शिक्षक श्री हंसराज जी हंस ने साझा की हैं जीवन की वो अनुभूतियां जो उनको आज भी बरबस अपनी सर्वाधिक स्नेह देने वाली नानी जी का स्मरण करा देती हैं। साथियों! आप भी महसूस कीजिए ऐसे पलों को जो लगभग प्रत्येक इंसान के जीवन में आते हैं।
आज मुझे मेरा,
बचपन याद आया।
बचपन में नानी का,
प्यार यकायक याद आया।
नानी हमें खूब,
देती थी खाने को।
भूल नहीं सकते हम,
नदी में नहाने को।
घी भरकर रोटी देना,
मक्खन मिश्री खिलाना।
कभी नहीं भूलती थी,
शाम को गर्म दूध पिलाना।
नानी को देखकर ही,
हमने लाड-प्यार सीखा।
समय का पालन करना,
बड़ों का आदर-सम्मान सीखा।
नानी के दिए गए संस्कार,
हमारे जीने के हैं आधार।
आज नानी तो नहीं हैं,
पर आदर्श हमारे शिरोधार्।
ननिहाल में खेले खेल,
खेतों में गाए गीत।
यह सब बनी है हमारी थाती,
खूब याद आते हैं पुराने मीत।
नानी के घर का वह पेड़,
अब भी याद आता है।
जिस पर मिनटों में चढ़ना,
आज भी याद आता है।
वह पहाड़ी का मंदिर,
शाम को जाते थे सब वहां।
मस्ती से करते थे सब आरती,
पर अब वह सब बातें कहां?
ईश्वर से यही प्रार्थना,
अरदास और कामना।
मेरे जैसी नानी सबको मिले,
यही है मेरी मनोकामना।
नानी को शत शत नमन,
भावभीनी श्रद्धांजलि।
उनकी ममता व प्रेम को,
ढेर सारी सादराजंली।
नानी का प्यारा
हंसराज 'हंस'
टोंक (राजस्थान)




बहुत बहुत धन्यवाद आभार आदरणीय।
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