स्कूल संस्थापक स्व. श्रद्धेय चौ० जयपाल सिंह की पावन प्रतिमा के अनावरण आयोजन पर्व पर उनकी स्मृति में श्री कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण' के हृदयोदगार
मुक्तक
सब ही दानों में जगत के महा विद्या दान है।
मात्र विद्या से ही अर्जित करता मानव ज्ञान है।
ज्ञान से ही मार्ग मिलता जगत के कल्याण का।
ज्ञान ध्यान योग सब ही ईश का वरदान है।
जयपाल सिंह ने जुर्रानपुर में शिक्षा ज्योति जगाई।
ज्ञान ध्यान की चन्द्र चाँदनी गाँव-गाँव फैलाई।
उनके मन था शिक्षित हों सब व्यवस्था हो पावन।
रहे नहीं कोई अशिक्षित शिक्षा हो मन भावन।
दो हजार दस में शुभ अवसर खुशियाँ लेकर आया।
विद्यालय की नींव पड़ी हृदय सबका हर्षाया।
प्रधानाचार्य पोस्ट यहाँ की धर्मपाल ने पाई।
ज्ञान ध्यान की चन्द्र चाँदनी गाँव-गाँव फैलाई।।१।।
अध्यक्ष देशराज प्रबंधक विजयकुमार बनवाया।
बेटे उनके सुनील-अनिल का साथ हृदय से पाया।
दो हजार तेरह में फिर से पावनतम क्षण आया।
हाईस्कूल की मान्यता को विद्यालय ने पाया।
नर्सरी से कक्षा दस तक शिक्षा मिलती पाई।
ज्ञान ध्यान की चन्द्र चाँदनी गाँव-गाँव फैलाई।।२।।
जयपाल जी ने सन् ४६ में जन्म ग्राम में पाया।
२४ अप्रैल सन् २२ को त्यागी नश्वर काया।
संस्कारमय सादा जीवन धर्म-कर्म अनुगामी।
गीता का अध्ययन किया नित डोर सत्य की थामी।
महा आस्था परिवार ने सनातनी दिखलाई।
ज्ञान ध्यान की चन्द्र चाँदनी गाँव-गाँव फैलाई।।३।।
धर्मपाल जी ने निज पद का मान रखा है भारी।
हर अध्यापक अध्यापिकाएं रखें दक्षता न्यारी।
छात्र और छात्राएं सब ही शिक्षा पा हर्षाएं।
जयपाल सिंह के पूर्ण क्षेत्र में जन-जन ही गुण गाएं।
ऐसी महान विभूति भू पर ईश कृपा से आई।
ज्ञान ध्यान की चन्द्र चाँदनी गाँव-गाँव फैलाई।।४।।
मुक्तक
अनावरण लख प्रतिमा का हर यहां प्रफुल्ल मन है।
आज वृंदावन गया बन स्कूल का ये प्रांगण है।
आत्मा जयपाल जी की गर्व का अनुभव करेगी।
उपकार से आभारी उनके दीखता हर कोई जन है।
कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण' (रचयिता)
दिनांक 24/03/2024
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