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सेवानिवृत्ति (31.03.2024) पर विशेष

अपने पिताश्री गजराज सिंह जी के अनुभवी निर्देशन में विनोद जी की शिक्षक के पद से निष्कलंक सेवानिवृत्ति और उनके भावी लक्ष्यों पर उनके लिए विशेष आग्रह पर तैयार भावगुच्छ।

मुक्तक

हर तरफ उल्लास की ही बह रही है आज धारा। 

सेवानिवृत्ति का अवसर विनोदजी का 

आया प्यारा। 

हर कोई ही आज यहां पर पीर बिछुड़न की समेटे। 

उनकी सरल सौम्यता को आज सबने ही निहारा।


सेवानिवृति के अवसर पर विनोद जी आपको खूब बधाई। 

आज आपकी सेवा अवधि सम्मुख आकर के मुस्काई।


लम्बी सेवा अवधि में तो मान आपने अनुपम पाया। 

हर बच्चे और सहपाठी को मिली आपकी निर्मल छाया। 

सदा आपने स्नेह डोर से पूरा कॉलेज बांधे रखा। 

कर्म स्वयं का लक्ष्य सिद्धि को जीवन भर ही साधे रखा। 

देख यह सेवानिवृत्ति आंख सभी की हैं छलकाई। 

आज आपकी सेवा अवधि सम्मुख आकर के मुस्काई।।१।।


सेवानिवृत्ति बाद का जीवन एक नया जीवन होता है। 

छोड़ विगत को नवजीवन में नूतन से सपने बोता है। 

कभी-कभी जिम्मेवारी से मानव मुक्त नहीं हो पाता। 

काम पड़े जो अभी शेष हैं सोच उन्हीं में वो खो जाता। 

लेकिन इसकी चिन्ता देखा नहीं आपके मुख पर आई।

आज आपकी सेवा अवधि सम्मुख आकर के मुस्काई।।२।।


अब से हर परिवारी घर में सदा आपको निकट पायेगा।

सच पूछो तो सभी पुरातन गीतों को मिलकर गायेगा। 

अब नूतन जीवन इस जग में फिर से सृजनता पाएगा। 

बड़े प्यार से जीवन का पथ मंजिल तक ही पहुंचायेगा। 

राह दिखाई जो औरों को सम्मुख आज वही है पाई। 

आज आपकी सेवा अवधि सम्मुख आकार के मुस्काई।।३।।


आज सभी की यही कामना नवजीवन यह महका पाए। 

संकट कोई जीवन भर ही नहीं कभी भी आ टकराए। 

शतवर्षी जीवन जी करके छू लो ऊँचे सोपानों को। 

पूरे ही परिवार सहित अब पूर्ण करो निज अरमानों को। 

आज ईश से सब अपनों ने केवल यह ही आस लगाई। 

आज आपकी सेवा अवधि सम्मुख आकार के मुस्काई।।४।।


रचयिता - कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण'

(उलझन सुलझन के प्रणेता राजीव के भावों के अनुसार)

दिनांक 31/03/24

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