समग्र विवरण
विषय - "नगाड़ों के संग हैं होली के रंग"।
'नगाड़ा' है क्या? - नगाड़ा एक वाद्य यंत्र है। यह एक तरह का ड्रम होता है, जिसका पिछला हिस्सा गोलाकार होता है। इसे आमतौर पर जोड़ों में बजाया जाता है। यह एक ताल वाद्य है, जिसका इस्तेमाल अपनी लयबद्ध ध्वनियों के लिए किया जाता है।
स्थान - रूपवास गाँव (दादरी) गौतम बुद्ध नगर! प्राचीन स्थानीय संस्कृति और रिवायत।
प्रक्रिया - पंद्रह दिन पहले से अभ्यास आरंभ कर देते हैं और उसमें स्थानीय युवा व बुजुर्ग सभी सम्मिलित रहते हैं। लगभग छह घंटे लगातार इसी तरह नगाड़े बजाए जाते हैं। इस प्रक्रिया को इस अवधि में नियमित रखने हेतु अभ्यास के साथ-साथ बाजुओं में ताक़त भी चाहिए इन बड़े बड़े नगाड़ों को संभालने और बजाने के लिए। दिलचस्प यह है कि ये छह घंटे बहुत जल्दी बीत जाते हैं।
प्रतिभाग - इस दुर्लभ प्रक्रिया का आनंद लेने के लिए निकटवर्ती गावों से भी।लोग एकत्र हो जाते हैं।




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