कुछ विलंब से प्रस्तुत किया जा रहा लेकिन इसके भाव खो जाने को उद्यत करते हैं।
भारत देश विश्व भर में अपनी विविधता के लिए जाना जाता है। यहां पर प्रत्येक त्योहार किसी उत्सव से कम नहीं होता और प्रत्येक त्योहार में जनता की सहभागिता अत्यंत मनोहारी होती है। होली भी एक ऐसा ही पर्व है जिस पर तरंगित हो टोंक राजस्थान के शिक्षक श्री हंसराज हंस ने प्रस्तुत कविता की रचना कर दी। आप भी इसका आनंद लें।
अबकी बार रंगों की फुहार में,
जमकर खेलेंगे मस्ती की होली।
परिवार के साथ भी बनेंगे,
हम एक-दूसरे के हमजोली।
रंगों की फुहार भी होगी,
और होगा गीत-संगीत।
परिवारजनों में इससे बढ़ेगी,
आपस में मोहब्बत और प्रीत।
रंग गुलाल से हो सरोबार,
खुश हो जायेगा परिवार।
पुराने गीतों की भी आएगी,
इस होली पर जोरदार बहार।
खूब मस्ती भी होगी,
सबके निकलेंगे गूब्बार।
त्यौहार हमें सिखाते है,
मिल झुल कर रहना हर बार।
हमारी कई युगों से चल,
रही है सनातन संस्कृति।
किसी से भी नहीं डरेंगे,
जिंदा रखेंगे हमारी संस्कृति।
होली में ढोल मंजीरे व चंग।
सब बरसायेगें खूब रंग।
मिलना झुलना भी होगा,
ठंडाई भी घूटेगी सबके संग।
पिचकारी से होगी मस्ती,
जब तक सूरज ना हो अस्त।
देख हमारी त्यौहारों की
दीवानगी भी हो जायेगी पस्त।
हंसराज हंस
टोंक (राजस्थान)


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