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शुभ कामनाएं


प्रिय राकेश एवं सौ. रश्मि को चवालीसवीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण' की आशीष भरी बधाई। मासिक उलझन सुलझन की ओर से भी।

'रश्मि' और 'राकेश' युगल को कृष्ण हृदय से देत बधाई। 

वर्षगाँठ   शादी   पर  देखी  कली  स्वयं  मुस्का  शरमाई। 

नित  नूतन  राकेश  गगन  से  प्यारी  रश्मि  बिखराता  है। 

पर  भू  का  राकेश  यहां पर रश्मि संग  नित इठलाता है।


युगल    मनोहर   ऐसे,   ईश्वर  अपने  हाथों  से  गढ़ते हैं। 

स्वयं  'कृष्ण'  के  हाथ  शीश  पर स्वतः ही पाये बढ़ते हैं। 

नील गगन की रश्मि तक पर कभी-कभी बदरा घिर जाते। 

लेकिन   इससे  चंद्र  स्वयं  भी  कहाँ  दिखे  हैं   घबराते। 


रोगी  रूपी  बदरी  भू  पर  यदि  कभी  रश्मि  को   घेरे। 

यही  सोचना  यह  बदरी  तो  ऐसे  ही  करती  है   फेरे। 

स्वर्ण  जयंती  शादी  आकर  तुम  दोनों को दुलरायेगी। 

हीरक  जयन्ती  समारोह  का न्योता दे कर के जायेगी।


अग्रज  'कृष्ण'  सदा ही तुमको अपने हृदय में पाता है। 

हर्षाता  लख  तुम  दोनों  को  अपने  उर  में  हर्षाता है। 

आशीषों से युक्त बधाई आज  'कृष्ण' यह भेज रहा है। 

सदा  तेज  ऐसे  ही  चमके जैसा अब तक तेज रहा है। 


कृष्णदत्त शर्मा 'कृष्ण'                   दिनांक 18.02.24




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