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साहस से भविष्य निर्माण का सामूहिक संकल्प

ग्राम पाठशाला के देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तकालयों की स्थापना संबंधी अभियान ने जनता में गजब की ऊर्जा का संचार किया है। अपनी आगामी पीढ़ी के भविष्य के विषय में सोचकर ग्रामीण निरंतर ऐसे निर्णय ले रहे हैं जो बालकों के भविष्य का निर्माण कर सकने में मदद कर सकें।

ऐसे कुछ उदाहरणों का उल्लेख हम यहां करना इसलिए जरूरी समझते हैं क्योंकि उन निर्णयों को समझकर ही हम लोग इस अभियान में छिपी गंभीरता से अवगत हो सकेंगे।

अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ है जब एक अनजान नंबर से ग्राम पाठशाला के कारीधारियों को फोन आया। फोन करने वाले से जब पूछा गया कि वह कौन बोल रहे हैं तो प्रत्युत्तर में फोनकर्ता ने बताया कि उनका नाम दीपचंद भागीरथी राव है और वह मुंबई से बोल रहे हैं। आगे फोन करने के उद्देश्य का विवरण उपलब्ध कराते हुए उन्होंने बताया कि वह यूट्यूब पर 'विलेज लाइब्रेरी' सर्च कर रहे थे तो उन्हें 'ग्राम पाठशाला' की मुहिम के विषय में जानकारी हुई और वो इस मुहिम से प्रभावित हुए और फोन कर रहे हैं। अब आगे का विवरण आपको इन सज्जन की भावना को और स्पष्ट तथा क्लियर कर देगा जब आप जानेंगे कि वो सज्जन तमाम सीमितताओं के बाद भी प्रति वर्ष अपने गाँव में अपने महापुरुषों के सम्मान में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन  नियमित रूप से करते रहे हैं। 

ऐसे कार्यक्रम को करने के लिए कुछ न कुछ राशि भी निश्चित रूप से व्यय होती रही होगी, लेकिन जब विलेज लाइब्रेरी की तलाश करने के दौरान ग्राम पाठशाला अभियान का विवरण उनको मिला तो उन्होंने एक निर्णय लिया कि इस वर्ष वह इस कार्यक्रम पर व्यय होने वाली धनराशि से अपने गाँव में पुस्तकालय बनवाएंगे। यह ग्राम पाठशाला अभियान की भांति एक संकल्प ही था।

इस शख्स से जब उनके गाँव के विषय में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक गाँव से हैं और मुंबई में अपने परिवार के भरणपोषण के लिए हैं। इस व्यक्ति का समर्पण भाव देखिए कि वह मुंबई से सैंकड़ों कोस दूर अपने काम में संलग्न होने के बावजूद भी अपनी अगली पीढ़ी के भविष्य को लेकर चिंतित है और पुस्तकालय के निर्माण के विषय में सोच रहा है तो इसलिए कि उसको अपने इस निर्णय में अपनी आगामी पीढ़ी का भविष्य दिख रहा है और बालकों को समाज में निरंतर बढ़ती आवारागर्दी से बचाकर उसके जीवन को कर्मठता की दिशा देना है।


एक अन्य उदाहरण और है कृषक समुदाय के प्रतिनिधि इसी प्रदेश के मेरठ जनपद के एक छोटे से गांव डेरियो रछौती का। यहां पर एक कृषक अमरजीत ने पुस्तकालय निर्माण के लिए सौ गज जमीन दान कर दी और उस पर नि:शुल्क पुस्तकालय आज अस्तित्व में आ गया। अब असंख्य बच्चे अपने अतिरिक्त समय को पुस्तकालय में व्यतीत करने लगे हैं और असामाजिक गतिविधियों में उनकी संलिप्तता में कमी आई है।

ऐसे उदाहरण ग्राम पाठशाला के विचार और अभियान को यह देखकर और दृढ़ तथा बेहद प्रभावित यदि कर रहे हैं तो यह सोचकर कि अपने गाँव के लिए इतनी दूर रहकर या गांव में होते हुए भी इतनी समृद्ध सोच रखने वाले नागरिक तो अवश्य ही आर्थिक रूप से सम्पन्न व्यक्ति होंगे, लेकिन जब ज्ञात हुआ कि मुंबई से बोल रहे राव साहब तो ऑटो चलाते हैं, तो ग्राम पाठशाला के कारीधारी इस इंसान के मुरीद हो उठे तो इसलिए कि अपने गांव से इतनी दूर रहकर भी अगली पीढ़ी के भविष्य के लिए ऐसी साहसिक प्रयास की सोच बेहद प्रशंसनीय थी।








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