोविज्ञान मेरा विषय नहीं है।

प्रश्न 1. पद्मश्री सम्मान के उपरांत की भाव अनुभूति क्या रही? उसके बाद क्या आपने दिनचर्या में कोई अंतर महसूस किया?

उत्तर-"पद्मश्री सम्मान के माध्यम से भारत सरकार ने मेरे द्वारा किए गए सामाजिक कार्य को मान्यता दी है। इस से समाज के प्रति मेरे समर्पण भाव को बल मिला है। यद्यपि मैं जैसा पहले था अब भी वैसा ही हूँ तथापि मेरे विश्वास भाव की वृद्धि अवश्य हुई है। दिनचर्या में कोई अंतर नहीं आया है।"

प्रश्न 2. हमारी भावनाएं किस भाव-भूमि पर अंकुरित होती हैं और आपकी दृष्टि में उनका आधार क्या है?

उत्तर-"हमारी भावनाएँ जन्मजात, पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा-दीक्षा, संगति, खानपान, स्वाध्याय पर अंकुरित होती हैं जिनका आधार समाज होता है।"

प्रश्न 3. "भाव और अनुभूति व्यक्ति से समाज की ओर विस्तार पाती है।" आपका क्या मत है?

उत्तर - "मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। निश्चय ही मनुष्य के भाव और अनुभूति व्यक्ति या स्वयं से समाज की ओर विस्तार पाती हैं। पशुओं में ऐसा नहीं होता।"

प्रश्न 4. स्पष्ट कीजिये कि भावनाएं मानवीय व्यवहार की संचालक शक्ति हैं?

उत्तर - "मनुष्य का शरीर, मन बुद्धि तथा भावनाओं का केन्द्र हृदय ही किसी भी मानवीय व्यवहार के संचालन में हेतु है। मनुष्य मन, बुद्धि तथा शरीर भावना से प्रेरित होकर ही अच्छा या फिर बुरा व्यवहार करता है। निश्चय ही भावनाएँ मानवीय व्यवहार की संचालक शक्ति हैं।'

प्रश्न 5. क्या भाव अनुभूतियाँ सामाजिक समस्याओं का कारण और निवारण दोनों ही हैं? समझाइए।

उत्तर-"समाज में अच्छे-बुरे कार्य व्यक्तियों के अच्छे बुरे भावों से ही सम्पन्न होते हैं। बुरे भाव ही समस्याओं का कारण हैं तथा अच्छे भावों से ही समस्याओं का निवारण होता है।"

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