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गौरैया की पुकार (अपडेटेड 10.05.2024)

पुस्तक विवरण

पुस्तक का नाम - गौरैया की पुकार

सम्पादकगण - डा. सूरज सिंह नेगी, डा. मीना सिरोला जी, श्री चन्द्र मोहन जी उपाध्याय

प्रेरणादायी संदेश - मारिय शाईन ए, उप वन संरक्षक, टोंक

श्री देवेंद्र कुमार भारद्वाज, अध्यक्ष श्री दादू पर्यावरण संस्थान रानीपुरा टोंक

मन की बात - डा. सूरज सिंह नेगी, वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी, जयपुर

पत्र समीक्षक - शिवराज कुर्मी, संयोजक साहित्य मंच टोडारायसिंह

भाषा शैली - सुन्दर, स्पष्ट, सरल

संकलित कुल पत्र - 62

पृष्ठ आवरण - चम्पा की टहनी पर आकर्षित करने वाली गौरैया का चित्र, खूबसूरत रंगीन आसमान।

पत्र विवरण

पत्र क्रमांक - 58

बाल साहित्यकार छात्रा सपना धाकड़ (कक्षा 12)

श्री दिगम्बर जैन सन्मति सागर उ. मा. विद्यालय, टोडारायसिंह जिला केकड़ी

बाल लेखिका रचित पाठ्य              

बाल लेखिका ने पत्र में गौरैया चिड़िया को राम्या के नाम से सम्बोधित किया है। एक जमाना था जब चीं, चीं आवाज सबको अच्छी लगती थी, लेकिन आज का मानव इसे शोर-शराबा मानने लगा है।

बाल लेखिका ने चिंता व्यक्त की है कि मैंने आपके घर में घोंसला बनाया और मेरे बच्चे बडे़ हुए।  खेलने के लिए बाहर चले गए। घर की गृहिणी कांच की खिड़कियों को बन्द कर बाहर चली गई। अब मेरे बच्चे अन्दर किस प्रकार से आ सकेंगे? अबोध बच्चों को यह ज्ञान नहीं कि खिड़कियों के कांच लगे हैं। उनको अपनी माँ दिखाई दे रही है। कांच के चोंच मार-मार कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेते हैं।अतः हमारे लिए हमेशा खिड़कियों को खुला छोड़ें।

चीन व ब्रिटेन जैसी  जगहों पर तो मैं विलुप्त हो चुकी हूँ, लेकिन मेरे संरक्षण हेतु अनेक संस्थाओं ने, 'गौरैया संरक्षण- एक पहल'  जैसे अभियान चला रखे हैं। यही नहीं 20 मार्च को गौरैया दिवस भी मनाया जाता है।

बाल लेखिका ने ध्यानाकर्षण करते हुए बताया है कि मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग की डोर से  बच्चों की जान चली जाती है। तब मै बहुत दुखी होती हूँ। अतः सुबह- शाम पतंग न उडाने के लिए प्रेरित किया है।

हमारे बुजुर्ग प्रतिदिन अपनी छत या आसपास पक्षियों के लिए चुग्गा डालने जाते थे, लेकिन आज के बच्चे चुग्गा डालना भूल चुके। उनके मम्मी-पापा ऐसे परोपकारी संस्कार ही नहीं दे रहे हैं। 

अन्त में बाल लेखिका ने अपने अंदर के जोश को एक बार पुनः उजागर कर नन्ही सी गौरैया चिड़िया को इस दुनिया में लाने का भरसक प्रयत्न करने के लिए प्रेरित किया है। मेरी तो यही कामना है कि तुम ऐसा ही प्रयास करोगे।

सूचना प्रदाता - श्री हंसराज हंस जी, टोंक (राजस्थान)

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक-04

वरिष्ठ साहित्यकारा एवं संवेदनशील शिक्षिका श्रीमति आशा जी शर्मा अंशु, जयपुर

पत्र में लेखिका ने अपनेआप को गौरैया चिड़िया की भावुक सखी लिखा है। अपने पत्र में नानी के मुख से मेरी चिड़िया पुकारना अच्छा लगता है। लेखिका को उड़ना-फुदकना नहीं आता, लेकिन कलम चलाना आता है। 

इसी को मद्देनजर रखते हुए लेखिका ने विलुप्त होती गौरैया की चिंता को अपने शब्दों में व्यक्त किया है। कंक्रीट के बेतहाशा उगते जंगल ने हमारे सुख-चैन-उम्र को कम कर दिया है। ना धान के खेत हैं और ना ही चुग्गा चुगने को छत, मुंडेर या दालान।

दु:खी पीड़ित गौरैया संवेदनशील शिक्षिका से कह रही है कि मेरी वेदना को समाज, देश, दुनिया तक प्रसारित करो। मुझे आप पर भरोसा है। मैं विश्व की सबसे अधिक आबादी वाली पक्षी हूँ, लेकिन अब संख्या लगातार घट रही है। शहरीकरण, प्रदूषण और मशीनीकरण के कारण मेरी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है।

पत्र में भावुक लेखिका ने नासिक निवासी भाई मोहम्मद दिलावर के प्रयास से गौरैया संरक्षण मंच, नेचर फार सोसायटी, बनाया है व इसका उल्लेख किया है। इसके साथ ही पक्षी विज्ञान के जनक गौतम ऋषि के अनुसार घर के वास्तुदोष को समाप्त करता है मेरा घोंसला बनाना।

संवेदनशील लेखिका ने पत्र के माध्यम से आने वाली पीढ़ी को सचेत किया है। गौरैया के संरक्षण हेतु छत पर चुग्गा, पानी रखें, अत्यधिक पौधारोपण करें, पेड़ों को नहीं काटें, घोंसले बनाकर उचित स्थानों पर लगायें। 

अन्त में गौरैया संरक्षण के क्षेत्र में अनेक संस्थान के प्रेरणादायी कार्यों का उल्लेख किया है। जो गौरैया प्रजाति को बचाने के लिए कटिबद्ध है।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक-19

वरिष्ठ साहित्यकारा श्रीमति नीलम सपना शर्मा, जयपुर (राजस्थान)

लेखिका ने पत्र के माध्यम से विलुप्त होती पत्र विधा एवं गौरैया चिड़िया को पुनः जागरूक किया है। गौरैया चिड़िया की प्रातःकालीन चहचहाहट को अपने शब्दों में बयां किया है। लेखिका ने पत्र में विशेष बात लिखी है कि भीषण गर्मी में बरामदे में लगे पंखे में गौरैया चिड़िया ने अपना घोंसला बना लिया था। तब आपने अपना पंखा नहीं चलाया जब तक गौरैया के बच्चे बडे़ होकर उड़ नहीं गये। कितनी प्रेरणादायी सीख दी है आपने। अपनत्व की ऐसी भावना को नमन।

लेखिका ने कृत्रिम घोंसले बनाकर अपने घर या आसपास लगाने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही दाना-पानी की व्यवस्था करने को कहा है। अत्यधिक पौधारोपण पर बल दिया है।

कच्चे घरों को पक्के घरों से बेहतरीन बताया है। फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआं पक्षियों के लिए हानिकारक बताया है।

सर्दी के मौसम में आसमान में उड़ रही पतंगें गौरैया के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। इससे गौरैया चिड़िया की जनसंख्या में वृद्धि कम हो रही है।

अन्त में लेखिका ने गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए मानव जाति से प्रार्थना की है।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक-19

बाल लेखिका - कृतिका जोशी, कक्षा- 11

स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, निवाई जिला टोंक (राजस्थान)

बाल लेखिका ने अपने पत्र में गौरैया चिड़िया के विभिन्न नाम चिड़ी, चिड़ा एवं चिड़िया का उल्लेख किया है। गौरैया चिड़िया हम सबको प्रातःकाल चीं, चीं, चूं, चूं करके जगाने का कार्य करती है।

बाल लेखिका ने जंगलों की अन्धाधुन्ध कटाई पर भी चिंता व्यक्त की है। इसके साथ ही मोबाइल टावर एवं मानव जाति द्वारा उपयोग में लिए जाने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआँ गौरैया एवं अन्य पक्षियों के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव डाल रहा है। जनसंख्या वृद्धि की कमी पर असर दिखाई दे रहा है।

बाल लेखिका ने फसलों को बचाने के लिए किसानों द्वारा अत्यधिक कीटनाशक दवाओं के उपयोग पर चिंता जाहिर की है, जिससे गौरैया चिड़िया नष्ट होने के कगार पर है। मानव जाति से गौरैया को बचाने की विनती है कि अपने घर एवं आसपास के सार्वजनिक स्थानों पर दाना-पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है। जनसंख्या वृद्धि हेतु ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर घोंसले लगाने पर बल दिया है।

अन्त में बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया संरक्षण हेतु प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाकर सोशल मीडिया पर जोर- शोर से बचाने की बातें करते हो, लेकिन अगले दिन ही भूल जाते हो। ये कैसा दिखावा है?

गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाकर गौरैया को नष्ट होने से बचा सकते हो। प्रत्येक मानव का कर्तव्य है कि प्रतिदिन हमारे लिए खान-पान (चुग्गा ) डालने के लिए आगे आयें। ताकि हमारी प्रजाति को बचाया जा सके।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान) पत्र समीक्षक

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक-54

बाल लेखिका- शिवानी नाग्रवाल

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खजूरिया, टोंक (राजस्थान)

पत्र लेखन प्रेरणा स्रोत- श्री नन्द सिंह तंवर, प्रधानाचार्य, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खजूरिया, टोंक (राजस्थान)

बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया की संवेदनाओं को अपने शब्दों में लिखा है। हे मनुष्य! तुम अपना विकास तो कर रहे हो, लेकिन इस प्रकृति का विनाश भी कर रहे हो। तुमने अपने स्वार्थ के लिए मुझे बेघर कर दिया। मैं तो तुमसे कुछ कह नहीं सकती, लेकिन भगवान् ने तो आपको बोलने की क्षमता प्रदान की है। तुमने प्रकृति की हर चीज को नुकसान पहुंचाया है। तुम तो इस धरा के रक्षक थे।

बाल लेखिका ने लिखा है कि हम सब इस पृथ्वी के किरायेदार हैं। एक न एक दिन इस धरती से सबको जाना है। फिर भी हमारे साथ अन्याय कर रहे हो। सबको जीने अधिकार है। इस धरती से बिना समय के ही हमें क्यों भेज रहे हो? 

बाल लेखिका ने कच्चे घरों की जगह पक्के घरों के निर्माण पर चिंता जाहिर की है। कितने दु:ख की बात है कि पर्यावरण प्रदूषण और लोगों की नयी तकनीक से गौरैया चिड़िया विलुप्त होती जा रही है।गौरैया सरंक्षण का मुख्य उद्देश्य लोगों को पक्षियों के प्रति एवं प्रकृति के सभी जीव-जन्तुओं के प्रति जागरूक करना है।

अन्त में बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया संरक्षण हेतु दाना पानी की व्यवस्था हम सबको करनी चाहिए ऐसा कहा। पेड़ों एवं घरों पर घोंसले लटकाने चाहिए। हे मनुष्यो! अपने कर्तव्य से पीछे मत हटो। गौरैया को बचाओ।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान) पत्र समीक्षक

पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक - 11

श्री मती कविता चौधरी, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय - टेहला, नागौर (राजस्थान)

लेखिका अपने पत्र में प्रकृति में अन्य जीवों के साथ-साथ विलुप्त होती गौरैया के बारे में अवगत  कराया है। कच्चे मकानों में मेरे रहने को स्थान रहता था, लेकिन बहुमंजिला इमारतों में घोंसले बनाने की जगह नहीं होती है। मानव की लालसाओं ने हमारे स्थान, जंगल, उपवन, घर, दाना-पानी आदि छीन लिए हैं। पहले मेरा घर में आना शुभ माना जाता था। आपके बच्चे मेरे साथ खेलते-कूदते थे, लेकिन आज इंटरनेट की दुनिया में बच्चे मोबाइल से खेलने लग गए। मेरे साथ खेलने में जो आनन्द आता था, वो मोबाइल के साथ तो आ ही नहीं पाता है।

लेखिका ने गौरैया को किसान हितैषी बताया है। गौरैया चिड़िया को मिट्टी में नहाते देखकर किसान प्रसन्नचित्त हो जाता था। वह जान लेता था कि अब वर्षा ज्यादा दूर नहीं है। महिलाएं पक्षियों को प्रातः काल दाना डालकर चुगने हेतु गीत गाती थीं।

देखो! पक्षियों के ख्वाब सुनहरे।

              पक्षियों को देख, मानव ने उड़ना सीखा।

देख चिड़िया को, बच्चो ने खाना सीखा

               सीखा उनसे माँ का प्यार।

विश्व में गौरैया की जनसंख्या सर्वाधिक थी। हमारी प्रजाति के विलुप्त होने का बड़ा कारण मनुष्य के दिल का छोटा होना। इसके अतिरिक्त कारण खेती में कीटनाशक दवाओं का अत्यधिक उपयोग, मोबाइल टावर की तरंगें, बिजली के तार, आहार की कमी आदि है। पहले किसान अपनी फसलों को काट कर खलिहानों में डालता था। अनाज निकालने में काफी समय लगता था, लेकिन आज किसान खेत से ही बोरियां भरकर घर ले आता है। अब हमारा दाना घरों में बन्द हो गया।

लेखिका ने गौरैया चिड़िया को पर्यावरण का बैरोमीटर बताया है। मैं पर्यावरण की स्वच्छता वाहक हूँ। जहाँ वातावरण सबसे शुद्ध व स्वच्छ हो, वहाँ गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती है।

लेखिका ने लिखा है कि टर्की देश में गौरैया चिड़िया संरक्षण को लेकर हर घर के बाहर घोंसले बने हुए हैं, लेकिन ब्रिटेन की एक संस्था ने सर्वे के आधार पर गौरैया को रेड लिस्ट में डाल दिया है, जो कि चिंता का विषय है।

अन्त में लेखिका ने गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए अपने घर या आसपास इनके दाना पानी की नियमित व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है। जनसंख्या वृद्धि हेतु उचित स्थानों पर घोंसले लगाये जाएं।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान) पत्र समीक्षक

पत्र विवरण

पत्र क्रमांक - 28

आदरणीया साहित्यकार प्रिया खन्ना, राजाजी पार्क, जयपुर (राज.)

लेखिका ने पत्र में गौरैया चिड़िया को मानव के आंगन की चिड़िया बताया है। कभी भी तुम्हें सूनेपन एवं खालीपन का अहसास नहीं होने देती थी। बचपन की यादें पत्र में तरोताजा प्रस्तुत की हैं।

लेकिन आज गौरैया चिड़िया अकेली हो गई है। अधिकांश घरों के आंगन में बगीचे होते थे। आज बगीचे की जगह बड़ी बड़ी गाडियाँ खडी़ रहती हैं। हम विलुप्त होने के कगार पर हैं।

लेखिका ने पत्र में मानव से गुहार की है कि तुम हमें अपने आंगन और बचपन का साथी फिर से बना लो। हमारा घर हमसे मत छीनो। जंगलों को तुम नष्ट करते जा रहे हो। उनके स्थान पर बड़ी बड़ी फैक्ट्रियां और कारखाने बनाते जा रहे हो। ये सब काला धुआँ निकालते हैं जो हमारे लिए घातक सिद्ध हो रहा है।

आज प्रकृति से बहुत सारे पशु पक्षी मानव की लापरवाही, शिकार और लालच की भेंट चढ़ चुके हैं। ये दूरभाष यंत्र भी हमारे लिए हानिकारक बन रहे हैं। समय से पहले हमारा प्रजनन हो रहा है। इस कारण हमारी जनसंख्या में गिरावट आ रही है।

हे मानव, आप थोड़ा तो विचार करो। हमारे संरक्षण के लिए अपने घर एवं आसपास के स्थानों पर दाना पानी की नियमित व्यवस्था करो।साथ में जनसंख्या वृद्धि के लिए उचित जगह घोंसले लटकाओ।

अन्त में लेखिका ने गौरैया चिड़िया को विलुप्त होने से बचाने की गुहार की है। चीं--चीं के स्वर को शान्त होने से रोक लो।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान) पत्र समीक्षक

पत्र विवरण

पत्र क्रमांक- 16

बाल लेखिका- दीपिका मोयल, जोधपुर (राजस्थान)

पत्र में बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया के आकार, आवाज, स्वभाव, उडान की क्षमता, और आहार के बारे में विस्तार से अपनी कलम से लिखा है।

गौरैया चिड़िया के विलुप्त होने पर चिंता जाहिर की है।

गौरैया की संख्या में निरन्तर गिरावट के अनेक कारण बताये गए हैं। जैसे-

1. अन्य पक्षियों एवं जानवरों से मारने का खतरा।

2. मानव निर्मित आवास में कमी।

3. किसानों द्वारा फसलों में कीटनाशक दवाओं का  अत्यधिक उपयोग।

4. तेजी से लगते मोबाइल टावर एवं दैनिक जीवन में लगातार मोबाइल का उपयोग।

5. भव्य ऊंची - ऊंची इमारतें।

6. जहरीला डीडीआं एवं ध्वनि प्रदूषण।

7. युवाओं द्वारा सर्दी के मौसम में अत्यधिक पतंगबाजी|

8. युवाओं में पशु पक्षी प्रेम का अभाव|

बाल लेखिका ने बताया कि गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए 20 मार्च को गौरैया दिवस सोशल मीडिया पर, गौरैया बचाओ आन्दोलन , अपने शबाब पर होता है। लेकिन दुर्भाग्य ही कह लीजिए कि एक दिवस जोर- शोर से हमारे हित की बात करने वाला समाज महज कुछ ही सप्ताह में यह भूल जाता है।

अन्त में लेखिका ने गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए भीषण गर्मी में अपने घर या आसपास के स्थानों पर दाना पानी एवं घोंसले लटकाये की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है।

सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)


पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक 50
वरिष्ठ साहित्यकार लाडो जी कटारिया, गुरुग्राम (हरियाणा)
               
पत्र के माध्यम से लेखिका ने विलुप्त होती गौरैया चिड़िया के अनेक नाम जैसे- महाराष्ट्र में (वर्ली), उड़ीसा में (सौरा), पंजाब में (चिरी), गुजरात में (चकली), उर्दू में (चिरैया), रामायण और महाभारत में (सावरा) के नाम से उल्लेख किया है। गौरैया चिड़िया के आकार, खूबसूरत रंग, आवाज आदि का वर्णन किया है।
               लेखिका ने गीत....... 
         एक चिड़िया, अनेक चिड़िया
         दाना  चुगने,  आई चिड़िया।
कितना मन को लुभाता था ये गीत।
भारतीय साहित्य में गौरैया का विशेष स्थान था। प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा ने अपनी कहानी, गौरैया में कामना की है कि हमारे शहरी जीवन को समृद्ध करने के लिए गौरैया चिड़िया फिर से लौटेगी।
लेखिका ने गौरैया चिड़िया के साथ साथ अन्य पक्षियों की प्रजातियां खत्म होने पर चिन्ता व्यक्त की है। 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' वाली कहावत केवल मनुष्य पर ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों पर भी लागू होती है। गौरैया चिड़िया को खदेड़ने में सबसे बड़ी भूमिका कबूतरों ने निभाई।
 गौरैया चिड़िया के विलुप्त होने के निम्न कारण बताये गए हैं-
1. महानगरीय परिवेश, बहुमंजिली इमारतें।
2. पेड़ों, पहाड़, नदियाँ, झीलों आदि का कटाव।
3. मोबाइल टावर, डीजे का ध्वनि प्रदूषण।
4. कीटनाशक दवाओं का उपयोग। 
लेखिका ने पत्र में लिखा है कि पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग बचे हैं जो खाना खाने से पहले भोजन का कुछ अंश पशु-पक्षियों के लिए निकालते थे,  लेकिन ये संस्कार नयी पीढ़ी में नजर नहीं आते हैं। भोगवादी संस्कृति में मानव के लिए चिन्तन-मनन का विषय है।
लेखिका ने गौरैया सरंक्षण के लिए बताया है कि जो भी इमारत बनाये वह आसपास के परिवेश के अनुकूल हो। रेन वाटर हार्वेस्टिंग का इन्तजाम हो, प्लास्टिक प्रतिबंधित हो|
लेखिका ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन देश की संस्था, रॉयल सोसायटी आफ बडर्स, ने तो गौरैया को रेड सूची में डाल दिया है|
अन्त में लेखिका ने गौरैया सरंक्षण के लिए घर की छत पर दाना पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही बागवानी भी करें। घोंसले लटकाये।
सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)
पत्र समीक्षा

पत्र क्रमांक  51
बाल साहित्यकार छात्रा वर्षा बगेरिया, राजकीय उच्चतर माध्यामिक विद्यालय, टेहला (नागौर), राजस्थान
विलुप्त होती गौरैया चिड़िया की पीड़ा को लेखिका ने अपनी कलम से लिखा है। हे! मानव, तुमने प्रकृति को नष्ट करने में कोई कसर नही छोड़ी है। अगर हम जैसे पक्षी नष्ट हो जाएंगे तो तुम क्षण भर के लिए भी जिन्दा नहीं रह पाओगे।
बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया विलुप्त होने के निम्नलिखित कारण बताये हैं-
1. पर्यावरण प्रदूषण,
2. कच्चे घरों की जगह बड़ी बड़ी बिल्डिंगें, मॉल आदि,
3. मोबाइल टावरों से निकलने वाली अदृश्य तरंगें,
4. कीटनाशक दवाओं का अत्यधिक उपयोग तथा
5. बढ़ता औद्योगीकरण।
बाल लेखिका ने बताया कि गौरैया चिड़िया को भी जीने का अधिकार है। हम भी अपने बच्चों का पालन पोषण करते हैं। मानव बुद्धिमान होते हुए भी हमारी चिंता नहीं करता है। हमारे लिए दाना पानी नियमित रखने के लिए आगे आये। तभी हमारा संरक्षण हो सकेगा।
अन्त में बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया की प्रजाति को बढ़ावा देने के लिए घोंसले लटकाने के लिए प्रेरित किया है। हमारे जैसे नन्हे परिन्दों को बचाये, हमारे बारे में सोचे और हमें पर्यावरण में रहने के लिए जगह दें।
सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)
पत्र समीक्षा
 
पत्र क्रमांक -22
पत्र लेखिका - परवीन बानो 
बाल लेखिका ने लिखा है कि गौरैया चिड़िया का वजूद खत्म होता जा रहा है। कविता की चंद पंक्तियों से शुरुआत की है|
        इन्सान चाहता है कि
        उसे उड़ने के लिए पर मिले
        और! हम चाहते हैं कि
        हमें रहने के लिए घर मिले|
बाल लेखिका ने गौरैया चिड़िया के विलुप्त होने के निम्नलिखित कारण बताये हैं-
1. पर्यावरण प्रदूषण,
2. अत्यधिक प्लास्टिक का उपयोग,
3. मोबाइल टावरों से निकलने वाली अदृश्य तरंगें.
4. कीटनाशक दवाओं का अत्यधिक उपयोग तथा
5. जहरीला धुवां।
दिल उदास हो जाता है जब आप लोग सिर्फ अपना भला सोचते हैं। गर्मियों के वक्त तेज धूप होती है दाना पानी की समस्या रहती है।  पत्र के माध्यम से बाल लेखिका ने सभी मानव जाति से गौरैया संरक्षण के लिए आगे आकर दाना पानी की व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया है।
बाल लेखिका ने प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित किया है।
अन्त में 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाकर इतिश्री करने से काम नहीं चलेगा। अगर हमारा संरक्षण नहीं किया तो गूगल चिड़िया के नाम से जाना जायेगा। हमारा बचाव करें। हमको आपके बीच रहने दें।

पत्र समीक्षा
 
पत्र क्रमांक 55
पत्र लेखिका-आदरणीया वरिष्ठ साहित्यकार डा. शील कौशिक, सिरसा (हरियाणा) 
लेखिका ने विलुप्त होती गौरैया चिड़िया की संवेदनाओं का चित्रण अपने शब्दों में लिखा है|विज्ञान और विकास ने चुनौतियां खडी़ कर दी है|विकास ने तो पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है| नयी पीढ़ी की अब पर्यावरण के प्रति लगाव में गिरावट आ रही है|
लेखिका ने चिंता व्यक्त कर लिखा है कि गगनचुम्बी इमारते और संचार क्रांति हम सब के लिए अभिशाप बन कर आई है| जगह जगह मोबाइल टावर नजर आ रहें हैं| भोगवादी संस्कृति ने हमें प्रकृति से दूर कर दिया|अब नन्ही सी गौरैया जाये तो कहाँ जाये|
प्रकृति ने सबको जीने का अधिकार दिया है| गौरैया चिड़िया का जीवन तो महज चार - पांच वर्ष का ही होता है| उस जीवन काल में भी अनेक मुसीबतों का सामना करना होता है|वैसे तो मैं किसानों की हितैषी हूँ लेकिन ज्यादा पैदावार लेने के लिए रासायनिक खाद एवं दवा का उपयोग कर गौरैया चिड़िया को मृत्यु के कगार पर खड़ा कर देता है| क्योंकि मानव स्वार्थी होता है|
लेखिका ने अत्यधिक पेड़ों का कटाव और औद्योगिक विकास के कारण फैक्ट्रियों से निकले रसायन व जहरीला धुआँ गौरैया के लिए हानिकारक बताया है| वाहनों का झूठा प्रदुषण मुक्त प्रमाण पत्र देकर प्रदुषण को बढ़ावा मिला है| हमारी कोई चिंता नहीं करता है|न मोबाइल टावर हटे, न प्रदुषण कम हुआ| अधिकांश बच्चे सर्दी के मौसम में चायनीज माझे का उपयोग करते पतंग उड़ाते नजर आते हैं|गौरया के पंख कट जाते हैं| यहाँ तक की मृत्यु भी हो जाती है|हे! मानव आप अपने बच्चों को समझाने का प्रयास करें|
लेखिका ने लिखा है कि हमारे बुजुर्ग पक्षियों की देखरेख किया करते थे| उनमें परोपकार की भावना थी| प्रात काल उठते ही चुग्गा डालने जाया करते थे| पानी के लिए मटकी का परिडा़ बना कर पेड़ पर लटकाते थे|लेकिन आज का मानव ऐसे पुण्य कार्य से दूर रहना चाहता है|
अन्त में लेखिका ने जोर देकर लिखा है कि गौरैया संरक्षण के लिए हम सबकों आगे आकर दान पानी की व्यवस्था करनी होगी|वरना गौरैया, गूगल गौरैया ,बन कर रह जायेगी|
सूचना प्रदाता - श्री शिवराज कुर्मी जी, टोंक (राजस्थान)          
पत्र समीक्षा
 
पत्र क्रमांक 56
पत्र लेखिका- छात्रा संगीता लांछा, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, टेहला जिला-नागौर (राजस्थान)
बाल लेखिका ने विलुप्त होती गौरैया चिड़िया की संवेदनाओं को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है। मानव अपने स्वार्थ के लिए छोटे-छोटे जीवों का भी विनाश कर रहा है, जबकि हम सब इनके हितैषी हैं।प्रातकाल चहचहाट कर इनको जगाने का प्रयास करते हैं। इनके बच्चे हमारे साथ आंगन में खेलते हैं। फिर भी हमारे से दूर होते जा रहे हो।
बाल लेखिका ने इस प्रजाति के विलुप्त होने के निम्न कारण बताये हैं।
 1. शहरीकरण,
 2. बदलती जलवायु,
 3. खेतों में अत्यधिक कीटनाशकों का उपयोग,
 4. वनों की अन्धाधुन्ध कटाई,
 5. मोबाइल टावर एवं मोबाइल फोन का उपयोग,
 6. गगनचुम्बी इमारतें,
 7. जहरीला धुआँ और
 8. बिजली के खुले तार।
मानव के द्वारा हमारे आवास समाप्त होते जा रहे हैं। थोड़ी-सी हरियाली व खरपतवार का तिनका-तिनका जोड़कर हम अपना घर बनाते हैं। पर्यावरण प्रदूषण के कारण हजारों तरह के पक्षियों को जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
इसी तरह वनों का विनाश होता रहा तो हमारी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जायेगी। बिजली के खुले तारों पर बैठने से हमारी मृत्यु हो जाती है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
बाल लेखिका ने लिखा है कि ओजोन परत में छेद होने से सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंचते ही पक्षियों के लिए हानिकारक हो रही हैं।
अन्त में बाल लेखिका ने मशीनरी का उपयोग कम करने को लिखा है। साथ ही ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और गौरैया चिड़िया संरक्षण के लिए अपने आसपास प्यास बुझाने के लिए परिडे़ लगायें। ऐसा आग्रह किया है। जनसंख्या वृद्धि के लिए घोंसले लगाये तथा नियमित रूप से चुग्गा डालने की आदत बनायें।
अगर हमारे जैसे पक्षी नष्ट हो जाएंगे तो आप क्षण भर के लिए भी जिन्दा नहीं रह पाओगे। अत: विनती करती हूँ कि हमारे जैसे नन्हे परिन्दों को बचायें एवं पर्यावरण में रहने को जगह दें। जियो और जीने दो, सिद्धांत का पालन करें।
पत्र समीक्षा
 
पत्र क्रमांक 52
पत्र लेखिका- वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती विमलेन्द्र राठी- कोटा
लेखिका ने विलुप्त होती गौरैया चिड़िया की संवेदनाओं को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है। पत्र के प्रारंभ में गौरैया चिड़िया के रूप, रंग, आकार, स्वभाव, रहन सहन, भोजन आदि पर प्रकाश डाला गया है।
लेखिका ने 'पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ' अभियान चलाकर बताया कि गौरैया एवं मानव का स्वार्थ निहित है, क्योंकि घटती ऑक्सीजन बढ़ेगी और मेरा कुल भी बचा पाओगे। दोनों को जीवनदान मिलेगा।
लेखिका ने बताया है कि गौरैया सर्वाहारी जीव है। किसानों की हितैषी हैं गौरैया। कीट- पतंगें, बीज, दाना, फल-सब्जियां आदि से गौरैया अपना पेट भरती है।
लेखिका ने चिंता व्यक्त कर लिखा है कि ग्लोबल वार्मिंग व बढ़ते आधुनिकीकरण के कारण विकिरण जो विशेषकर मोबाइल टावर से हो रहा है। जिससेे मेरी प्रजनन क्षमता क्षीण होती जा रही है। अत्यधिक कीटनाशक दवा का उपयोग किसानों द्वारा खेती में किया जा रहा है। मानव हमारे जीवन को खतरे में डाल रहा है। हमारी मृत्यु दर बढ़ रही है।
इसके अतिरिक्त हमारे दुश्मन बिल्ली, कुत्ते, सांप, बाज आदि हैं। हे मानव! हमारी विनती है ऑर्गेनिक खेती को अपनाकर मेरा और अपना उद्धार करो।
आने वाली पीढ़ी को मुझसे वंचित न करो। मैं तुम्हारे बच्चों को चहचहा कर खुश कर देती हूँ। मेरा आशियाना अपने आशियाने के साथ-साथ सुसज्जित करो।
अन्त में लेखिका ने 2022 की थीम  'गौरैया से मुझे प्यार है' के बारे में अवगत कराकर गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित किया है।
      "मैं  फिर  चहकूं  घर  आंगन  में,
      आपकी बालकनी की बगिया में।"
              
       ,

 


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