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विनम्र आग्रह

समाज में प्रोत्साहन एक ऐसा कारक है जो वास्तव में किसी व्यक्ति या समुदाय को किसी काम या उद्देश्य विशेष के लिए प्रेरित करने के किया जाने वाला प्रयास होता है। समाज में निरंतर ऐसे प्रयास होते रहते हैं कि लोग स्वयं ही प्रोत्साहन बनें मसलन ऐसा  व्यक्ति जो दूसरे सबको भी स्वाभाविक तरीके से प्रोत्साहित कर आगे प्रगति करने के लिए उत्साहित कर सके। यदि ऐसे व्यक्तियों की समाज में पहचान करने का प्रयास किया जाए तो वो लोग इतनी कम मात्रा में मिलेंगे कि उस नंबर को जानकर कोई भी दंग रह जाएगा और पाएंगे कि वह संख्या समाज में नगण्य है।  एक उदाहरणस्वरूप देखिए कि जागरूकता की अलख जगाने के लिए कृतसंकल्पित शब्दशिल्प समूह के रचयिताओं को वर्षों की लंबी अवधि में ऐसा केवल एकमात्र व्यक्ति मिला, जिनको मंडौरा स्थित नारायण विद्यापीठ स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह की पहल पर आमंत्रित किया गया और कार्यक्रम के अन्त में जब उनका संबोधन हुआ तो प्रतिभाग करने वाला हर आयु का व्यक्ति किंकर्तव्यविमूढ़ होकर रह गया और काफी देर तक चला उनका संबोधन भी उपस्थितजनों को बांधे रहा। उस सिद्धहस्त मानव संपदा ने अपनी विविधता भरी प्रस्तुति से उपस्थित हर आयु के नागरिक को मुख्य अतिथि प्रशिक्षक और विविध विधाओं के ज्ञाता तथा ग्रामीण विषयों के जानकार डॉ. महिपाल की भूरी-भूरी प्रशंसा करने के लिए मौलिक रूप से विवश कर दिया। दोष ढूंढने और निरर्थक आलोचना करने या लोगों की आलोचना करने में अपना समय व्यर्थ बर्बाद करने से कहीं अधिक प्रभावी है उन मुख्य अतिथि डॉ. महिपाल की तरह हर किसी अर्थात् सब ही को प्रोत्साहित करने का प्रयास। यह महिपाल जी की आकलन क्षमता ही थी कि बालकों की प्रस्तुति, समर्पण और मौलिक प्रदर्शन से अभिभूत होकर उन्होंने अपने संबोधन के मध्य ही बालकों को भविष्य के लिए और बेहतर रूप से तैयार करने के लिए स्कूल प्रबंधन को दस हजार रुपए डोनेट करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि स्कूल के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह ने यद्यपि उसको साभार अस्वीकार कर अपने बूते बच्चों को तैयार करने का वादा वादा मुख्य अतिथि से किया।
दरअसल अच्छाई की ताकत बनने के परिणामस्वरूप न केवल आप अपने बारे में बेहतर महसूस करेंगे, बल्कि आप लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला पाएंगे। ऐसा अहसास इस कार्यक्रम में सहभागिता करने वालों को यदि हुआ तो उसके पीछे एक ही इंसान था। उनका निरंतर प्रयास था कि उपस्थितजन महसूस कर सकें कि हर कोई अपना जीवन ऐसे तरीके से जीता है जो प्रतिबिंबित करता है कि उन्होंने जीवन के अनुभव से कुछ ना कुछ सीखा है तथा और सीख सकते हैं, और आगे बढ़ सकते हैं। 'हर कोई एक जैसा नहीं सोचता' , यह जानें और मानें कि आप जो जानते हैं वह हर कोई नहीं जानता। हर किसी में जागरूकता का स्तर समान नहीं होता। अतः जागरूकता एक सर्वकालिक आवश्यकता और सबकी जरूरत है।

आप और हम दुनिया में जो देखना चाहते हैं उसे और अधिक प्रोत्साहित करके लोगों को अपना जीवन सकारात्मक तरीके से जीने में मदद कर सकते हैं। लोगों को ऊपर उठाकर, लोगों का हौसला बढ़ाकर, दोस्त बनाकर तथा स्थितियों को समझ व समझाकर।

हम एक अच्छा उदाहरण बनकर लोगों को शिक्षित करने में मदद करें, दयालु हों और उत्साहवर्धक रहें। ईमानदार हों, सहनशील बनें। दूसरों को भी ईमानदारी से रहने के लिए प्रेरित करें। उदाहरण व उत्प्रेरण के द्वारा नेतृत्व करें।

शब्दशिल्प




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