सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

वार्षिक परीक्षा परिणाम और संस्कृति ज्ञान परीक्षा का सम्मिलित समारोह आयोजित

अवसर

शैक्षिक सत्र के अंतिम दिन कंकरखेड़ा स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में विद्यार्थियों का वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। साथ ही इस अवसर पर नवंबर माह में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार द्वारा आयोजित 'भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा' के परिणाम भी घोषित किए गए तथा सफल विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

समारोह का विवरण

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री के.के. पांडे ने अपने उदबोधन में कहा कि सभी विद्यार्थियों ने प्रत्येक कक्षा में आशानुरूप प्रदर्शन किया है जिसका परिणाम उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश के तौर पर मिला है। मैं सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देता हूं तथा जो विद्यार्थी इन परीक्षाओं में किसी कारणवश सफल नहीं हो सके हैं उनका आह्वान करता हूं कि  वो निराश कतई भी ना हों और यह जान लें कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफल होने का एकमात्र संदेश कड़ी मेहनत ही है। यदि वो ऐसा करेंगे तो कोई कारण नहीं कि वे अगले वर्ष सफल विद्यार्थियों में अपना स्थान न बना पाएं। मैं सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।

इसके बाद गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि अंग्रेजी प्रवक्ता श्री सुनील कुमार शर्मा व वाग्देवी साहित्यिक संस्था के सचिव संगीत शर्मा ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में सम्मिलित सभी छात्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए।

श्री सुनील शर्मा ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि यह परीक्षा विद्यालय, जिला और राज्य स्तर पर कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इसमें सम्मिलित होने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये जाते हैं तथा विद्यालय स्तर पर अपनी कक्षा में प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को क्रमशः स्वर्ण पदक एवं रजत पदक से सम्मानित किया जाता है। 

जिन विद्यार्थियों ने जिला स्तर पर प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया है उन्हें विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता है। राज्य स्तर पर प्रथम आने वाले विद्यार्थियों को ₹300 की छात्रवृत्ति 10 माह तक लगातार प्रदान की जाती है कक्षा 12 में राज्य स्तर पर प्रथम आने वाले विद्यार्थी को देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।

वाग्देवी संस्था के सचिव संगीत शर्मा ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा कि उनकी संस्था द्वारा किशोर वय के विद्यार्थियों के बीच पुस्तकों की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सतसाहित्य के प्रचार, प्रसार एवं संवर्धन के लिए भरपूर प्रयास किया जा रहे हैं। इस हेतु विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित साहित्य एवं अन्य युग मनीषी तथा क्रांतिकारी लेखकों की पुस्तकेें विद्यालय को भेंट की जाती हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य श्री पांडे जी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया तथा सूक्ष्म जलपान के उपरांत कार्यक्रम समाप्त घोषित कर दिया गया।









प्रस्तुति




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"मां की गोद से ऊंचाइयों तक — गिरिराज की आत्मकथा"

  मां की गोद से ऊंचाइयों तक  गिरिराज की आत्मकथा "मां की ही वह गोद है, जहां मानवता पले, अगर कहीं है जन्नत तो उसके आंचल के तले..."   यह पंक्ति मेरे जीवन का सार है — मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरी दिशा।   जब मैं पांच साल का था, तभी पिता जी — भंवरलाल गुर्जर — हमें छोड़कर चले गए। मां, मोती देवी, उस समय केवल 26 वर्ष की थीं। उस उम्र में जब जीवन शुरू होता है, उन्होंने अपना पूरा जीवन मेरे भविष्य के नाम कर दिया। मजदूरी करते हुए उन्होंने न केवल मुझे पाला, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि शिक्षा ही वह कुंजी है जो हर ताला खोल सकती है।   मां कहा करती थीं — "बेटा, गरीबी इंसान की हालत बदल सकती है, इरादा नहीं। मेहनत और ईमानदारी ही सबसे बड़ी पूंजी है।"  यह वाक्य मेरे जीवन का संबल बन गया।   लुहारा के सरकारी विद्यालय से मैंने पहली से आठवीं तक की पढ़ाई की। माध्यमिक शिक्षा मुंडिया से और उच्च माध्यमिक निवाई के राजकीय विद्यालय से प्राप्त की — जहां से मैंने 1994–95 में 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई जयपुर के राजस्थान कॉलेज से की, जहां 1...

દીપક પંડ્યા (ગાંધીનગર) - Updated 04.06.2026

મારી ભાવયાત્રા 64 નમસ્કાર … સ્નેહવંદન ! માનવ જીવનની આખીય દોડ પાછળ જો કોઈ એક જ આકાંક્ષા છુપાયેલી હોય, તો તે છે 'ખુશી'. સવારથી સાંજ સુધી માણસ જે કંઈ પણ કરે છે—પૈસા કમાય છે, સત્તા મેળવે છે, સંબંધો બાંધે છે—એ બધાની પાછળનો અંતિમ ઉદ્દેશ્ય માત્રને માત્ર સુખ અને આનંદની પ્રાપ્તિ જ હોય છે. પરંતુ આજના ભૌતિકવાદી યુગમાં માણસ ખુશીની વ્યાખ્યા ભૂલી ગયો છે. તે વિચારે છે કે મેળવવામાં, સંગ્રહ કરવામાં કે અન્ય પાસે અપેક્ષા રાખવામાં ખુશી છે. પણ સત્ય એનાથી તદ્દન વિપરીત છે. સાચી ખુશી આપવામાં છે, લેવા કે માંગવામાં નથી. આ સૃષ્ટિનો અપરંપાર નિયમ છે કે ખુશીની આપણે જેટલી લહાણી કરીશું, તેટલી જ તે આપણી પાસે વ્યાજ સાથે પાછી આવશે. જરા ઊંડાણથી વિચારીએ તો સમજાશે કે 'લેવું' અને 'માંગવું' એ ભિખારીપણું છે, જ્યારે 'આપવું' એ ખુદ અમીરી છે. જ્યારે આપણે કોઈની પાસે કંઈક માંગીએ છીએ, પછી ભલે તે વસ્તુ હોય, પ્રેમ હોય કે આદર હોય, ત્યારે આપણે આપણી જાતને ખાલી અનુભવીએ છીએ. માંગવામાં હંમેશા અપેક્ષા અને પરવશતા હોય છે. અને જ્યાં અપેક્ષાઓનો પહાડ હોય, ત્યાં ક્યારેય સાચો આનંદ હોઈ શકે નહીં. કારણ કે અપેક્ષા હંમેશા...

मन की बातें भाव भरी

🙏🌹🌹❤️❤️🙏 शुभ प्रभात जी🙏🌹❤️🙏 आपका दिन मंगलमय हो। ईश्वर आपकी हर मंगलकामना पूर्ण करें— वह जो हारे का सहारा है, जो टिमटिमाता जुगनू भी है और अथाह ऊर्जा से भरा तारा भी। जो घोर तिमिर में प्रकाश बनकर उभरता है, और उजाले में भी दिन को बहार देता है। वह जो आकार–निराकार दोनों रूपों में दुष्टों का संहारक है, जो दिशाहीन के लिए दिशासूचक यंत्र का पारा बन जाता है। जो निर्धन के दुःख–दरिद्रता का अंत है, और धनी के लिए पौ-बराहा। जिसके हम भी हैं और जो हमारा भी है। जो भूखे के लिए अन्न है और पशुओं के लिए चारा, जो पत्थर, पहाड़ और समूची धरा का आधार है। 🌹 वह सबका भला करें🌹 🙏🌹🌹❤️❤️🙏 आज का विचार मेरी पुस्तक “हृदय उद्गार” से एक कविता — सर्व धर्म समभाव छिन्न-भिन्न सा हृदय मेरा, मन में तूफानी कोलाहल है। सभ्यता के शिखर पर पहुँचकर, धर्म बना क्यों क्रूर दावानल है? भूमि वही, आकाश वही, तुझमें वही, मुझमें वही। एक-सा ही सबका आंचल है, धरती माँ का पावन आँचल है। रक्त-कोष में बहता एक ही बल है, कहीं केसरिया, कहीं हरित दल है। आब पियो या पानी पियो, जल तो आखिर एक ही जल है। यह कैसा आया भेद-रूपी पल है? भिन्न-भिन्न नामों म...